चिहुँकती चिट्ठी बर्फ का कोहरिया साड़ी ठंड का देह ढंक लहरा रही है लहरों-सी स्मृतियों के डार पर हिमालय की...
युवा कवि
न छौंका मारा दैं न तुक्का मारा दै अपणो का खातिर एक पहल करा धै न कैसी डरा धै न...
स्मृतियाँ स्मृतियों के पटल पर उग आए हैं, वर्तमान की चहकती इच्छाओं के गाछ अंकित हो गए हैं स्वप्निल इबारतें...
उम्मीद की उपज उठो वत्स! भोर से ही जिंदगी का बोझ ढोना किसान होने की पहली शर्त है धान उगा...
मुसहरिन माँ धूप में सूप से धूल फटकारती मुसहरिन माँ को देखते महसूस किया है भूख की भयानक पीड़ा और...
थ्रेसर थ्रेसर में कटा मजदूर का दायाँ हाथ देखकर ट्रैक्टर का मालिक मौन है और अन्यात्मा दुखी उसके साथियों की...
साहित्य और सत्ता साहित्य का सत्य और निश्छल शब्द सता के गलियारे में, जब दस्तक देता है, न... सिंहासन के...
श्रृंगार की बेड़ियाँ आभूषण, बनाव, श्रृंगार, सौंदर्य की बेड़ियों में जकड़ी करती मिथ्या परम्परा में विहार स्त्री! क्या तुम्हें दुःख...
कुल्हड़ की चाय की चुस्कियां माटी से जुड़ा रखती है। दुनिया के बदलते तौर तरीकों में भी उस कुम्हार की...
वो लड़का साहब, वो बाहर से मुस्कुराता है, वो खुश भी है, पर न जाने क्यों, उस मुस्कुराहट के पीछे...
