सीएम तीरथ के दिल्ली दौरे के बाद अब दायित्व वितरण की जगी उम्मीद, जल्द हो सकता है निर्णय
आगामी विधानसभा चुनाव के लिए मात्र छह माह ही बचे हैं। ऐसे में उत्तराखंड में भाजपा सरकार में अब फिर से दायित्व वितरण की सुगबुगाहट शुरू हो गई है।
आगामी विधानसभा चुनाव के लिए मात्र छह माह ही बचे हैं। ऐसे में उत्तराखंड में भाजपा सरकार में अब फिर से दायित्व वितरण की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि पिछले सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यकाल में बांटे गए सभी दायित्वों को निरस्त करने के बाद से नेताओं में नाराजगी है। दोबारा दायित्व नहीं बांटने से इसका असर आगामी चुनावों में भी देखने को मिल सकता है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि अब जल्द ही दायित्वों को वितरण हो जाएगा। ताकी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार किया जा सके।मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के दिल्ली प्रवास को भी इसी नजरिए से भी देखा जा रहा है। वह विभिन्न योजनाओं के लिए केंद्रीय मंत्रियों से मिले। साथ ही उनकी राष्ट्रीय महामंत्री एवं उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल से हुई भेंट को दायित्व वितरण के नजरिए से भी देखा जा रहा है। सरकार में नेतृत्व परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने पिछली त्रिवेंद्र सरकार के कार्यकाल में बांटे गए दायित्व निरस्त कर दिए थे। इनमें नई नियुक्ति वाले कुछ लोग तो ऐसे थे, जो अपने कार्यालयों में पहुंचकर चार्ज तक नहीं ले सके थे। केवल आयोग और किसी अधिनियम के तहत दिए गए दायित्व बरकरार रखे गए । तब ये कहा गया था कि जल्द ही दायित्व वितरित कर दिए जाएंगे।
तब से ये मामला खटाई में पड़ा है। इसके लिए तर्क दिया गया है कि कोरोना की दूसरी लहर के चलते ऐसा संभव नहीं हो पाया है। अब विधानसभा चुनाव के लिए समय बहुत कम रह गया है तो सरकार के साथ ही संगठन में भी हलचल शुरू हो गईहै। प्रयास ये किया जा रहा है कि दायित्व भी बंट जाएं और कहीं कोई नाराजगी का सुर भी न उभरे।




