एडवांसिंग सस्टेनेबल इनोवेशन एंड कम्युनिटी इंपैक्ट को लेकर देहरादून में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी शुरू
स्पेक्स, स्पीकिंग क्यूब और अवलोकन संस्था के तत्वावधान में एडवांसिंग सस्टेनेबल इनोवेशन एंड कम्युनिटी इंपैक्ट विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का देहरादून के एक होटल परिसर में शुभारंभ किया गया। इस सम्मेलन में देशभर से प्रख्यात शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्योग विशेषज्ञों, प्राचार्यों एवं विचारकों ने सहभागिता की और सतत विकास एवं सामुदायिक परिवर्तन में नवाचार की भूमिका पर गहन विचार-विमर्श किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं फारेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट के वैज्ञानिक डॉ. वीके वार्ष्णेय ने नॉन टिम्बर फारेस्ट में रसायन विज्ञान के उपयोग विषय पर प्रभावशाली मुख्य भाषण दिया। उन्होंने विस्तार से बताया कि किस प्रकार रसायन विज्ञान वन उत्पादों के मूल्य संवर्धन, संरक्षण तथा उनके सतत उपयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वैज्ञानिक उपयोग से ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ किया जा सकता है, पर्यावरण-अनुकूल उद्योगों को बढ़ावा मिल सकता है तथा जैव विविधता का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सकता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. दीपिका चमोली शाही के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का अभिनंदन करते हुए सतत विकास, नवाचार एवं सामुदायिक प्रभाव पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने मानव मस्तिष्क की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि नवाचार की शुरुआत सोच से होती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि एक जागरूक, रचनात्मक एवं सामाजिक रूप से उत्तरदायी मानसिकता ही स्थायी और सार्थक परिवर्तन की आधारशिला है। उन्होंने यह भी कहा कि सतत विकास केवल तकनीकी उन्नति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें नैतिकता, जागरूकता तथा समाज एवं पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी आवश्यक है। उन्होंने प्रतिभागियों को समाधान-उन्मुख एवं बहु-विषयक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
सम्मेलन में डॉ. अनिल जग्गी की ओर से इन्नोवेशंस एंड कम्युनिटी इम्पैक्ट विषय पर मुख्य व्याख्यान प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने सतत विकास हेतु तकनीकी नवाचारों के समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण सम्मेलन कार्यवाही का विमोचन रहा। इस अवसर पर विभिन्न विशिष्ट शोधकर्ताओं को एक्सलेन्स इन रिसर्च अवार्ड से सम्मानित किया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इनमें धनौरी पीजी कॉलेज हरिद्वार के प्राचार्य प्रो. विजय कुमार, उत्तरांचल विश्वविद्यालय, प्रेमनगर, देहरादून के चेयरमैन एवं संस्थापक डॉ. विनोद भट्ट, इंजी. सुधीर जुगरान, , विश्वविद्यालय, जयपुर की उप निदेशक एवं कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग की प्रो. (डॉ.) प्रियंका कौशिक, शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, देहरादून के डीन अकादमिक डॉ. सुरमधुर पंत, माया देवी विश्वविद्यालय में वनस्पति विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पारुल सिंघल, BFIT ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, देहरादून की हेड एकेडमिक सर्विसेज डॉ. अंजलि खरे सोनवानी, सेंटर ऑफ बिजनेस इन्क्यूबेशन एंड इनोवेशन, शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के एसोसिएट डीन अजय कुमार वर्मा, लॉ कॉलेज, उत्तरांचल विश्वविद्यालय, देहरादून के राहुल महला, HRIT विश्वविद्यालय, गाजियाबाद के रजिस्ट्रार विनोद कुमार, , , गणित विभाग ग्वालियर में स्वतंत्र शोधकर्ता डॉ. रचना राठौर, CRIS – DNA लैब्स के प्रबंध निदेशक एवं प्रमुख डॉ. नरोटम शर्मा, स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड कॉमर्स के प्रो. (डॉ.) सौरभ प्रताप सिंह राठौर, विश्वविद्यालय, ग्वालियर से विक्रांत, सिपेट देहरादून के निदेशक एवं प्रमुख डॉ. प्रताप चंद्र पांधी, श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय में जैव प्रौद्योगिकी विभाग के रजिस्ट्रार एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. लोकेश गंभीर, वीएसकेसी राजकीय पीजी कॉलेज, डाकपत्थर में सहायक प्रोफेसर डॉ. पी. एस. चौहान, सिपेट, देहरादून में सहायक तकनीकी अधिकारी पंकज फुलारा शामिल थे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
सम्मेलन में श्री देव सुमन विश्वविद्यालय के डीन रिसर्च डॉ. जी. के. धींगरा ने कहा कि सततता के लिए बहु-विषयक शोध दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सतत नवाचार को आर्थिक विकास, पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक समावेशन के संतुलन के रूप में परिभाषित किया तथा सामुदायिक प्रभाव को मापनीय सामाजिक परिवर्तन से जोड़ा। स्पेक्स के अध्यक्ष डॉ. बृज मोहन शर्मा ने कहा कि यदि नवाचार प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए किया जाए, तो वह स्वाभाविक रूप से समाज एवं समुदाय के लिए अधिक उपयोगी सिद्ध होता है।
इस सम्मेलन में हरी राज सिंह, बलेंदु जोशी, आर. के. मुखर्जी सहित अनेक प्राचार्यों, प्राध्यापकों एवं शिक्षाविदों की सक्रिय सहभागिता रही। कार्यक्रम का समापन डॉ. बृज मोहन शर्मा द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं आयोजकों का आभार व्यक्त किया।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


