जनता पेट्रोल बचाएं, सत्ताधारी रैलियों में पेट्रोल उड़ाएं, फिर ईंधन का संकट कैसे होगा दूरः मोहित डिमरी
उत्तराखंड मूल निवास भू कानून संघर्ष समिति के संयोजक मोहित डिमरी ने बीजेपी और उत्तराखंड की बीजेपी सरकार पर करारा हमला बोला। उन्होंने कहा कि एक तरफ देश में पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस का संकट है। इनके दामों में लगातार वृद्धि हो रही है। इसका असर महंगाई बढ़ने के रूप में जनता पर पड़ रहा है। रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाली वस्तुएं आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री लोगों को ईंधन बचाने का ज्ञान देते हैं, लेकिन हकीकत कुछ और है। सारा ज्ञान आम जनता के लिए है। खुद बीजेपी के नेताओं, कार्यकर्ताओं और उत्तराखंड की बीजेपी सरकार पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के देहरादून दौरे के दौरान सड़कों पर उतरीं गाड़ियों की लंबी कतारों के रूप में देहरादून की सड़कें वाहनों से अट गईं। ये वीआईपी संस्कृति और फिजूलखर्ची का जीता-जागता उदाहरण है। उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी की नसीहत सिर्फ जनता के लिए क्यों है? इसका जवाब बीजेपी नेताओं को ही देना चाहिए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आम जनता से पेट्रोल-डीजल कम खर्च करने की अपील का हवाला देते हुए सरकार की कथनी और करनी पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक तरफ देश के प्रधानमंत्री आम जनता को ईंधन बचाने की नसीहत देते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी ही पार्टी के राष्ट्रीय नेता और मंत्री दर्जनों गाड़ियों के अनावश्यक काफिले के साथ घूम रहे हैं। ऐसे में ये भी बताना चाहिए कि ईंधन संकट कैसे दूर होगा। कैसे महंगाई पर रोक लगेगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
नियम सबके लिए समान हों
रुद्रप्रयाग विधानसभा से मोहित डिमरी पिछला चुनाव लड़ चुके हैं। इस युवा नेता ने प्रधानमंत्री मोदी को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि त्याग की उम्मीद सिर्फ जनता से नहीं की जानी चाहिए। अगर वाकई देशहित में ईंधन बचाना सरकार की प्राथमिकता है, तो इसकी शुरुआत नेताओं के इन आलीशान और फिजूलखर्च काफिलों पर रोक लगाकर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आम जनता की जेब पर बोझ डालकर देशहित की बातें करना बंद होना चाहिए और नियम चाहे दिल्ली-देहरादून में बैठा बड़ा नेता हो, या सड़क पर चलने वाला आम नागरिक, सबके लिए बिल्कुल बराबर होने चाहिए।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


