उत्तराखंड अधिकारी, कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति फिर से हुई सक्रिय, मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन, इन अधिकारियों से नेताओं ने की मुलाकात
उत्तराखंड में राज्य कर्मचारी शिक्षक संगठन ने विभिन्न मांगों को लेकर चरणवार आंदोलन चलाने का निर्णय किया हुआ है। अब गोल्डन कार्ड से संबंधित मांगों को लेकर उत्तराखंड अधिकारी, कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति फिर से सक्रिय हो गई है। पूर्व में भी समिति ने कार्मिकों की मांग को लेकर शासन पर दबाव बनाने का अभियान चलाया था। इस समिति में परिषद के साथ ही अधिकारी और कर्मचारियों के विभिन्न संगठन जुड़े हुए हैं। समिति ने मंत्रीमंडल की ओर से एसजीएचएस गोल्डन कार्ड के संबंध में लिए गए निर्णय का कड़ा विरोध किया है। समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन उनके मुख्य निजी सचिव विक्रम सिंह चौहान को सौंपा। साथ ही मुख्य सचिव आनंद बर्धन एवं स्वास्थ्य सचिव स्वास्थ्य डा. आर. राजेश कुमार से भेंटकर उन्हें भी ज्ञापन दिया। मुख्य सचिव एवं स्वास्थ्य सचिव ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि उत्तराखंड अधिकारी, कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति के साथ उच्च स्तर पर बैठक के उपरान्त ही गोल्डन कार्ड का शासनादेश जारी किया जायेगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
गौरतलब है कि पांच जनवरी को सदभावना भवन यमुना कॉलोनी देहरादून में समिति की बैठक हुई थी। इसमें राज्य कार्मिकों के लिए वर्तमान में लागू गोल्डन कार्ड योजना के सम्बन्ध में 24 दिसंबर 2025 को सम्पन्न हुई मंत्रीमण्डल बैठक पर चर्चा की गई। इसमें कहा गया कि उत्तराखंड सरकार ने कार्मिक संगठनों को विश्वास में लिए बगैर इस योजना को ट्रस्ट मोड़ के स्थान पर 5.00 लाख रुपये तक की सीमा तक इंशोरेन्स मोड़ पर संचालित करते हुए राज्य के कार्मिकों द्वारा दिये जाने वाले अंशदान में अप्रत्याशित वृद्धि का प्रस्ताव पारित किया है। बिना कार्मिक संघों को विश्वास में लिए गए इस निर्णय का कड़ा विरोध करते हुए एक ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। यही ज्ञापन शासन के अधिकारियों को सौंपने के साथ ही मुख्यमंत्री को प्रेषित किया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
ज्ञापन के बिंदु
1-राज्य में संचालित State Government Health Scheme (SGHS) गोल्डन कार्ड से संबंधित अंशदान बढ़ाये जाने व अन्य प्राविधानों में संशोधन सम्बन्धी मंत्रीमण्डल के निर्णय सम्बन्धी संस्तुति का क्रियान्वयन उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति के साथ बैठक करने के उपरान्त ही समिति की ओर से दिये गये सुझावों एवं सरकार एवं शासन के साथ तृपक्षीय वार्ता में लिये गये निर्णय के आधार पर किया जाए। तब तक मंत्रीमंडल की संस्तुति का क्रियान्वयन न किया जाए। साथ ही इस सम्बन्ध में कोई भी शासनादेश जारी न किया जाए।
2-संज्ञान में आया है कि मंत्रीमंडल की ओर से अंशदान बढ़ोत्तरी की संस्तुति इस शर्त के अधीन की गई है कि प्रत्येक छः माह में कार्मिकों को मंहगाई भत्तें की सुविधा उपलब्ध होने पर इस योजना के संचालन में यह धनराशि स्वतः ही वृद्धि होती रहेगी। समस्त परिसंघों ने इसका घोर विरोध किया है। साथ ही इस शर्त अथवा व्यवस्था को तत्काल समाप्त करने का प्रस्ताव पारित किया गया। बैठक में यह भी प्रस्ताव पारित हुआ कि राज्य के प्रत्येक नागरिक को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना सरकार का नैतिक दायित्व बनता है।
इस सम्बन्ध में दिनांक 02.04.2025 को स्वास्थ्य मंत्री डा. धनसिंह रावत की अध्यक्षता में राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण में गोल्डन कार्ड के सम्बन्ध में उच्च स्तरीय बैठक आहूत की गई थी। इसमें कार्मिक, पेन्शनर संघों ने अंशदान बढोत्तरी का विरोध किया था। इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने यह आश्वासन दिया गया था कि गैप फंडिंग की व्यवस्था राज्य सरकार की ओर से अपने स्तर से सुनिश्चित की जायेगी तथा अंशदान बढ़ाने का निर्णय सभी पदाधिकारियों को विश्वास में लेकर ही किया जायेगा। अतः समन्वय समिति की बैठक में कहा गया कि इस योजना के लागू होने से पूर्व राज्य सरकार चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए बजट व्यवस्था अपने स्तर से करती थी। इस योजना के लागू होने के उपरान्त राज्य सरकार कार्मिकों के अंशदान से ही इस व्यवस्था को चला रही है। ऐसे में इस मांग का प्रस्ताव पारित किया गया कि राज्य सरकार प्रत्येक वर्ष इस योजना के लिए लगभग 200 करोड़ की बजट व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए गैप फंडिंग को पूर्ण करने की व्यवस्था सुनिश्चित करें। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
3- State Government Health Scheme (SGHS) गोल्डन कार्ड योजना में प्रदेश के अन्दर एवं प्रदेश से बाहर समस्त उच्च कोटी के चिकित्सालय को पैनल में इस शर्त के अधीन चयनित करें एवं अनुबन्ध करें कि वह अनुबन्ध गठित होने के 02 वर्षों तक धनराशि के अभाव में चिकित्सालय सुविधा देने से इंकार न कर सकें।
4- इस योजना में चिकित्सालयों की मनमानी को रोकने एवं शासकीय धन का गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए प्रावधान किया जाय कि आईपीडी चिकित्सा उपरान्त लाभार्थी की चिकित्सा पर हुए व्यय की धनराशि का भुगतान संबंधी बीजक की एक प्रति लाभार्थी से भी हस्ताक्षर के उपरान्त उसकों उपलब्ध कराई जाए। मरीज के भर्ती और डिस्चार्ज होने पर सम्बन्धित रोगी अथवा तीमारदार के माध्यम से ओटीपी सम्बंधित चिकित्सालय को दिया जाए। साथ ही केन्द्र सरकार स्वास्थ्य योजना की नवीनतम गाईड लाईन भी इस योजना में लागू की जाय, जो चिकित्सालयों की मनमाफिक त्रुटिपूर्ण व्यवस्था को रोकने में सहायक सिद्व होगी।
5-गोल्डन कार्ड से संबधित शासनादेश सं0-1256 दिनांक 25 नवम्बर, 2021 के बिन्दु सं0-19 में ओपीडी चिकित्सालय में सुविधा प्रदान करने के लिए डॉयग्नोस्टिक सेन्टर एवं औषधालय भी पंजिकृत किये जाने का प्राविधान किया गया। इस मामले में आज तक उक्त शासनादेश का अनुपालन नहीं किया गया है। अतः ओपीडी में डॉयग्नोस्टिक/पैथालोजी जॉंच व दवाईया निशुल्क उपलब्ध कराने की तत्काल व्यवस्था की जाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
6-पूर्व में चिकित्सा प्रतिपूर्ति व्यवस्था में आश्रितों के लिए आयु सीमा की कोई बाध्यता नहीं थी, किन्तु गोल्डन कार्ड में आश्रितों के लिए 25 वर्ष की व्यवस्था की गई है। इसे तत्काल हटाया जाए। इस योजना में कोई भी आयु सीमा न रखी जाए।
7-गोल्डन कार्ड योजना को आयुषमान योजना से पृथक करते हुए समस्त चिकित्सालयों में पृथक काउन्टर एवं पोर्टल खोलने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाये।
8-शासनादेश दिनांक 08 नवम्बर,व2024 के द्वारा अखिल भारतीय सेवा के सेवारत, सेवानिवृत्त अधिकारियों एवं उनक आश्रितों को चिकित्सा सुविधा, चिकित्सा व्यय प्रतिपूर्ति संबंधी प्रकरणों के निस्तारण के लिए मानक संचालन प्रक्रिया में शिथिलता प्रदान करते हुए छूट प्रदान की गई है। अतः राज्य के भीतर तमाम अधिकारियों, कार्मिकों एवं उनके आश्रितों को अत्यन्त गंभीर बीमारियों Sequelae Of Disease से ग्रसित होने पर वास्तविक व्यय के सापेक्ष प्रतिपूर्ति के लिए देय शिथलीकरण की दरें निर्धारित की जाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
A-माईल्ड (हल्का) वर्तमान व्यवस्थानुसार प्रभावी सीजीएचएस की दरों पर।
B-मॉडरेट (मध्यम श्रेणी) वर्तमान व्यवस्थानुसार उपचार पर हुए व्यय के सापेक्ष सीजीएचएस दरों पर अनुमन्य की गयी धनराशि व्यवस्थानुसार अदेय की गयी धनराशि का 25 प्रतिशत अतिरिक्त।
D-सीवियर (गम्भीर श्रेणी) वर्तमान व्यवस्थानुसार उपचार पर हुए व्यय के सापेक्ष सीजीएचएस दरों पर अनुमन्य की गयी धनराशि सीजीएचएस व्यवस्थानुसार अदेय की गयी धनराशि का 50 प्रतिशत अतिरिक्त।
E-हाईली सीवियर (अत्यन्त गम्भीर श्रेणी) वास्तविक व्यय का 85 प्रतिशत।
F-मॉरिबंड (मरणासन्न) वास्तविक व्यय का 100 प्रतिशत। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
9- गोल्डन कार्ड योजना में सेवानिवृत्त होने वाले ओपीएस कार्मिकों की भॉति एनपीएस एवं यूनिफाईड धारकों के लिए भी स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
10-राज्य मंत्रीमंडल की ओर से 5.00 लाख रुपये तक इस योजना को इंशोरेन्स मोड पर संचालित किये जाने की संस्तुति की गई है। अतः जब तक किसी इंशोरेन्स कम्पनी के माध्यम से राज्य सरकार का अनुबन्ध गठित नहीं होता है, तब तक किसी भी कार्मिक को उपचार की व्यवस्था से प्रभावित न हो, यह संकल्प राज्य शासन द्वारा दिया जाय। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
समिति ने शासन से मांग की है कि उत्तराखंड राज्य के विभिन्न वर्गो के कार्मिकों, शिक्षक संगठनों के साथ दिनांक 05.01.2026 को बनी सहमति के मुताबिक, एक सप्ताह के भीतर समन्वय समिति से वार्ता, बैठक आयोजित की जाए। तत्पश्चात ही बैठक में बनी सहमति के अनुरूप ही अग्रिम निर्णय और व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। यदि शासन की ओर से निर्धारित समय सीमा के भीतर बैठक निर्धारित नहीं की जाती है तो समन्वय समिति बिना किसी पूर्व सूचना के किसी भी प्रकार के आन्दोलन के लिए बाध्य होगी। इसको ही आन्दोलन का नोटिस समझा जाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
प्रतिनिधिमंडल में उत्तराखंड सचिवालय संघ के अध्यक्ष सुनील लखेडा, उपाध्यक्ष जीतमणी पैन्यूली, महासचिव राकेश जोशी, सचिव पूर्णानन्द नौटयाल, उत्तराखंड अधिकारी शिक्षक समन्वय समिति के संयोजक अशोक राज उनियाल, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष अरूण पाण्डे, आरसी शर्मा, वीरेन्द्र सिंह गुसांई, मुकेश बहुगुणा, रमेश चन्द्र पैन्यूली, दिनेश पन्त, विनोद थापा, संजय भास्कर शामिल रहे।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।



