इस चमकीली दुनिया से अच्छा तो बिस्तर पर मरने से अच्छा, तो सरहद पर ही मरना था, पर भाग्य में...
साहित्य
यह साल जा रहा है आने वालों के लिए जगह छोड़ता हुआ वह है ही हजारो साल जैसा वक्त की...
मसूरी के पहाड़ की तलहटी से निकलती रिस्पना नदी। इस नदी के पानी से पूरे देहरादून के मैदानी क्षेत्र में...
सिर्फ कहने मात्र की आजादी है आज भी एक स्त्री को। उसे आज भी उन्हीं बेड़ियों में बांधकर मजबूर बनाया...
संघर्ष ये जो चमक रहा है हमारे नाम का सितारा, कभी हम भी थे बिखरी हुई धूल से। मेरे जानने...
जब मैं खुद के अंदर देखता हूँ.... जब मैं खुद के अंदर देखता हूँ, एक नया किरदार पाता हूँ, एक...
हाँ एक फूल हूँ मैं। नाजुक कलियों में खिलता हूँ। हर रंग में मिलता हूँ। कभी गर्मी,कभी सर्दी से लडता...
सर्दी की रात के करीब साढ़े 11 बजे का समय। हल्की बूंदाबांदी ने मौसम को और ठंडक बना दिया। हाईवे...
पर्यावरण की रक्षा खातिर ऐ तथाकथित विकासवादियों ! मां का सीना मत चीरो। भोग बिलास लिप्सा खातिर ,जख्म धरा पर...
अपना आईना जिंदगी से लम्हा चुरा बटुए में रखता रहा ! फुर्सत से खरचूंगा बस यही सोचता रहा। उधड़ती रही...
