सर्दियों में कपड़े पहनने का सही तरीका जानिए, नहीं लगेगी सर्दी, गलत तरीका अपनाओगे तो गर्म कपड़ों में भी कांपने लगोगे
वर्ष 2025 के अक्टूबर माह से लेकर आज 19 जनवरी 2026 तक उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्र सहित देश के अन्य मैदानी इलाकों में सर्दियों में या तो बारिश हुई ही नहीं, या फिर कहीं बारिश हुई तो बहुत ही हल्की छींटों के रूप में। ऐसे में सूखी सर्दी पड़ रही है। ये सर्दी भी लोगों को काफी परेशान कर रही है। ऐसी सर्दी में मौसमी बीमारियां भी आम बात है। सर्दी से बचने के लिए कई लोग ज्यादा कपड़े पहनते हैं। इन कपड़ों में थर्मल, स्वेटर, जैकेट आदि सब पहनने के बावजूद ठिठुरन पीछा नहीं छोड़ती है। लोग सोचते हैं कि इतना पहनने के बाद भी ठंड क्यों लग रही है। इसका जवाब है कि दिक्कत आपके कपड़ों की नहीं है। दिक्कत उन्हें पहनने के तरीके की होती है। ज्यादातर लोगों को लगता है कि मोटे कपड़े पहनने से शरीर में गर्मी अपने आप आ जाएगी। वहीं, सच ये है कि अगर थर्मल या वार्मर सही तरीके से न पहने जाएं, तो ठंड और ज्यादा महसूस होती है। ऐसे में हम इस समाचार में आपको सर्दियों में कपड़े पहनने का सही तरीका बताने जा रहे हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
पहले थर्मल कपड़ों के बारे में जानिए
वार्मर या थर्मल कपड़े ठंड के मौसम में गर्माहट प्रदान करते हैं। ये वस्त्र एक इन्सुलेटिंग परत बनाते हैं, जो सर्दियों में शरीर की गर्मी को बनाए रखती है। थर्मल कपड़े सामान्य कपड़ों से भिन्न होते हैं और इनमें हवा का आवागमन बना रहता है। केवल गर्मी बनाए रखने के अलावा, थर्मल कपड़े सामान्य कपड़ों के नीचे एक आधारभूत परत के रूप में कार्य करते हैं। माइक्रो एक्रिलिक फाइबर, विस्कोस और इलास्टेन के साथ मिलकर एक हवादार कपड़ा बनाते हैं, जो बाहरी गतिविधियों या रोजमर्रा के कामों के लिए उपयुक्त होता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
वार्मर या थर्मल पहनने का सही तरीका
वार्मर या थर्मल हमेशा सीधे शरीर के संपर्क में पहने जाते हैं। यानी सबसे अंदर की लेयर वही होनी चाहिए। इसका काम शरीर की गर्मी को बाहर जाने से रोकना होता है। अगर आप वार्मर के नीचे बनियान या टी-शर्ट पहन लेते हैं, तो उसका असर काफी हद तक खत्म हो जाता है। ध्यान रखें कि वार्मर ज्यादा टाइट न हो, लेकिन इतना फिट जरूर हो कि शरीर से चिपका रहे। ढीला वार्मर गर्मी को रोक नहीं पाता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
थर्मल्स को ठीक से पहनने का तरीका
थर्मल पहनते समय सबसे बड़ी गलती लोग साइज में करते हैं। बहुत टाइट थर्मल पहनने से ब्लड सर्कुलेशन पर असर पड़ सकता है। वहीं बहुत ढीला थर्मल ठंड रोक नहीं पाता है। थर्मल पहनने के बाद ऊपर से हल्की टी-शर्ट, शर्ट या स्वेटर पहनना सही रहता है। इससे शरीर की गर्मी अंदर लॉक हो जाती है। अगर आप बाहर ज्यादा समय बिताते हैं, तो अपर और लोअर दोनों थर्मल पहनना ज्यादा फायदेमंद होता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
ठंड में कपड़े पहनने का सही तरीका
ठंड में कपड़े पहनने का सबसे सही तरीका लेयरिंग होता है। यानी एक के ऊपर एक सही क्रम में कपड़े पहनने चाहिए। सबसे अंदर थर्मल, उसके ऊपर हल्का कपड़ा जैसे टी-शर्ट या शर्ट और सबसे बाहर जैकेट या स्वेटर होना चाहिए। इससे ठंडी हवा सीधे शरीर तक नहीं पहुंचती है। इसके अलावा सिर, कान और पैर, हाथ टोपी, दस्ताने, मोजे आदि से ढके रखना बेहद जरूरी है। क्योंकि शरीर की काफी गर्मी इन्हीं हिस्सों से बाहर निकल जाती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
थर्मल वियर के लाभ
थर्मल कपड़े सर्दियों में शरीर की पहली सुरक्षात्मक परत का काम करते हैं। त्वचा से चिपके हुए ये कपड़े ऐसे पदार्थों से बने होते हैं जो गर्मी को बनाए रखते हुए अतिरिक्त नमी को बाहर निकाल देते हैं। थर्मल कपड़ों के पूरे संग्रह में ऊपरी शरीर को ढकने वाले वस्त्र, निचले शरीर को ढकने वाले वस्त्र और मोज़े व दस्ताने जैसी अन्य वस्तुएँ शामिल हैं, जो ठंड से पूरे शरीर की सुरक्षा प्रदान करते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
बेहतर इन्सुलेशन
थर्मल वियर असाधारण रूप से गर्मी बनाए रखता है, जिससे कम तापमान में भी शरीर गर्म रहता है। शरीर से चिपकी हुई इसकी डिज़ाइन कपड़े और त्वचा के बीच हवा का एक घेरा बना देती है। यह हवा का अवरोध ठंड को अंदर आने से रोकता है, जिससे शरीर की आंतरिक गर्मी बनी रहती है। माइक्रो एक्रिलिक फाइबर से बना यह कपड़ा बिना ज़्यादा वज़न के अधिकतम गर्मी बनाए रखता है, जिससे पहनने में आराम मिलता है। यह इन्सुलेटिंग विशेषता सर्दियों के खेलों, बाहरी गतिविधियों और ठंड के मौसम में की जाने वाली सामान्य गतिविधियों के लिए बहुत उपयोगी साबित होती है। हल्का होने के कारण यह शरीर को गर्म रखता है और चलने-फिरने में कोई रुकावट नहीं डालता। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
प्रभावी ढंग से नियंत्रित करता है नमी
थर्मल कपड़ों का एक प्रमुख लाभ नमी नियंत्रण है, जो पसीने को त्वचा से दूर रखता है। शारीरिक परिश्रम और तापमान में उतार-चढ़ाव से पसीना आता है, जिससे ठंड लग सकती है और असुविधा हो सकती है। थर्मल कपड़ों में नमी सोखने वाली सामग्री होती है जो पसीने को त्वचा से कपड़े की सतह तक पहुंचाती है। यह प्रक्रिया वाष्पीकरण को तेज करती है, जिससे शुष्कता और गर्माहट बनी रहती है। लिवा इको विस्कोस और पॉलियामाइड इलास्टेन जैसी सामग्रियां वायु प्रवाह को बढ़ाती हैं, जिससे ये वस्त्र खेलकूद और नियमित उपयोग के लिए उपयुक्त बन जाते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
लेयरिंग सिस्टम का अभिन्न अंग
ठंड के मौसम में पहनने वाले कपड़ों के लिए थर्मल वियर आधार तैयार करता है। परतों में पहनने से बदलते मौसम में तापमान को नियंत्रित किया जा सकता है। सबसे निचली थर्मल परत नमी को नियंत्रित करती है और गर्मी बनाए रखती है। यह पहली परत अतिरिक्त इन्सुलेशन और मौसम से सुरक्षा देने वाली परतों को सहारा देती है। थर्मल वियर से शुरुआत करने से अत्यधिक ठंड में भी लंबे समय तक गर्मी और सूखापन बना रहता है। यह तरीका मौसम में बदलाव के अनुसार कपड़ों को आसानी से समायोजित करने की सुविधा देता है, जिससे थर्मल वियर सर्दियों के कपड़ों का एक व्यावहारिक विकल्प बन जाता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
बेस लेयर में इन बातों का रखें ध्यान
-शरीर के सबसे करीब थर्मल (थर्मल वियर) या नमी सोखने वाले जैसे मेरिनो वूल, सिल्क कपड़े पहनें। ताकि पसीना सोखकर आपको सूखा और गर्म रखें।
-कपास (कॉटन) के कपड़े पहनने से बचें, क्योंकि वे नमी सोखकर सूखने में देर लगाते हैं और ठंड बढ़ा सकते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
मिडिल लेयर (बीच की परत)
-बेस लेयर के ऊपर एक इंसुलेटिंग परत पहनें, जैसे फ़्लीस, जम्पर, स्वेटर या ऊनी शर्ट. यह परत गर्मी को रोकती है।
आउटर लेयर (सबसे बाहर)
-सबसे बाहर एक विंडप्रूफ और वाटर-रेसिस्टेंट जैकेट या कोट पहनें। यह ठंडी हवा और नमी को शरीर तक पहुँचने से रोकता है।
-सुनिश्चित करें कि जैकेट में ज़िप या वेंट हों ताकि ज़रूरत पड़ने पर आप हवा आने-जाने दे सकें और ज़्यादा गर्मी लगने पर एडजस्ट कर सकें। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
अन्य जरूरी बातें
शरीर की सबसे ज्यादा गर्मी सिर, कान, हाथ और पैरों से निकलती है, इसलिए गर्म टोपी, स्कार्फ, दस्ताने और ऊनी मोजे ज़रूर पहनें। एक से ज़्यादा जोड़ी मोजे पहन सकते हैं, लेकिन ध्यान रहे कि जूते में ज़्यादा तंग न हों और रक्त संचार ठीक रहे। ऊनी मोजे अच्छे होते हैं। वाटरप्रूफ जूते चुनें ताकि पैर गीले न हों। कपड़े इतने चुस्त न हों कि रक्त संचार रुक जाए, और इतने ढीले भी न हों कि हवा अंदर जाए। परतें एक-दूसरे के ऊपर आसानी से फिट होनी चाहिए।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।



