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January 22, 2026

धरती का रहस्यमयी स्थान बना स्पेसक्राफ्ट का कब्रिस्तान, यहां दूर दूर तक नहीं जमीन का नामोनिशान, अंतरिक्ष के निकट और इंसान से दूर

इस दुनिया में कई जगह ऐसी हैं, जिसके बारे में जानकर आप जानकर आश्चर्च में पड़ जाओगे। ऐसे स्थान में हमारी धरती पर एक जगह है, जहां इंसान की मौजूदगी ना के बराबर है। धरती का यह कौना इतना अलग-थलग है कि यहां न तो कोई जहाज गुजरता है, न ही कोई द्वीप या आबादी आसपास दिखाई देती है। ऐसे में यहां फंस गए तो जमीन देखने को तरस जाओगे। खास बात यह है कि अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ( NASA) और दुनिया की दूसरी अंतरिक्ष एजेंसियां इस जगह का इस्तेमाल रिटायर हो चुके स्पेसक्राफ्ट को गिराने के लिए करती हैं। इसी वजह से इसे अनौपचारिक रूप से ‘स्पेसक्राफ्ट का कब्रिस्तान’ कहा जाता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

ये है इस जगह का नाम
इस जगह का नाम प्वाइंट नीमो है। यह दक्षिणी प्रशांत महासागर में स्थित है। वैज्ञानिक भाषा में इसे महासागरीय दुर्गमता ध्रुव (Oceanic Pole of Inaccessibility) कहा जाता है। इसका मतलब है कि यह धरती का वह बिंदु है, जो किसी भी भूभाग से सबसे अधिक दूरी पर स्थित है। इसकी स्थिति इतनी अलग-थलग है कि कई बार इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन यानी ISS इसके ऊपर से गुजरने वाले अंतरिक्ष यात्री धरती पर मौजूद किसी भी इंसान की तुलना में इसके ज्यादा करीब होते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

धरती का अलग थलग हिस्सा
पॉइंट नीमो को दुनिया की सबसे अलग-थलग जगह माना जाता है। यह जगह दक्षिणी प्रशांत महासागर में स्थित है। इसका सटीक स्थान 48 डिग्री 52.6 मिनट दक्षिण अक्षांश और 123 डिग्री 23.6 मिनट पश्चिम देशांतर पर है। यहां से चारों दिशाओं में सबसे नजदीकी जमीन करीब 2,700 किलोमीटर दूर है। इसी वजह से इसे पोल ऑफ इनऐक्सेसिबिलिटी कहा जाता है। इनमें ईस्टर आइलैंड के पास मोटू नुई द्वीप, पिटकैर्न द्वीप समूह का ड्यूसी द्वीप और अंटार्कटिका के पास स्थित माहेर द्वीप शामिल हैं। यहां से आबादी वाले हिस्से तक पहुंचने के लिए या तो न्यूजीलैंड की चैथम आइलैंड्स जाना होगा। साथ ही चिली की ओर लंबा सफर करना पड़ेगा। ऐसे में अगर कोई इंसान किसी तरह पॉइंट नीमो पर समुद्र में तैर रहा हो तो भी उसे जमीन तक पहुंचने के लिए करीब 2,700 किलोमीटर का सफर तय करना होगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

ऐसा एकांत स्थान, जहां से गुजरने से बचते हैं समुद्री जहाज
महासागरीय मानकों के हिसाब से भी यह इलाका बेहद एकांत माना जाता है। बड़े समुद्री जहाज आमतौर पर इस क्षेत्र से बचते हैं। यहां कोई व्यस्त शिपिंग रूट नहीं है। मौसम संबंधी सिस्टम जैसे तूफान या समुद्री दबाव क्षेत्र अक्सर बिना किसी निगरानी के यहां से गुजर जाते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार इस क्षेत्र का समुद्र जैविक रूप से अपेक्षाकृत विरल है। इसकी वजह समुद्री धाराओं की धीमी गति और पोषक तत्वों की कमी है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

ऐसे खोजी गई सबसे सुनसान जगह
दिलचस्प बात यह है कि पॉइंट नीमो को किसी नाविक या खोजी ने नहीं ढूंढा। समुद्र के बीच सबसे दूर स्थित बिंदु को खोजना आसान नहीं था। उपग्रह डेटा और आधुनिक कंप्यूटिंग तकनीक के आने से पहले इसकी सटीक गणना संभव नहीं थी। साल 1992 में क्रोएशियाई-कनाडाई सर्वे इंजीनियर हर्वोज लुकाटेला ने ‘हिप्पार्कस’ नामक एक जियोस्पेशल कंप्यूटर प्रोग्राम विकसित किया। इस सॉफ्टवेयर ने डिजिटल तटरेखाओं और पृथ्वी की गोलाकार ज्यामिति का इस्तेमाल करते हुए यह गणना की कि कौन-सा बिंदु किसी भी तटरेखा से सबसे अधिक दूरी पर है। इसी प्रक्रिया के जरिये प्वाइंट नीमो की पहचान हुई। इसका नाम मशहूर फ्रेंच लेखक जूल्स वर्ने के काल्पनिक पात्र कैप्टन नीमो के नाम पर रखा गया। इस नाम का किसी वास्तविक मानव उपस्थिति से कोई संबंध नहीं है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

नाम की भी है ये वजह
नीमो नाम लैटिन भाषा के शब्द से लिया गया है। इसका मतलब होता है कोई नहीं। यह नाम मशहूर काल्पनिक किरदार कैप्टन नीमो से भी जुड़ा है। यह जूल्स वर्ने के उपन्यास 20,000 लीग्स अंडर द सी में आता है। यह नाम इस जगह पर बिल्कुल फिट बैठता है। क्योंकि यहां सच में कोई नहीं पहुंच पाता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

चक्करदार समुद्री सिस्टम का हिस्सा
बता दें कि पॉइंट नीमो दक्षिणी प्रशांत महासागर के एक बड़े चक्करदार समुद्री सिस्टम का हिस्सा है। इसे साउथ पैसिफिक जाइर कहा जाता है। यह सिस्टम अंटार्कटिक करंट, हम्बोल्ट करंट और वेस्ट विंड ड्रिफ्ट से मिलकर बना है। यह इलाका इतना बड़ा है कि इसे दुनिया का सबसे सूना समुद्री हिस्सा माना जाता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

समुद्री जीवन बहुत कम
यहां समुद्र में जीवन इसलिए बहुत कम है। क्योंकि, यह जमीन से बहुत दूर है। हवा के साथ पोषक तत्व यहां तक नहीं पहुंच पाते हैं। जब खाने के लिए जरूरी चीजें ही नहीं होंगी तो प्लैंकटन और बाकी जीव कैसे जिंदा रहेंगे। इसी कारण वैज्ञानिक इसे जैविक रेगिस्तान कहते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इंसानों दूर और अंतरिक्ष ज्यादा करीब
चौंकाने वाली बात यह है कि पॉइंट नीमो के सबसे नजदीक इंसान धरती पर नहीं बल्कि अंतरिक्ष में होते हैं। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन करीब 400 किलोमीटर ऊपर चक्कर लगाता है। ऐसे में वहां मौजूद अंतरिक्ष यात्री, धरती पर मौजूद किसी भी इंसान से पॉइंट नीमो के सबसे ज्यादा करीब होते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

धरती की ‘स्पेस कब्रगाह’
पॉइंट नीमो का खास रूप में वैज्ञानिक इस्तेमाल करते हैं। ऐसी जगह पर इसकी स्थिति के कारण अंतरिक्ष एजेंसियां पुराने और खराब हो चुके अंतरिक्ष यानों को यहीं समुद्र में गिराती हैं। इसे आधिकारिक तौर पर ऑर्बिटल ग्रेवयार्ड कहा जाता है। धरती की ‘स्पेस कब्रगाह’ का इसे कहा जाता है। अब तक 300 से ज्यादा अंतरिक्ष यान यहां खत्म किए जा चुके हैं। इसमें साल 2001 में रूस का मशहूर मीर स्पेस स्टेशन और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी का ऑटोमेटेड ट्रांसफर व्हीकल ‘जूल्स वर्ने’ जैसे बड़े मिशन शामिल हैं। यह फैसला प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि पूरी तरह व्यावहारिक है। बड़े अंतरिक्ष यान जब वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करते हैं तो वे अक्सर पूरी तरह जलकर नष्ट नहीं होते। उनके कुछ हिस्से सतह तक पहुंच सकते हैं। अगर ऐसा किसी आबादी वाले इलाके में हो तो जान-माल का खतरा पैदा हो सकता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

नासा और साथी देश की योजना
नासा और उसके साथी देश भविष्य में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को भी करीब 2031 में यहीं उतारने की योजना बना रहे हैं। अनुमान के मुताबिक हर साल करीब 100 से 200 टन अंतरिक्ष मलबा पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है। इसमें से कुछ बड़े अंतरिक्ष यानों को जानबूझकर इसी दूरस्थ समुद्री क्षेत्र की ओर निर्देशित किया जाता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

रिकार्ड की गई द ब्लूप नाम की बेहद तेज आवाज
पॉइंट नीमो एक बड़े रहस्य से भी जुड़ा है। साल 1997 में समुद्र के अंदर लगे माइक्रोफोन ने यहां से एक बेहद तेज और अजीब आवाज रिकॉर्ड की थी। इस आवाज को द ब्लूप नाम दिया गया। यह ताकतवर आवाज हजारों किलोमीटर दूर तक सुनी गई थी। कई सालों तक सिर्फ लोग कयास लगाते रहे कि ये किसी विशाल समुद्री जीव की आवाज है। वैज्ञानिकों ने साफ किया कि यह आवाज एक बड़े हिमखंड के टूटने और पिघलने से पैदा हुई थी, जिसे आइसक्वेक कहा जाता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इस स्थान पर नहीं है कोई संकेतिक निशान
आज भी प्वाइंट नीमो के ऊपर कोई संकेतक, झंडा या चिह्न मौजूद नहीं है। वहां पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है और न ही कोई इंसानी गतिविधि दिखाई देती है। इसका महत्व मुख्य रूप से आंकड़ों, मानचित्रों और अंतरिक्ष एजेंसियों की योजना फाइलों तक ही सीमित है। ज्यादातर लोगों के लिए प्वाइंट नीमो एक वास्तविक जगह से ज्यादा एक विचार है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

यहां भी पहुंच गया प्लास्टिक
इतनी दूर और खाली जगह होने के बावजूद पॉइंट नीमो भी इंसानी गंदगी से बच नहीं सका। साल 2017-18 की वोल्वो ओशन रेस के दौरान वैज्ञानिकों ने यहां पानी के सैम्पल्स लिए थे। जांच में पता चला कि पानी में 9 से 26 छोटे प्लास्टिक कण मौजूद थे। इससे साफ है कि प्लास्टिक प्रदूषण धरती की सबसे दूर जगह तक पहुंच चुका है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

पॉइंट नीमो तक इंसान ने बनाई पहुंच
कई सालों तक पॉइंट नीमो सिर्फ नक्शे पर मौजूद एक पॉइन्ट था। 20 मार्च 2024 को यह बदल गया। ब्रिटेन के खोजी और टेक उद्यमी क्रिस ब्राउन अपने बेटे मीका के साथ यहां पहुंचे थे। चिली से करीब 10 दिन के कठिन समुद्री सफर के बाद वे इस जगह तक पहुंच गए। दोनों ने यहां 4 किलोमीटर गहरे और बेहद ठंडे समुद्र में छलांग लगाई। ऐसा करने वाले वे पहले इंसान बन गए।
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Bhanu Bangwal

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

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