कविता दिन-भर थकान जैसी थी और रात में नींद की तरह/ सुबह पूछती हुई, क्या तुमने खाना खाया रात को।...
साहित्य
विचारों की उधेड़बुन में फंसा आज का मानव को स्कूल जाने की ताकत का काम केवल कलम की नोंक में...
नदी को चिट्ठी प्रिय अलकनंदा ,सस्नेह प्रणाम , कैसी हो तुम, कुछ दिन तुम्हें नहीं देखा तो तुम्हारी याद आने...
मुसाफिर चोर से बचना… तेरी गठरी को ले भागेगा चोरमुसाफिर चोर से बचना…यह सफर ही होता बड़ा जोरमुसाफिर चोर से...
सुख का शैल हनुमान कौन बनेगा अब,वैक्सिन संजीवन लाकर।लगी कोरोना शक्ति विश्व को,कौन तारेगा दुख सागर। कौन वैद्य सुषेण बनेगा,कौन...
कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं मैं बीती बातों का जिक्र करू तोकुछ दोस्त बहुत याद आते हैं वो साथ...
झंडा दिवस पर कवि सोमवारी लाल सकलानी की कविता- सशस्त्र झंडा दिवस में देखा, महा शौर्य कुर्बानी का लेखा
सशस्त्र झंडा दिवस सशस्त्र झंडा दिवस में देखा, महा शौर्य कुर्बानी का लेखा।शहीदों का इतिहास टटोला, जल थल नभ पराक्रम...
बागवाँ आया नया, गुलशन खिलाने के लिए।चाँद आया दूसरा, घर जगमगाने के लिए।। रात है तो क्या हुआ, डरता अँधेरे...
भारतवर्ष एक अत्यन्त प्राचीन एवं पारम्परिक राष्ट्र है। साथ ही हमारा देश अत्यन्त तरुण और आधुनिक भी है। आलोचक हमारे...
पव्वा पत्रकार! हां है वह!पव्वा पत्रकार है वह!चाटुकारों का सरदार है वह!जन सरोकारिता का सवाल नहीं!खैराती कुर्सी का उसे लिहाज...
