Loksaakshya Social

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

September 12, 2026

निजी सहायक के घर ईडी के छापे के बाद पूर्व सीएम हरीश रावत ने छोड़े कांग्रेस पार्टी के सभी पद

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने निजी सहायक रहे चंदन सिंह जीना के घर ईडी के छापे के बाद कांग्रेस पार्टी में अपने सभी पदों को छोड़ने की घोषणा की। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि उनके निजी सहायक ने वास्तव में कोई अपराध किया है, तो इस पर वह खुद लज्जित हैं। हालांकि, उन्होंने किसी भी घोटाले से खुद को अलग किया है। साथ ही कहा कि यदि किसी के पास उनकी संलिप्तता के कोई प्रमाण है तो वह कोई भी सजा भुगतने को तैयार हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

ये है प्रकरण
गुरुवार को खबर आई कि उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) परीक्षा धांधली में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के निजी सहायक (पीए) चंदन सिंह जीना के घर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बृहस्पतिवार को छापा मारा। ईडी ने उनके घर से 32 लाख रुपये की बेहिसाबी नकदी, 12 लग्जरी घड़ियां और 200 ग्राम से ज्यादा सोना जब्त किया है। इसके अलावा जीना और उनके परिवार के खातों में 52 लाख रुपये की बैलेंस को फ्रीज किया गया है। इस संपत्ति की कुल कीमत 1.28 करोड़ रुपये आंकी गई है। जीना पूर्व सीएम हरीश रावत के 2014 से 217 तक ओएसडी भी रह चुके हैं। जीना का मोबाइल भी ईडी ने फोरेंसिक जांच के लिए कब्जे में लिया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

मीडिया की खबरों के मुताबिक, यूकेएसएसएसी की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (वीपीडीओ) परीक्षा-2016 में हुई धांधली की जांच पहले विजिलेंस ने शुरू की थी। इसके बाद वर्ष 2023 में इस मामले को एसटीएफ को सौंप दिया गया। एसटीएफ ने पूर्व अध्यक्ष, सचिव और परीक्षा नियंत्रक को गिरफ्तार कर लिया था। इस प्राथमिकी और पुलिस जांच में आए तथ्यों के आधार पर ईडी ने भी मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की। इसके लिए ईडी ने बृहस्पतिवार को विशेष तलाशी अभियान चलाया। इसमें ईडी आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष आरबीएसस रावत, सचिव आरएस कन्याल, परीक्षा नियंत्रक आरएस पोखरिया व परीक्षा आयोजित कराने वाली कंपनी के अफसरों के घर छापे मारे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

हरीश रावत का बयान
इस मामले में सोशल मीडिया में हरीश रावत का बयान आया है। उन्होंने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि- सामने टीवी पर खबर आ रही है कि देहरादून में हरीश रावत के पीए के पास भारी मात्रा में कैश और ज्वैलरी आदि पकड़ी गई या पकड़ाई गई। इस तथ्य का खुलासा तो आने वाले समय में होगा और यह सत्य है कि श्री जीना मेरे ओएसडी रहे हैं और मैं जितने भी पदों पर रहा, चाहे पार्टी में रहा या सरकार में रहा, वह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालते रहे हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

लज्जित हूं, फिर भी विश्वास नहीं
हरीश रावत आगे लिखते हैं कि श्री जीना एक निहायती सज्जन, विनम्र और काम करने वाले व्यक्ति हैं। यदि ग्राम सेवकों की भर्ती में ओएमआर शीट के साथ छेड़छाड़ की और यदि इस तरीके की कोई भी गलती उन्होंने की है, उसके प्रमाण हैं तो उनके इस तथाकथित दुस्साहसिक कृत्य के लिए मैं लज्जित हूँ। परंतु मुझे इस आरोप पर बिल्कुल विश्वास नहीं है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

चुनााव के लिए नरेटिव बनाने का प्रयास
हरीश रावत ने कहा कि उत्तराखंड के चुनाव में भारी स्टेक्स हैं। मुझसे जब भी कोई व्यक्ति पूछता था कि चुनाव कब हो रहे हैं? तो मैं हंसी में उनसे कहता था कि भई चुनाव तब होंगे, जब सीबीआई मेरे दरवाजे पर दस्तक देने आएगी। यदि अभी नहीं आई है तो इसका अर्थ है कि चुनाव अगले वर्ष मार्च-अप्रैल में ही होंगे। लेकिन इस बार मेरे घर पर नहीं, मेरे एक सहयोगी के घर पर दस्तक देकर एक नरेटिव बनाने का प्रयास किया गया है। कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस कार्यकर्ता भ्रष्टाचार के खिलाफ लामबंद होकर लड़ रहे हैं। राहुल गांधी जी राष्ट्रीय स्तर पर ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षा प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

दोनों पदों से हटने की घोषणा
हरीश रावत ने कहा कि- ऐसे समय में हरीश रावत के किसी भी कृत्य से यदि पार्टी के संघर्ष में कोई कमजोरी आती है, तो मैं ऐसा बिल्कुल नहीं चाहूँगा। इसलिए मैंने अभी अपने ईष्ट देवता का स्मरण करके एक बड़ा निर्णय लिया है कि मैं किसी सरकारी पद पर तो हूं नहीं, कि उससे त्यागपत्र दूं। हां मैं, उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी का सदस्य हूं और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस कार्यसमिति का स्थाई आमंत्रित सदस्य हूं और मैं बहुत विनम्रता पूर्वक इन दोनों पदों से हटना चाहूंगा, क्योंकि पार्टी के संघर्ष में कोई कमजोरी मेरी वजह से नहीं आनी चाहिए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उत्तराखंड के लोगों से मांगी माफी
हरीश रावत ने लिखा कि- रहा प्रश्न अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का? उसका गठन हमने राज्य के नौजवानों के भविष्य को दृष्टिगत रखते हुए किया। हमने पब्लिक सर्विस कमीशन को समय पर परीक्षाएँ लेने के लिए बाध्य किया, यहाँ तक कि दो बार शीर्ष पदों की भर्तियाँ हुईं, हमारे छोटे से कार्यकाल में‌। हमने भर्ती बोर्ड्स बनाए, मेडिकल भर्ती बोर्ड बनाया, शिक्षा भर्ती बोर्ड बनाया। यदि उस प्रक्रिया के दौरान नियुक्तियों में हमसे कोई एरर ऑफ़ जजमेंट हो गया है, तो मैं उसके लिए उत्तराखंड के लोगों से क्षमा प्रार्थी हूँ। मगर मैं विनम्रता पूर्वक अपना यह दावा दोहराना चाहता हूं कि हमारे 3 वर्ष के कार्यकाल में 42000 से ज्यादा सरकारी पदों पर भर्तियां हुई हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

लिया पूर्व सीएम खंडूड़ी का नाम
उन्होंने कहा कि हमने अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के चेयरमैन के पद पर जिस व्यक्ति को नियुक्त किया था, जिन्हें मैंने ही शिकायत मिलने के बाद हटाया या उनसे इस्तीफा माँगा, जो भी जिस रूप में भी कह लिया जाए। उनकी नियुक्ति पिछले सेवा रिकॉर्ड के आधार पर की गई थी। वो जिस वर्ग से आते थे, मैं चाहता था कि सत्ता में उस वर्ग की भी हिस्सेदारी हो और उनकी नियुक्ति के विषय में मुझे सबसे प्रभावी सलाह तत्कालीन पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी जी ने दी थी। वो दो बार मेरे पास उनकी नियुक्ति के संदर्भ में मिलने आए थे। मेरी आज भी धारणा है कि खंडूड़ी जी भ्रष्टाचार के समन के लिए हमेशा काम करते रहे। मैं इतना और बताते चलूँ कि कौन व्यक्ति कहाँ पर गलती कर दे, कोई नहीं जान सकता है। क्या आरएसएस ने जाना होगा कि जिस व्यक्ति को उत्तराखंड के अपने पर्यावरण मंच का अध्यक्ष बना रहे हैं, वो व्यक्ति इस तरीके के भ्रष्ट कृत्य करेगा? और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष के रूप में कलंकित होगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

यदि प्रमाण हो तो वे दंड के लिए तैयार
हरीश रावत ने लिखा कि नियुक्तियों व परीक्षाओं में गड़बड़ी हमारी आने वाली पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं और यदि मुझसे जाने-अंजाने में भी कोई ऐसा कृत्य हुआ है, जिससे हमारे राज्य के नौजवानों के भविष्य पर दुष्प्रभाव पड़ा है, तो उसके लिए मैं अपने को प्रताड़ना का पात्र मानता हूं और मैं राज्य के लोगों से इस चूक के लिए क्षमा चाहता हूं और मैं सार्वजनिक रूप से एक अपील भी करना चाहता हूं कि यदि किसी व्यक्ति को इस तरह की की नियुक्तियों के मामले में हस्तक्षेप करने की मेरी संलिप्तता के कोई प्रमाण उनके पास हों तो वो उन प्रमाणों को सीबीआई, ईडी या राज्य पुलिस को जरूर उपलब्ध करवाएं। क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति को जिसे बड़े दायित्व को संभालने का अवसर मिलता है तो उन्हें हमेशा इस तरीके के घृणित प्रलोभनों से बचना चाहिए और यदि मुझसे कोई ऐसी चूक हुई है तो पुनः दोहरा रहा हूं कि मैं अपने को दंड का पात्र समझता हूं और कानून को मुझे दंडित करना चाहिए।
नोटः सच का साथ देने में हमारा साथी बनिए। यदि आप लोकसाक्ष्य की खबरों को नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए आप्शन से हमारे फेसबुक पेज या व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ सकते हैं, बस आपको एक क्लिक करना है। यदि खबर अच्छी लगे तो आप फेसबुक या व्हाट्सएप में शेयर भी कर सकते हो। यदि आप अपनी पसंद की खबर शेयर करोगे तो ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी। बस इतना ख्याल रखिए।

Bhanu Bangwal

लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।