उत्तराखंड में उच्च शिक्षा के हाल बेहाल, राज्य विश्वविद्यालयों से संबद्ध अधिकांश संस्थाओं की संबद्धता कई वर्षों से लंबितः डॉ. सुनील अग्रवाल
डॉ. सुनील अग्रवाल
उत्तराखंड में उच्च शिक्षा के भी हाल बेहाल हैं। राज्य के विश्वविद्यालयों से संबद्ध अधिकांश संस्थाओं की संबद्धता विस्तारण कई वर्षों से लंबित है। निजी कॉलेज एसोसिएशन उत्तराखंड के अध्यक्ष डॉ. सुनील अग्रवाल ने राज्य विश्वविद्यालयों पर आरोप लगाया कि राज्य विश्वविद्यालय संबद्धता विस्तारण के नाम पर सिर्फ संबद्धता शुल्क इकट्ठा करने का माध्यम बन चुके हैं। अधिकांश संस्थाओं की पिछले पांच वर्षों से संबद्धता विस्तारण लंबित चल रही है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
डॉक्टर सुनील अग्रवाल ने बताया कि राज्य विश्वविद्यालयों से संबद्ध कॉलेजों में संचालित प्रत्येक कोर्स के लिए प्रतिवर्ष 55000 संबद्धता विस्तारण शुल्क लिया जाता है। अगर किसी कॉलेज में 10 कोर्स हैं, तो उसे प्रतिवर्ष संबद्धता विस्तारण के लिए साढे पांच लाख रुपए जमा करने हैं। इसके बावजूद जो विश्वविद्यालय निरीक्षण टीम बनती है, उस टीम को टीए डीए देने की जिम्मेदारी संबंधित कॉलेज पर ही होती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि ऐसा विश्वविद्यालय के पत्र में लिखा होता है कि किसी भी कॉलेज को संबद्धता विस्तारण के लिए कॉलेज में संचालित प्रत्येक कोर्स के लिए 55000 संबद्धता विस्तारण शुल्क एवं निरीक्षण टीम के प्रत्येक सदस्य को टीए डीए अलग देना होता है। इसके बावजूद पिछले कई वर्षों से अधिकांश संस्थाओं के संबद्धता विस्तारण प्रमाण पत्र जारी नहीं किए गए हैं। इसके कारण छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं मिल पाती है और कॉलेज संचालक संबद्धता विस्तारण पत्र प्राप्त करने के लिए विभिन्न स्तरों पर शोषण के शिकार होते हैं। इसकी वह किसी से शिकायत भी नहीं कर पाते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
डॉ. अग्रवाल के मुताबिक, वर्तमान परिस्थितियों में जब प्रदेश में निजी विश्वविद्यालय बड़ी संख्या में खुल चुके हैं, ऐसे में कॉलेजों में छात्रों का अभाव हो गया है। यानी फीस तो कम आएगी, लेकिन विश्वविद्यालय और विश्वविद्यालय की टीम का खर्च पहले की भांति बने रहेंगे। इन परिस्थितियों में कई कॉलेज संचालक अपने कुछ कोर्स सरेंडर करने का मन बना चुके हैं। इसके कारण उन कोर्सों में नियुक्त शिक्षकों की सेवाएं भी समाप्त हो जाएगी। इससे प्रदेश की बेरोजगारी में और इजाफा होगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने बताया कि कई बार विश्वविद्यालय और शासन से इस संबंध में चर्चा होने के बावजूद अभी तक संबद्धता विस्तारण के प्रकरण पर किसी भी स्तर पर कोई भी गंभीर नहीं है। इस संबंध में एसोसिएशन की ओर से विश्वविद्यालय शासन और राजभवन सबको पत्र भेजे जा रहे हैं, लेकिन लगता यही है कि अब कॉलेजों को अपने कुछ कोर्स सरेंडर करने को मजबूर होना पड़ेगा। कुछ कॉलेज तो पहले ही अपने कुछ कोर्स सरेंडर कर चुके हैं।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।



