पनघट (धारे) मुझको तो मेरे गांव के ही, पनघट (धारे) प्यारे लगते हैं। गर्मी वर्षा आंधी हो या तूफान, अविरल...
Literature
पुष्प कहे माली से पुष्प कहे माली सेआज, तेरा मेरा अंत नहीं। टूट भी जाऊं डाली से तो, मेरे जीवन...
पहाड़ की वसुन्धरा, मां धूल सेवा सूंण, मां तु अबारि हिकमत ना ख्वे, मां हमारु हौंसला बढ़ौंदि रे, मां अपणां...
हे! माटी हम तेरी संतान बनें तन को पवित्र करने वाली हे! माटी, तुम हमारी माता,हम तुम्हारे पुत्र बनें। तेरे...
हमारु उत्तराखंड भारत माँ कु शीष हिमालय अखण्ड कतना प्यारू कतना स्वाणू हमारु उत्तराखंड गंगा यमुना कु उद्गम बद्री विशाल...
जीवन लीला मन्खी जून-दे प्रभु तिन, कनू- निरबळ बड़ाय. इनु जीवन थैं पैकि भी, स्वाचा हमन क्य पाय.. माँ न...
दिल का पुर्जा पुर्जा पढ़ना। सहरा को अब दरिया पढ़ना।। दुनिया का जब नक्शा पढ़ना। अपना-अपना किस्सा पढ़ना।। खा सकता...
देख रही है प्रिय धरा निरंतर ! फाख्ता गौरैया ग्लैडोलिया, गेंदा गुड़हल गुलदाऊदी। हरित क्षेत्र सम्मुख सुरपर्वत, पुष्प पर्ण सुरभित...
मैं सड़क हूं मैं सड़क हूं,कई बार बनती, कई बार टूटती। मैंने तुम्हें अपनों से जोड़ा, लेकिन क्यों लोगों ने,...
ताऴु दग्डया में ताऴू छों सबसी पुराणु वैध छों गुम चोंट पर आराम देदू छों तुमणी याद आज दिलोणू छों...
