भाजपा शासनकाल में महिलाएं उपेक्षित, कांग्रस घोषणा पत्र में मिलेगी महिलाओं को प्राथमिकताः धस्माना
देहरादून में महानगर महिला कांग्रेस के कार्यक्रम में उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं नव नियुक्त चुनाव घोषणा पत्र समिति के संयोजक सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि भाजपा के शासनकाल में महिलाएं उपेक्षित हैं। महिलाओं की समस्या दिनोंदिन बढ़ी हैं। कांग्रेस के शासन में ऐसा नहीं होगा। महिलाओं के हितों को ध्यान रखकर कांग्रेस का घोषणा पत्र तैयार किया जाएगा। इसे तैयार करने से पहले महिलाओं की राय ली जाएगी।
महिला कांग्रेस की महानगर अध्यक्षा श्रीमती कमलेश रमन, महिला कांग्रेस की प्रदेश सचिव पिया थापा, कांवली ब्लॉक अध्यक्ष जया गुलानी, प्रेमनगर-कौलागढ़ अध्यक्ष सुशीला बेलवाल शर्मा, श्रीमती शाहिदा अंसारी ने कार्यक्रम में पार्टी आला कमान की ओर से चुनाव घोषणा पत्र समिति का संयोजक बनाने पर मुख्य अतिथि प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना का जोरदार स्वागत किया गया।
इस मौके पर महिलाओं ने सूर्यकांत धस्माना के समक्ष राज्य में महिलाओं की स्थितियों पर चिंता जाहिर की। साथ ही मांग की कि आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी जो घोषणा पत्र बनाएं, उसमें महिलाओं के उत्थान व कल्याण के लिए पार्टी की एक सुस्पष्ट नीति घोषित करे।
कांवली में महिला कांग्रेस द्वारा आयोजित महिला सम्मेलन में राज्य में महिलाओं की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए धस्माना ने कांग्रेस नेत्रियों की ओर से दिये गए सुझावों से सहमति जताई। कहा कि हम महिलाओं से वार्ता करेंगे। ताकि घोषणापत्र में उनके हित में कोई बिंदु अछूते नहीं रहें। उन्होंने कहा कि वास्तव में उत्तराखंड में विकास की धुरी महिला ही हैं। राज्य के विकास की जब हम बात करते हैं तो विकास मॉडल में महिला को ही केंद्र में रख कर हर योजना बनानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि राज्य में पिछले 21 वर्षों से शायद यही सबसे बड़ी चूक हो रही है कि विकास योजनाओं समेत तमाम कल्याणकारी योजनाओं में महिला को वह तवज्जो नहीं दी गई। इसीलिए आज भी हम महिला के सर से घास लकड़ी पानी का बोझ कम नहीं कर पाए। धस्माना ने महिला नेताओं से आग्रह किया कि वे सुझाव दें और उनके सुझावों पर पार्टी गंभीरता से चिंतन मनन कर अच्छे सुझावों को घोषणापत्र में शामिल करेगी।
इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही महानगर महिला कांग्रेस अध्यक्ष कमलेश रमन ने उत्तराखंड राज्य के निर्माण में मातृशक्ति के योगदान का जिक्र किया। कहा कि राज्य प्राप्ति के लिए कुर्बानियां देने वाली व सड़कों पर संघर्ष करने वाली माता बहनों ने ऐसे राज्य की कल्पना नहीं की थी, जिसमें महिलाओं को राज्य गठन के 21 वर्ष बाद भी प्रसव के लिए उचित इलाज न मिलने पर अपनी जान से हाथ धोना पड़े।
प्रदेश सचिव पिया थापा ने कहा कि प्रदेश की वर्तमान सरकार तो पूरी तरह महिला विरोधी है। उन्होंने कहा कि हाल ही में विदा हुए पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह के जींस वाले बयान से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस पार्टी के नेताओं की महिलाओं के प्रति कैसी सोच है। कांवली ब्लॉक अध्यक्ष जया गुलानी ने कहा कि राज्य की बेटियों की जान व इज्जत वर्तमान सरकार के राज में सुरक्षित नहीं है।
उन्होंने कहा कि भाजपा विधायकों व नेताओं पर ही महिलाओं के उत्पीड़न के मामले दर्ज हैं और उनको बचाने के लिए पूरी सरकार व भाजपा जिस प्रकार से तत्पर रही, उससे भी भाजपा की महिलाओं के प्रति सोच प्रदर्शित होती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी को इस महिला सुरक्षा के विषय को गंभीरता से अपने घोषणा पत्र में शामिल करना चाहिए।
ब्लॉक अध्यक्ष प्रेमनगर-कौलागढ़ अध्यक्ष सुशीला बेलवाल शर्मा ने कहा कि महिलाओं की बराबर की भागीदारी की केवल बातें होती हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि आज भी पहाड़ की महिलाओं के कष्ट पहाड़ जैसे हैं। उन्होंने कहा कि इस बार कांग्रेस सत्ता में आये तो महिलाजों की शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार व सुरक्षा के लिए अलग से नीति बने और इन वैद्यों पर गंभीरता से काम हो। युवा महिला नेत्री शाहिदा अंसारी ने कहा कि मोदी सरकार ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का आकर्षक नारा तो दिया, लेकिन हाल ही में उत्तराखंड में जारी हुआ लिंग अनुपात का आंकड़ा इस नारे की पोल खोल देता है।
उन्होंने कहा कि भाजपा राज में तो बेटी की भ्रूण हत्या से लेकर उसका शोषण व हत्या हर स्तर पर हो रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के प्रति जब तक समाज व सरकारों का नजरिया उपेक्षापूर्ण रहेगा तब तक समाज राज्य व देश भी तरक्की नहीं कर सकता। महिला नेत्रियों ने धस्माना को पार्टी हाई कमान द्वारा उनको आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी की घोषणापत्र समिति का संयोजक बनाये जाने पर बधाई देने के साथ ही उनसे मांग भी कर डाली कि वे चुनाव घोषणा पत्र में महिलाओं के मुद्दों को सबसे पहली प्राथमिकता दें। सम्मेलन में अनीता दास, मेहमूदन, बिमलेश, अंजू भारती, बबिता, कमला देवी, रीता डबराल, ऊषा जखमोला, अख्तरी बेगम, कुमारी रुकैया समेत अनेक वक्ताओं ने अपने विचार रखे।





बहुत अच्छा मुद्दा है