1000 करोड़ रुपए के एलयूसीसी घोटाले को लेकर दिल्ली जंतर मंतर पर उत्तराखंडियों का प्रदर्शन, राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग
उत्तराखंड में 1000 करोड़ रुपए के लेनदेन के आर्थिक अपराध से जुड़े एलयूसीसी (Lucc) घोटाले को लेकर श्रीनगर गढ़वाल से पत्रयात्रा कर सरस्वती देवी और उनके साथी दिल्ली के जंतर मंतर पर पहुंचे। इस दौरान उत्तराखंड कांग्रेस के उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप भी धरने में शामिल हुए। साथ ही उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश राव ने भी मौके पर पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दिया। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
धीरेंद्र प्रताप और सरस्वती खंडूरी ने इस मौके पर केंद्रीय वित्त मंत्री सीतारमण से घोटाले में नुकसान उठाने वाले उत्तराखंड के भोले वाले नागरिकों को आर्थिक सहायता देकर इस लूट से उभारने की मांग की। वहीं, हरीश रावत ने उन्हें विश्वास दिलाया कि वे यथासंभव इन लोगों की सहायता का प्रयास करेंगे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस अवसर पर पूर्व कांग्रेस संयुक्त सचिव हरिपाल रावत, राज्य आंदोलनकारी अनिल, पत्रकार कुशाल जीना, सुरेंद्र खंडूरी, सत्येंद्र रावत, अनिल प्रताप थलवाल, सुनील नेगी, राकेश बिंजोला, दीपक ध्यानी, सुरेंद्र खंडूरी समेत अनेक लोग मौजूद थे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
ये है प्रकरण
गौरतलब है कि उत्तराखंड में साल 2016 में श्रीनगर गढ़वाल में LUCC नाम की कंपनी ने सोसाइटी बनाकर आम लोगों से पैसा इकट्ठा करना शुरू किया था। पूरे प्रदेश में लगभग 37 ब्रांच LUCC की खोली। LUCC चिटफंड कंपनी ने आम लोगों का भरोसा जीतने के लिए कंपनी में स्थानीय लोगों को भी नौकरी दी थी। लगभग 25 हजार कंपनी में एजेंट बने। इनके माध्यम से आम लोगों से पैसा इकट्ठा किया गया। इस चिटफंड नाम की कंपनी ने आम लोगों के करोड़ों रुपए की जामपूंजी हड़पी और कंपनी के प्रमोटर्स विदेश भाग गए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
LUCC चिटफंड ने शुरू के सालों में लोगों द्वारा जमा किया गया पैसे पर ब्याज दिया और पैसा भी लौटा दिया। इसके बाद लोगों में भरोसा बन गया और लोगों ने ज्यादा रकम की फिक्स डिपॉजिट करना शुरू कर दिया। LUCC चिटफंड कंपनी ने श्रीनगर, कोटद्वार, चमोली, देहरादून और कई जगहों पर अपनी ब्रांच खोली और यहां के लोगों से पैसा इकट्ठा किया गया। कंपनी में पैसा जमा करने में ज्यादातर महिलाएं और पूर्व सैनिक और सैनिक के परिवार थे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
अक्टूबर 2024 को यह कंपनी अपने सारे खाते और सेंटर्स बनाकर विदेश भाग गई। तब जाकर लोगों को पता लगा कि उनके साथ बहुत बड़ी जालसाजी हो गई है। वैसे डायरेक्टर ब्रांच मैनेजर ने 29 सितंबर 2024 को अपनी अपनी ब्रांच बंद कर दी थी। तब से लगातार पीड़ित परिवार आंदोलन कर रहे हैं। इस मामले में सीबीआई जांच के आदेश किए गए। अभी तक कंपनी के प्रमोटर्स की गिरफ्तारी को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


