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January 8, 2026

यूकॉस्ट का विशेष व्याख्यान, माइक्रोप्लास्टिक्स इन हिमालयन रिवराइन सिस्टम, कन्टामिनेंट्स आफ इमर्जिंग कंसर्न पर चर्चा

उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) की ओर से संचालित “मां धरा नमन एवं जल शिक्षा कार्यक्रम” के अंतर्गत माइक्रोप्लास्टिक्स इन हिमालयन रिवराइन सिस्टम: कन्टामिनेंट्स का इमर्जिंग कंसर्न, विषय पर एक विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन परिषद के सभागार में किया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने कहा कि यूकॉस्ट द्वारा जल स्रोतों के महत्व को देखते हुए राज्य के 100 जल स्रोतों, जलधारों आदि के वैज्ञानिक अध्ययन, संरक्षण आदि की दिशा में कार्य प्रारंभ किया गया है। उन्होंने हिमालय से निकलने वाली नदियों को मानव जीवन के साथ-साथ जैव विविधता के अस्तित्व के लिए बहुत आवश्यक बताया। प्रो. पंत ने कहा कि भविष्य की जल चुनौतियों से निपटने के लिए जल स्रोतों का वैज्ञानिक अध्ययन बहुत आवश्यक है। साथ ही इनके संरक्षण के लिए सामाजिक जागरुकता और सहभागिता भी बहुत आवश्यक है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इस अवसर पर यूकॉस्ट के संयुक्त निदेशक डॉ डी.पी. उनियाल ने यूकॉस्ट द्वारा राज्य भर में चलाए जा रहे विभिन्न वैज्ञानिक कार्यक्रमों व परियोजनाओं पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम संयोजक यूकॉस्ट के वैज्ञानिक डॉ भवतोष शर्मा ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की एवं विषय विशेषज्ञ दून विश्वविद्यालय देहरादून के पर्यावरण विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष एवं डीन प्रो. सुरेंद्र सिंह सूथर का परिचय कराया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

प्रोफेसर सुरेंद्र सिंह सूथर ने “माइक्रोप्लास्टिक्स इन हिमालयन रिवराइन सिस्टम: कन्टामिनेंट्स का इमर्जिंग कंसर्न” विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिया। उन्होंने हिमालय नदी जल तंत्र में माइक्रोप्लास्टिक की उपस्थिति, जल नमूने संग्रहण के तरीके और उनके वैज्ञानिक विश्लेषण करने की विधियों आदि पर विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि आजकल विभिन्न स्रोतों जैसे सिंथेटिक टैक्सटाइल्स, प्लास्टिक बोतल के अपघटन होने, शहरी क्षेत्र की धूल, टायर, सड़कों के निर्माण, पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स आदि से माइक्रोप्लास्टिक हिमालयी जल स्रोतों में पहुंच रहे हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

प्रोफेसर सुथर ने प्लास्टिक की रीसाइकलिंग, विभिन्न हिमालयी नदियों, ग्लेशियर जल आदि में माइक्रोप्लास्टिक की उपस्थिति के विषय में विस्तार पूर्वक बताया। उन्होंने रीसाइकिल्ड प्लास्टिक पैकेजिंग पदार्थ के वैल्यू एडिशन आदि पर किए जा रहे कार्यों के विषय में बताते हुए विभिन्न आधुनिक शोध एवं अनुसंधान संबंधी कार्यों पर रोचक तरीके से उपस्थित प्रतिभागियों को अवगत कराया। माइक्रो प्लास्टिक अध्ययन में प्रयोग होने वाले विभिन्न वैज्ञानिक विश्लेषण विधियों रमन स्पेक्ट्रोस्कॉपी, एफटीआईआर आदि की जानकारी व्याख्यान में दी। साथ ही सामाजिक सहभागिता के साथ प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने की दिशा में जागरूक भी किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

कार्यक्रम में आंचलिक विज्ञान केंद्र देहरादून के डॉ. जीएस रौतेला, साइंस सेंटर के प्रभारी डॉ ओ.पी. नौटियाल, यूकॉस्ट के वैज्ञानिक अधिकारी डॉ मनमोहन सिंह, मनोज कन्याल, डॉ विपिन सती, रामदेव घुनियाल, जागृति उनियाल, संतोष रावत, ओम जोशी, उमेश जोशी ने भागीदारी निभाई। इनके अलावा मानसखंड साइंस सेंटर अल्मोड़ा के वैज्ञानिक, उत्तराखंड राज्य के विभिन्न शिक्षण संस्थाओं, विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों के स्नातक स्नातकोत्तर छात्र-छात्राएं, शोधार्थी एवं राज्य के विभिन्न जनपदों पिथौरागढ़ चंपावत बागेश्वर अल्मोड़ा पौड़ी उधम सिंह नगर हरिद्वार चमोली एवं देहरादून जिलों से यूकॉस्ट के पर्यावरण एवं विज्ञान चेतना केंद्र के शिक्षक एवं विद्यार्थियों सहित 170 से अधिक लोगों ने सामूहिक एवं व्यक्तिगत रूप से ऑफलाइन व ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। धन्यवाद ज्ञापन वैज्ञानिक अधिकारी डॉ मनमोहन सिंह रावत ने किया।
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Bhanu Bangwal

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

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