विश्व ब्रेल दिवसः राष्ट्रीय दृष्टिहीन संघ ने वैश्विक ब्रेल साक्षरता अभियान का किया शुभारंभ, लुई ब्रेल को किया याद, जानिए उनके बारे में
राष्ट्रीय दृष्टिहीन संघ (नेशनल फेडरेशन ऑफ द ब्लाइंड) की ओर से आज चार जनवरी 2026 को विश्वब्रेल दिवस के अवसर पर वैश्विक ब्रेल साक्षरता अभियान के शुभारंभ किया। कार्यक्रम नई दिल्ली के लोदी रोड स्थित श्री सत्य साई अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित. किया गया। इसमें भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वैंकटरमणि मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित हुए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
सबसे पहले राष्ट्रीय दृष्टिहीन संघ के सचिव परमानंद द्विवेदी ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। वर्ल्ड ब्लाइंड यूनियन (WBU) के अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय नेत्रहीन महासंघ के महासचिव एसके रुंगटा ने अपने संबोधन में कहा कि इस वर्ष विश्व ब्रेल दिवस का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। क्योंकि यह ब्रेल के आविष्कार की 200वीं वर्षगाठ के साथ संयोग करता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
ब्रेल के महत्व को रेखांकित करते हुए तथा वैश्विक अभियान का परिचय देते हुए उन्होंने कहा कि ब्रेल समानता का प्रतीक है। शिक्षा का मार्ग है। आर्थिक आत्म निर्भरता का द्वार है। सबसे बढ़कर समाज में पूर्ण भागीदारी की आधारशिला है। दृष्टिहीन व्यक्तियों के लिए ब्रेल के माध्यम से साक्षरता वही महत्व रखती है, जो दृष्टिवान व्यक्तियों के लिए मुद्रित साक्षरता का है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने इस धारणा पर प्रश्र उठाया कि तकनीकी समाधान, विशेषकर बचपन औरप्रारंभिक शिक्षा के स्तर पर केवल श्रव्य (ऑडियो) माध्यम उपलब्ध कराकर, ब्रेल का स्थान ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी रूप में दृष्टिहीन बच्चों को ब्रेल साक्षरता से वंचित करना भेदभाव है। यह संयुक्त राष्ट्र दिव्यांग अधिकार संधि (UNCRPD) के प्रावधानों का उल्लंघन है। साथ ही दृष्टिहीन एवं बहु-दिव्यांग (टृष्टि एवं श्रवण बाधित) बच्चों के मानवाधिकारों का भी हनन है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इसके पश्चात उन्होंने घोषणा की कि डब्ल्यूबीयू और आईसीईवीआई संयुक्त रूप से आज अधिक ब्रेलः अधिक सशक्तिकरण शीर्षक से वैश्विक ब्रेल साक्षरता अभियान का शुभारंभ कर रहे हैं। इस अभियान का उद्देश्य ब्रेल शिक्षण एवं अधिगम तक पहुंच का विस्तार करना, मुद्रित तथा डिजिटल दोनों स्वरूपों में ब्रेल की उपलब्धता और गुणवत्ता बढ़ाना तथा समावेशी शिक्षा और आजीवन अधिगम की आधारशिला के रूप में ब्रेल को प्रोत्साहित करना है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इसके बाद भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने अभियान संदेश से युक्त एक समावेशी टेबल कैलेंडर का विमोचन कर अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया। अपने संबोधन में उन्होंने समाज में दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए समानता, न्याय तक पहुंच, शिक्षा और पूर्ण सहभागिता सुनिश्चित करने में ब्रेल की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डाला। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
कार्यक्रम में विश्व के विभित्र हिस्सों से WBU एवं ICEVI के प्रतिष्टित वैश्विक नेताओं ने वर्चुअल माध्यम से सहभागिता की। उनके एकजुटता एवं प्रोत्साहन के संदेशों ने पीढ़ियों और क्षेत्र में ब्रेल साक्षरता को सुदृढ़ करने के वैश्विक संकल्प को और मजबूत किया। कार्यक्रम का समापन राष्टरीय दृष्टिहीन संघ की ओर से आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के विजेताओं के लिए पुरस्कार वितरण समारोह के साथ हुआ। इसमें देशभर के टृष्टिबाधित विद्यार्थियों और पेशेवरों की प्रतिभा, रचनात्मकता और उपलब्धियों को सम्मानित किया गया। अंत में राष्ट्रीय दृष्टिहीन संघ के युवा सचिव पिंटू सिंह ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
लुई ब्रेल ने दृष्टिहीनों के लिए जलाया रोशनी का दीपक
लुई ब्रेल एक ऐसा नाम है जो दृष्टिहीन लोगों के लिए नई दुनिया की शुरुआत का प्रतीक है। 4 जनवरी 1809 को फ्रांस में जन्मे लुई ब्रेल ने अपनी जिंदगी में कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। तीन साल की उम्र में एक दुर्घटना में अपनी आंखों की रोशनी खोने के बावजूद लुई ब्रेल ने हार नहीं मानी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने दृढ़ संकल्प और मेहनत से शिक्षा प्राप्त की और दृष्टिहीन लोगों के लिए एक नई दुनिया की शुरुआत की। लुई ब्रेल ने 1824 में सिर्फ 15 साल की उम्र में ब्रेल प्रणाली विकसित की, जिसने दृष्टिहीन लोगों को पढ़ने और लिखने का एक नया तरीका दिया। यह प्रणाली आज भी दुनिया भर में उपयोग की जाती है और दृष्टिहीन लोगों के लिए एक वरदान है।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।



