सुन चेतुआ ओ चेतुआ... सुन चेतुआ, सुन सुनैतू गुन चेतुआ... सुन चेतुआ सुनिले बाबू, मुख मुखैको ज्ञान चेतुआ... देख चेतुआ...
Literature
उत्तराखंड में रुद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि में साहित्य जगत की सुरुचि संपन्न सकारात्मक अभिव्यक्ति की अर्द्ध वार्षिक पत्रिका चंद्रदीप्ति के...
ख़बरें खासकर वह बासी खबरें... बासी नहीं तिबासी खबरें... होती सब बकबासी खबरें... करती बहुत उदासी खबरें... लद गये दिन...
वक्त क्या क्या सिखा देता है अरे वक्त तुम, क्या क्या सिखा देते हो। कभी हसातें तो, कभी रुला ही...
ताले की चाबी रक्खी है। कितनी खुशफहमी रक्खी है।। तुमने यारब मन में अपने। भर कितनी तल्खी रक्खी है।। अपना...
मातृभूमि के वीर जवान हे! मातृभूमि के वीर जवान, जज्बा इतना क्यों बड़ा है। वतन की खातिर ही तो आज,...
जरा संभल इंसान जरा संभल कर रह इंसान यहां, प्रकृति पर तेरा एहसान होगा। मत कर प्रकृति से छेड़छाड़ अब,...
मन की उलझनें जीवन की अनसुलझी उलझनें, क्यों आज मुझे उलझा रही हैं। निकलूं कैसे उलझनों के भंवर से, उलझनें...
ओ मेरे मीत ओ मेरे मीत! गाऊं मैं कैसे-कैसे तपती धूप के पसीने में उलझ जाते हैं मेरे गीत !!...
देश-दुनिया के प्रसिद्ध पत्रकार और साहित्यकार स्व. मोहन थपलियाल की साहित्यिक-यात्रा पर आनलाइन मंथन हुआ। उत्तराखंड की जिया पेज पर...
