शिक्षक एवं कवि रामचंद्र नौटियाल की कविता-मां

मां
मां तुम अचानक चली गयी
हम सबको छोडकर
यादें संस्कार, विचार दुलार छोडकर
इस दुनिया से चली गयी मां
जब यादों में बातों में आती हो मां
आंखें नम कर जाती हो मां
बार बार सहलाती समझाती थी मां
बरबस याद आती है मां
हर बात एक एक कर समझाती थी मां
सब ठीक हो जायेगा कहती थी मां
जब यादों में बातों में आती हो मां
आंखें नम कर जाती हो मां
बहुत संघर्ष कियां मां तुमने परिवार
को खुशहाली की खातिर
हमारी सख समृद्घि की खातिर
सर्दी गर्मी भूख प्यास झेली मां
तुमने हमारी खातिर
जीवन भर तुम्हारी बातें
यादें,कर्म,संघर्ष;आंसू हमें
प्रेरणा देते रहेंगे मां
मेरी यादों में
चिरस्मृति में बनी रहोगी मां
कवि का परिचय
रामचन्द्र नौटियाल राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय गड़थ विकासखंड चिन्यालीसौड, उत्तरकाशी में भाषा के अध्यापक हैं। वह गांव जिब्या पट्टी दशगी जिला उत्तरकाशी उत्तराखंड के निवासी हैं। रामचन्द्र नौटियाल जब हाईस्कूल में ही पढ़ते थे, तब से ही लेखन व सृजन कार्य शुरू कर दिया था। जनपद उत्तरकाशी मे कई साहित्यिक मंचों पर अपनी प्रस्तुतियां दे चुके हैं।



