हल्द्वानी में तीन महिने में तीन बड़ी घटनाएं, प्रशासन मौन: गरिमा मेहरा दसौनी
उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने उत्तराखंड में महिला उत्पीड़न के बढ़ते मामलो को लेकर भाजपा सरकार को आढ़े हाथों लिया। कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस वार्ता के जरिये उन्होंने कहा कि तीन माह में अकेला हल्द्वानी में तीन बड़ी घटनाएं घटित हुई हैं। इसके बावजूद शासन और प्रशासन मौन है। प्रदेश में महिला उत्पीड़न के मामले लगातार सामने आने के बावजूद राज्य की प्रंचड बहुमत की धामी सरकार कुंभकरण की नींद में सोई हुई है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
दसौनी ने कहा कि अगस्त माह में हल्द्वानी जेल में 55 कैदिंयों के एचआईवी संक्रमित होने की बात से भी शासन प्रशासन हरकत में नही आया। अक्टूबर माह में काठगोदाम स्थित मूकबधिर और दृष्टिबाधित बच्चों की आवासीय संस्था में मासूम बच्चों के साथ वर्षो से हो रहे यौन शोषण के खुलासे ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर कर रख दिया। बोलने, सुनने और देखने में प्राकृतिक रूप से असमर्थ मासूम बच्चों ने अपनी ही संस्थापक पर यौन उत्पीडन का आरोप लगाया। संस्था के संचालक की प्रदेश के बड़े नेताओं और अधिकारियों में गहरी पैठ होने के कारण मासूमों की आवाज दब कर रह गयी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
दसौनी ने ताजे प्रकरण की ओर ध्यान आकृषित करते हुए कहा कि समाचार पत्रों के माध्यम से पता चला है कि हल्द्वानी के संरक्षण गृह में एक नाबालिग बच्ची के साथ बीते कई दिनों से दुष्कर्म हो रहा था। इस घृणित कृत्य को संरक्षण गृह की दो महिलाएं भी अंजाम दे रही थीं। दसौनी ने कहा कि उपरोक्त सभी घटनांए मात्र तीन चार महिने के अन्दर घटित हुयी हैं। ऐसी घटनाएं धामी सरकार के बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओ एवं महिला सशक्तिकरण के दावों की पोल खालती हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
दसौनी ने कहा कि इस मामले की जांच जरूर होनी चाहिए कि ये दो महिलाएं मासूम बच्ची को किसी नेता या अधिकारी के पास भेज रही थीं। यदि पहले ही प्रकरण में हल्द्वानी का सरकारी तंत्र सक्रिय हो गया होता, मामले को गम्भीरता से लिया होता, मामले की तह तक जाने की कोशिश की होती, आरोपियों पर सख्त कार्यवाही की होती तो बाद के प्रकरण सामने न आते। आज प्रदेश की कानून व्यवस्था अपने सबसे निचले स्तर पर है। महिला बाल एवं विकास मंत्री को राजनीति से फुर्सत नही।इससे बुरा वक्त उत्तराखंड के लिए हो नही सकता कि संरक्षण गृह में तक न हमारी बच्चियां सुरक्षित हैं और ना ही संरक्षित हैं।
नोटः सच का साथ देने में हमारा साथी बनिए। यदि आप लोकसाक्ष्य की खबरों को नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए आप्शन से हमारे फेसबुक पेज या व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ सकते हैं, बस आपको एक क्लिक करना है। यदि खबर अच्छी लगे तो आप फेसबुक या व्हाट्सएप में शेयर भी कर सकते हो।

Bhanu Prakash
लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
भानु बंगवाल
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।



