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February 10, 2026

अंकिता भंडारी हत्याकांडः महापंचायत में उमड़ी भीड़, अंकिता के माता पिता भी हुए शामिल, पांच प्रस्ताव पारित

उत्तराखंड में चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड के मामले में पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग को लेकर देहरादून के परेड मैदान में आयोजित महापंचायत में विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ ही आमजन की भीड़ उमड़ी। आठ फरवरी को हुई इस महापंचायत में महापंचायत में कांग्रेस समेत इंडिया गठबंधन के घटक दलों के अलावा राज्य आंदोलनकारी, तमाम सामाजिक और जन सरोकारों से जुड़े संगठन शामिल हुए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

यह महापंचायत अंकिता हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड में चल रहे विरोध प्रदर्शनों की कड़ी में एक महत्वपूर्ण कदम है। महापंचायत ‘अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मोर्चा’ के बैनर के तले हुई। इसमें अंकिता के माता और पिता भी शामिल हुए। महापंचायत में पांच प्रस्तावों को पारित किया गया। इसके साथ ही महापंचायत की ओर से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच को लेकर पत्र भी भेजा गया है। गायक नरेंद्र सिंह नेगी ने भी इस लड़ाई का समर्थन किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

महापंचायत में देहरादून के साथ ही उत्तराखंड के अलग-अलग हिस्सों से लोग पहुंचे। इसमें शामिल हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि अन्याय के खिलाफ पूर्व सैनिक, न्याय की आशा की ज्योत जलाने वाले, सभी आंदोलनकारी, राजनीतिक दल, इंडिया गठबंधन समेत कई दलों के लोग एकजुट होकर महापंचायत में शामिल हुए। जब न्याय की लड़ाई होती है तो सब बराबर के भागीदार होते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति से बड़ी जनभावना है। उत्तराखंड की जनभावना है कि बेटी के साथ जिसने भी ये किया है, चाहे वो कितना ही बड़ा व्यक्ति हो उसे सामने लाया जाना चाहिए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

 

अंकिता भंडारी के पिता वीरेंद्र भंडारी ने कहा कि तीनों आरोपियों की कॉल डिटेल निकाली जाए और जो वीआईपी हैं, उनकी भी कॉल डिटेल निकाली जाए। हम कोई समझौता करने या बिकने वाले नहीं हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डॉक्टर सत्यनारायण सचान ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर धामी अंकिता मामले की सीबीआई जांच पर्यावरणविद की एफआईआर को आधार बनाकर करवा रहे हैं, जबकि सीबीआई जांच अंकिता के माता-पिता की तहरीर के आधार पर होनी चाहिए। यह जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए। साथ ही जिन लोगों ने साक्ष्य मिटाये, उनको भी सीबीआई जांच की परिधि में लाया जाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इस मामले में अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के सदस्य मोहित डिमरी ने कहा इस मामले में धामी सरकार वीआईपी को बचाने का काम कर रही है। सीबीआई जांच में की गई चालाकी इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। इसमें अनिल जोशी की शिकायत पर जांच हो रही है। हम सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में इसकी सीबीआई जांच चाहते हैं। हम अंकिता को न्याय दिलाने के लिए आखिरी दम तक लड़ेंगे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

महापंचायत में शामिल हुए भाकपा माले के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि आखिरकार अंकिता भंडारी प्रकरण में सरकार ने सड़कों के आंदोलनों के दबाव में सीबीआई जांच कराने की घोषणा की। यह भी प्रश्न है कि अंकिता के माता-पिता और तमाम आंदोलनकारी पहले दिन से ही इस मामले की सीबीआई जांच की मांग उठाते आ रहे थे, लेकिन सरकार हीला हवाली करती रही। उन्होंने कहा अब तीन साल बाद सीबीआई जांच की संस्तुति की गई। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने कहा कि सीबीआई जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में नहीं करवाई जा रही है। उनका कहना है कि जिनकी शिकायत पर यह सीबीआई जांच की जा रही है, उनका इस पूरे प्रकरण से कोई लेना-देना नहीं है। इस प्रकरण में तहरीर देने वाले पर्यावरणविद का अंकिता से कोई सरोकार नहीं रहा है। नौ जनवरी को उनकी तरफ से इस मामले में तहरीर देने के बावजूद उन्होंने अंकिता के माता-पिता से भी मिलना तक मुनासिब नहीं समझा। इससे समझा जा सकता है कि जिस व्यक्ति का इस मामले से कोई सरोकार नहीं है, उसको शिकायतकर्ता बना दिया गया। इसमें अंकिता के माता-पिता को कैसे बाहर रखा गया है। इसका जवाब सरकार के पास नहीं है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

 

महापंचायत में उत्तराखंड महिला मंच की कमला पंत, लोक वाहिनी के राजीवलोचन शाह, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के पीसी तिवारी, गौरव सैनिक संगठन के महावीर राणा, राजस्थान से आई सरिता आदि ने भी अपने विचार रखे। मंच संचालन निर्मला बिष्ट ने किया। सतीश धौलाखंडी, त्रिलोचन भट्ट, शिवानी पांडेय, गीता गैरोला और अन्य लोगों ने जनगीत प्रस्तुत किये। महापंचायत में मुख्य रूप से पर्यावरणविद् डॉ. रवि चोपड़ा, नन्द नन्दन पांडेय, परमजीत सिंह कक्कड़, अनूप नौटियाल, प्रभात ध्यानी, माया चिलवाल, लोकेश नवानी, पद्मा गुप्ता, मनीष केडियाल, गरिमा दसौनी, डॉ. एसएन सचान, चंद्रकला, विमला कोली, स्वाति नेगी आदि मौजूद थे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

महापंचायत में रखे गए ये पांच प्रस्‍ताव
1- अंकिता भंडारी के माता-पिता, सोनी देवी और वीरेंद्र सिंह भंडारी द्वारा मुख्यमंत्री को सौंपे गये पत्र को सीबीआई जांच के लिए शिकायती पत्र माना जाए और उसी के आधार पर सीबीआई जांच, उच्चतम न्यायालय की निगरानी में करवाई जाए।
2- अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच, मामले से पूरी तरह असंबद्ध व्यक्ति अनिल प्रकाश जोशी की एफआईआर पर कराए जाने के फैसले को पूरी तरह खारिज करती है। अंकिता हत्याकांड से संबंधित पूर्व में लक्ष्मण झूला ऋषिकेश थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 01/2022 के तहत ही आरोपित वीआईपी और सबूत मिटाने वालों को केंद्र में रख कर ही आगे की जांच करवाई जाए।
3- अंकिता हत्याकांड के बाद रातों-रात बुलडोजर द्वारा वनन्तरा रिज़ॉर्ट के बड़े हिस्से को ध्वस्त करके साक्ष्यों को नष्ट किया गया, जिसकी अनुमति मुख्यमंत्री द्वारा दी गई थी। इसको देखते हुए इस हत्याकांड की निष्पक्ष जांच जब तक पूर्ण नहीं हो जाती, तब तक मुख्यमंत्री का पद पर बने रहना नैतिक एवं क़ानूनी रूप से उचित नहीं है। पुष्कर सिंह धामी के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए, इस मामले में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच में बाधा बनी रहेगी इसलिए जब तक जांच कार्यवाही पूरी हो या न्यायलय का निर्णय नहीं आ जाए, तब तक मुख्यमंत्री को स्वयं पद से हट जाना चाहिए।
4. बीजेपी के दो पदाधिकारियों दुष्यंत कुमार गौतम और अजय कुमार का नाम भाजपा से ही जुड़े लोगों ने वीआईपी के तौर पर लिया है। इसलिए यह महापंचायत मांग करती है कि इन दोनों को तत्काल जांच के दायरे में लाया जाये और भाजपा के द्वारा इन दोनों को तत्काल इनके पदों से हटाया जाए। इन्हें जांच में सहयोग करने के लिए निर्देशित करें।
5. महा पंचायत यह चेतावनी देती है कि यदि आगामी 15 दिनों के भीतर इस हत्याकांड में शामिल वीआईपी के खुलासे की सीबीआई जांच अनिल जोशी की एफआइआर को दरकिनार करते हुए पीड़ित पक्ष द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र के आधार पर ही आगे नहीं बढ़ाया जाता है, तो उत्तराखंड की समस्त जनता सम्पूर्ण उत्तराखंड में एक व्यापक शांतिपूर्ण जनांदोलन के लिए बाध्य होगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

CBI के हाथों में केस की जांच
बता दें कि अंकिता भंडारी मर्डर केस की जांच सीबीआई ने अपने हाथ में ले ली है। साथ ही, इस मामले में दिल्ली स्थित स्पेशल क्राइम ब्रांच ने एक वीआईपी के खिलाफ केस दर्ज किया है। सीबीआई की टीम के दो सदस्य सोमवार देर रात उत्तराखंड पहुंचे। ताकि हत्या से जुड़े कथित वीआईपी एंगल की डिटेल में जांच कर सके। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

अंकिता भंडारी हत्याकांड
बता दें कि पौड़ी जिले के यमकेश्वर प्रखंड के अंतर्गत गंगा भोगपुर स्थित वनन्तरा रिसोर्ट से 18 सितंबर 2022 की रात से संदिग्ध परिस्थितियों में रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी लापता हो गई थी। पुलिस ने जब जांच की तो पता चला कि हत्या कर उसका शव चीला नहर में फेंक दिया गया था। इस मामले में रिसोर्ट मालिक पुलकित आर्य, प्रबंधक सौरभ भास्कर और सहायक प्रबंधक अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया था। मुख्य आरोपी पुलकित आर्य पूर्व बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री विनोद आर्य का बेटा है। पुलकित आर्य रिजॉर्ट का मालिक है। विनोद आर्य और उनके दूसरे बेटे अंकित आर्य को बीजेपी ने निष्कासित कर दिया था। इस मामले में चर्चा ये भी रही कि किसी वीआईपी को खुश करने के लिए अंकिता पर दबाव बनाया जा रहा था। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इस मामले में राजनैतिक रूप से प्रभावशाली व्यक्तियों के शामिल होने और ढ़ंग से जाँच नहीं होने के कारण राष्ट्रीय स्तर पर प्रचार मिला। अंकिता की माँ के दावों से मामले को अधिक तूल मिला। पुलिस के आरोप में प्रभावशाली व्यक्तियों के शामिल होने के दावे को शामिल नहीं किया। आज तक वीआईपी के नाम का खुलासा नहीं हुआ। इस मामले के प्रमुख अभियुक्त पुलकित आर्य (रिज़ॉर्ट के मालिक), अंकित गुप्ता (रिज़ॉर्ट के सहायक प्रबंधक) और सौरभ भास्कर (रिज़ॉर्ट के प्रबन्धक) हत्या की बात कबूल कर ली। कोटद्वार कोर्ट में हुई सुनवाई में तीनों को उम्र कैद की सजा सुनाई गई है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इस मामले में नया खुलासा बीजेपी के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की दूसरी पत्नी उर्मिला सनावर ने वीआईपी के नाम को लेकर किया। इसका वीडियो सोशल मीडिया में डाला गया। इसमें दावा किया गया कि वीआईपी बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री एवं प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम हैं। साथ ही राज्य में बीजेपी के एक पूर्व महामंत्री संगठन का नाम भी इस प्रकरण से जोड़ा गया है। ऐसे में नाम सामने आने के बाद इस हत्याकांड में सैकड़ों सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं, बीजेपी के प्रदेश के महामंत्री संगठन अजय कुमाार का नाम भी इस हत्याकांड में काफी समय पहले ही आ चुका है। इस नए खुलासे के बाद से ही हत्याकांड की हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई जांच कराने और वीआईपी सहित अन्य लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर विभिन्न संगठनों के साथ ही आम लोग सड़कों पर उतर गए थे। सीएम धामी ने इस मामले में सीबीआई जांच की संस्तुति केंद्र सरकार को भेजी है। ये संस्तुति एनजीओ चलाने वाले पर्यावरणविद् डॉ. अनिल जोशी की ओर से दर्ज एफआईआर के बाद की गई।
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Bhanu Bangwal

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

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