आक्रामकता में भी लिये शालीनता शब्दों के प्रहारों में भी अजब संयम असाधारण शैली के जन्मदाता मेरे आदर्शों में आदर्श...
Literature
सर्दी डर रही है हर गली चौराहे पर, चाय की थडियों पर, विद्यालयों के प्रांगण में, मंदिर मस्जिद गुरुद्वारों में,...
इस चमकीली दुनिया से अच्छा तो बिस्तर पर मरने से अच्छा, तो सरहद पर ही मरना था, पर भाग्य में...
यह साल जा रहा है आने वालों के लिए जगह छोड़ता हुआ वह है ही हजारो साल जैसा वक्त की...
मसूरी के पहाड़ की तलहटी से निकलती रिस्पना नदी। इस नदी के पानी से पूरे देहरादून के मैदानी क्षेत्र में...
सिर्फ कहने मात्र की आजादी है आज भी एक स्त्री को। उसे आज भी उन्हीं बेड़ियों में बांधकर मजबूर बनाया...
संघर्ष ये जो चमक रहा है हमारे नाम का सितारा, कभी हम भी थे बिखरी हुई धूल से। मेरे जानने...
जब मैं खुद के अंदर देखता हूँ.... जब मैं खुद के अंदर देखता हूँ, एक नया किरदार पाता हूँ, एक...
हाँ एक फूल हूँ मैं। नाजुक कलियों में खिलता हूँ। हर रंग में मिलता हूँ। कभी गर्मी,कभी सर्दी से लडता...
सर्दी की रात के करीब साढ़े 11 बजे का समय। हल्की बूंदाबांदी ने मौसम को और ठंडक बना दिया। हाईवे...
