अमृत बरसाती शरद पूर्णिमा की रात आज, ऐसे करें पूजन, कष्टों को करें दूरः आचार्य डॉ. संतोष खंडूड़ी
शरद ऋतु अश्विन मास शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि आज रात से है। इस दौरान चंद्रमा से अमृत बरसेगा। पूर्णिमासी की तिथि 19 अक्टूबर 2021 को सांय सात बजकर पांच बजे से प्रारंभ होकर 20 अक्टूबर सांय आठ बजकर 29 मिनट तक रहेगी।
शरद ऋतु अश्विन मास शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि आज रात से है। इस दौरान चंद्रमा से अमृत बरसेगा। पूर्णिमासी की तिथि 19 अक्टूबर 2021 को सांय सात बजकर पांच बजे से प्रारंभ होकर 20 अक्टूबर सांय आठ बजकर 29 मिनट तक रहेगी। इसके लिए यह व्रत त्योहार मनाया जाता है, इसे रास पूर्णिमा कहा जाता है। भगवान कृष्ण ने आनंदित होते हुए यमुना तट पर गोपियों के संग आनंद वन में रासलीला की थी। जिस आनंद उत्सव को देखते हुए सभी देवताओं ने स्वयं चंद्रमा ने आकाश से अमृत वर्षा की थी। यह बहुत महत्वपूर्ण घड़ी है कि पूर्णमासी की मध्य रात्रि को यह दिव्य संयोग बन रहा है। अर्थात 19 अक्टूबर की मध्य रात्रि को आकाश से अमृत वर्षा होगी। अर्थात धरती में रहने वाले सभी को चाहिए कि वे 19 अक्टूबर को बिना जल के शुद्ध दूध से खीर बनाकर इसे खुले आसमान के नीचे रखें। ताकी इसमें चंद्रमा की किरणों में ओस की बूंदें अमृत का रूप धारण कर खीर में प्रवेश कर जाती है। इस कारण यह खीर स्वयं अमृत के रूप में शरीर के किसी भी रोगों का क्षय करने में कारगर सिद्ध होती है।87 साल बार ये संयोग
इस बार यह संयोग 87 वर्षों बाद आ रहा है। यह संयोग उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र, आनंदादि सिद्धियोग पर ततः प्रातःकालीन अमृत सिद्धियोग बन रहा है। यानी यह समय रात्रि 11 बजे से प्रातः चार बजकर 33 मिनट तक रहेगा। इस काल में यदि कोई व्यक्ति लक्ष्मी नारायण की आराधना, ध्यान, जप, तप करेगा तो उनके जीवन में दिव्य महालक्ष्मी योग बनेगा। यह समय पूर्णकालीन अपने जीवन के कष्टों को, दरिद्र को, दुख को दूर करने का समय है। ऐसे काल में किया जाने वाला रात्रि जागरण व्यक्ति को तन, मन और धन से संपन्न करता है। ऐसे समय पर गंगा तट, यमुना तट, नर्मदा के तट, या किसी दिव्य तालाब के समीप बैठकर साधना करनी चाहिए। ऐसा करने से दिव्य फल प्राप्त होता है।
साधना काल में हनुमान जी की करें उपासना
इस योग में मध्य रात्रि को मंगलवार पड़ने से समस्त कष्टों का नाश करने में हनुमान जी की कृपा भी प्राप्त हो सकती है। 11 बजे से रात 12 बजे तक हनुमान जी का पाठ करें और इसके बाद लक्ष्मी नारायण जी की आराधना करें। अगली सुबह बुधवार को स्नान, दान, ध्यान, हवन करके सिद्धि प्राप्त करें।
पूर्णमासी व्रत उपवास
पूर्णवासी का व्रत उपवास 20 अक्टूबर को सूर्योदय छह बजकर 25 मिनट से लेकर रात्रि आठ बजकर 29 मिनट तक रहेगा। इस काल में व्रत उपवास कर लक्ष्मी नारायण का पूजन कर अपने घर में सत्यनारायण की पूजा करें। लक्ष्मी नारायण का पूजन करें। व्यापारियों को चाहिए कि वह अपने व्यापार स्थल पर हवन करें। यदि ऐसा करेंगे उनके घर में दिव्य लक्ष्मी का प्रवेश होगा। व्रत का उद्यापन करते ही भगवान को खीर का भोग लगाकर प्रसाद बनाएं। फिर इसे सभी को बांटे। उसकी तासीर ठंडी रहने दें। यह उदर, बुद्धि में शीतलता और शांति प्रदान करने वाली दिव्य औषधि के रूप में कार्य करेगी।

आचार्य का परिचय
आचार्य डॉ. संतोष खंडूड़ी
(धर्मज्ञ, ज्योतिष विभूषण, वास्तु, कथा प्रवक्ता)
चंद्रविहार कारगी चौक, देहरादून, उत्तराखंड।
फोन-9760690069
-9410743100



