राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के आंदोलन का दूसरा चरण, देखिए उत्तराखंड के जिलों में प्रदर्शन की फोटो, ये हैं मांग
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तराखंड के आह्वान पर 18 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन का द्वितीय चरण शुरू हो चुका है। इसके तहत सात फरवरी को प्रदेश के सभी 13 जनपदों में धरना, प्रदर्शन के कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें विभिन्न घटक संगठनों की ओर से सहभागिता की गई। इस दौरान शासन, प्रशासन के प्रति रोष व्यक्त करते हुए चेतावनी दी गई कि यदि मांगों पर शीघ्र यथोचित कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
आंदोलन के क्रम में जनपद पौड़ी में आयोजित धरना कार्यक्रम में ग्राम विकास अधिकारी संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष हर्ष डी जोशी ने कहा कि कर्मचारियों को 10, 16 एवं 26 वर्ष पूर्ण होने पर प्रोन्नत वेतनमान नहीं दिया जा रहा है। वहीं मंत्री एवं विधायकों के वेतन एवं भत्तों में वृद्धि की जा रही है, जो कर्मचारियों के साथ घोर अन्याय है। जनपद टिहरी में आयोजित धरना कार्यक्रम में परिषद के जिलाध्यक्ष भगवान सिंह राणा ने कहा कि जब तक गोल्डन कार्ड में व्याप्त विसंगतियों का निस्तारण नहीं किया जाता, तब तक कर्मचारियों को इसका यथोचित लाभ नहीं मिल पाएगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
अल्मोड़ा के कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित धरना कार्यक्रम में परिषद के जिलाध्यक्ष उमापति पांडे ने कहा कि जब अन्य राज्य सरकारें पुरानी पेंशन योजना की ओर बढ़ रही हैं, तो उत्तराखंड सरकार इसे लागू करने में अनावश्यक रूप से क्यों हिचकिचा रही है। उत्तरकाशी के लदाड़ी स्थित विकास भवन में आयोजित धरना–प्रदर्शन कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष प्रकाश पंवार ने कहा कि सरकार वेतन विसंगतियों के लिए समितियों का गठन तो करती है, लेकिन उनकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं करती। इससे आम जनता के धन का दुरुपयोग हो रहा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
पिथौरागढ़ के विकास भवन में आयोजित धरना कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष प्रदीप भट्ट ने कहा कि पिछले 10 वर्षों से वाहन भत्ता मात्र ₹1200 ही है, जबकि वाहन भत्ता वृद्धि का प्रस्ताव लंबे समय से वित्त सचिव स्तर पर लंबित है और उसे आज तक कैबिनेट में प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसी प्रकार चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, हरिद्वार, चंपावत, नैनीताल सहित अन्य जनपदों में आयोजित धरना कार्यक्रमों में विभिन्न घटक संगठनों की ओर से बढ़-चढ़कर भाग लिया गया। साथ ही आगामी 21 फरवरी 2026 को देहरादून में आयोजित होने वाले एक दिवसीय धरना कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अधिक से अधिक संख्या में पहुँचने का आह्वान किया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
देहरादून के गांधी रोड स्थित दीनदयाल उपाध्याय पार्क में आयोजित धरना कार्यक्रम के दौरान परिषद के प्रदेश अध्यक्ष अरुण पांडे ने कहा कि सभी घटक संगठनों को परिषदीय रूपरेखा के अंतर्गत रहकर अपनी मांगों को मजबूती से उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज का धरना कार्यक्रम पूरे प्रदेश में पूर्ण रूप से सफल रहा है तथा भविष्य के आंदोलनों की सफलता के लिए सभी घटक संगठनों को एकजुट और संगठित रहने की आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने सरकार को चेताया कि कर्मचारियों के हितों की अनदेखी करने वाली सरकार के लिए प्रदेश में बने रहना कठिन होगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस मौके पर उपस्थित उपजिलाधिकारी कुमकुम जोशी को ज्ञापन सौंपते हुए परिषद के महामंत्री शक्ति प्रसाद भट्ट ने कहा कि यदि शासन समय रहते कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाता है, तो यह आंदोलन उग्र रूप धारण करेगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी सरकार की होगी। इससे पूर्व राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की शाखा पौड़ी एवं देहरादून की कार्यकारिणी का कार्यकाल पूर्ण होने के उपरांत कार्यकारिणी को भंग करते हुए नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
देहरादून से नई कार्यकारिणी के लिए रविंद्र चौहान अध्यक्ष, विकास नेगी उपाध्यक्ष, पिंकेश रावत जिला सचिव एवं प्रेमलता संप्रेक्षक, पौड़ी से प्रदीप सुंदरियाल अध्यक्ष निर्वाचित हुए। उपस्थित प्रमुख पदाधिकारी चौधरी ओमवीर सिंह, ठाकुर शेर सिंह, रविंद्र चौहान, सुरेश डबराल, संदीप पांडे, रेखा भंडारी, जगमोहन सिंह नेगी, सुनील देवली, दिनेश जोशी, गजेंद्र, दिनेश बिजलवान, दिवाकर, पान सिंह राना, राकेश नाथ, सुधा कुकरेती, विकास दुमका, मनोज भट्ट, मंडल अध्यक्ष हर्षमोहन नेगी, संतान सिंह बिष्ट, सांभरी भट्ट, मुकेश नेगी, संतोषी नेगी, कुलदीप सजवान सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी उपस्थित रहे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
आंदोलन की रूप रेखा
1-15 जनवरी से 31 जनवरी 2026 तक विभिन्न विभागों में गेट मीटिंग के माध्यम से मांगों को लेकर जनजागरण अभियान पूर्ण हो चुका है।
2- सात फरवरी 2026 को प्रदेश के प्रत्येक जनपद पर एक दिवसीय धरना एवं जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया गया।
3- 21 फरवरी 2026 को देहरादून में एक दिवसीय प्रदेश स्तरीय धरने का आयोजन किया जाएगा।
4- 22 फरवरी से 12 मार्च 2026 तक अपने अपने क्षेत्रीय विधायकों को कार्मिकों की मांगों से सम्बन्धित ज्ञापन दिया जाएगा।
5- 13 मार्च 2026 को प्रदेश स्तरीय रैली का आयोजन किया जाएगा। साथ ही अनिश्चितकालीन आन्दोलन की घोषणा की जाएगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
ये हैं मांग
1- एसीपी के अन्तर्गत 10, 16 एंव 26 वर्ष की सेवा पर पदोन्नत वेतनमान देने के लिए विभिन्न विभागों में तीन पदोन्नति न प्राप्त कर सकने वाले कार्मिकों का संवर्गवार आंकडा वित्त विभाग की ओर से सम्बन्धित विभागों से वर्ष 2023 से पत्राचार किया जा रहा है। इसे लेकर संज्ञान में आया है कि कतिपय विभागों की ओर से तीन वर्ष की समयसीमा पूर्ण होने के उपरान्त भी सूचना उपलब्ध नहीं करायी गयी है। ऐसे विभागाध्यक्षों को चिह्नित करके लापरवाही करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही इस प्रकरण पर शीघ्रातिशीघ्र निर्णय किया जाए। ताकि पात्र कर्मियों को पदोन्नत वेतनमान दिया जा सके।
2- गोल्डन कार्ड के अन्तर्गत ओपीडी में जन औषधि केन्द्रों से कैशलैस दवा एवं सुपरस्पेस्लिसट पंजीकृत चिकित्सालयों में कैशलैस जांच की सुविधा अनुमन्य की जाय।
3- वेतन समिति के सम्मुख विभिन्न संवगों की वेतन विसंगति दूर करने के लिए मजबूत पैरवी की गई थी। दिनांक 12. 8. 2022 की वार्ता को लेकर वेतन समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए। भारत सरकार की ओर से आठवें वेतन आयोग के गठन का निर्णय लिया जा चुका है। उक्त के दृष्टिगत सातवें वेतन आयोग की विसंगतियों को दूर करने के लिए गठित वेतन समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए।
4- पदोन्नति में शीथिलीकरण की अवधि से प्रोवेशन की शर्त को हटाया जाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
5- वाहन भत्ता प्रतिमाह 1200 रूपये में बढ़ोत्तरी की मांग परिषद की ओर से की गई थी। इसके आधार पर वाहन भत्ते की दरों में वृद्धि की गई। इस वृद्धि का लाभ 2013 के शासनादेश से वाहन भत्ता प्राप्त कर रहे कार्मिकों को नहीं प्राप्त हो रहा है। परिषद की मांग है कि अपर मुख्य सचिव वित्त की अध्यक्षता में आहूत बैठक में बनी सहमति के अनुसार वंचित कार्मिकों को भी वाहन भत्ते की बढ़ी दरों का लाभ अनुमन्य किया जाए। इसके साथ ही यात्रा भत्ता की दरों में संशोधन के प्रस्ताव को मंत्रीमंडल की आगामी बैठक में स्वीकृत कराया जाए।
6- विभिन्न विभागों के पुर्नगठन एवं सेवा नियमावलीयों में संशोधन के सम्बध में विभाग, शासन एंव वेतन समिति के स्तर पर कार्यवाही लम्बित है। इन्हें प्राथमिकता के आधार पर सम्बन्धित विभागीय संगठनों को विश्वास में लेकर पूर्ण किया जाए।
7- परिषद के संज्ञान में यह भी आया है कि राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा गोल्डन कार्ड धारकों से कैशलेस चिकित्सा के लिए मात्र कटौती की धनराशि से ही भुगतान किया जा रहा है। वहीं, समस्त राज्यकर्मी एवं पेशनर पूर्व की भांति चिकित्सा प्रतिपूर्ति के हकदार हैं। इसलिए चिकित्सा प्रतिपूर्ति एवं चिकित्सालयों के भुगतान के लिए कम पड़ रही धनराशि को सरकार वहन करे।
8- एनपीएस के स्थान पर अन्य राज्यो यथा पंजाब एवं राजस्थान की भांति पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू की जाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
9- आठवें वेतन आयोग के सम्बध में भारत सरकार की ओर से अपने अर्द्धशासकीय पत्र के माध्यम से राज्यों से सुझाव आमन्त्रित किये गये हैं। इसे लेकर मांग है कि परिषद को आमन्त्रित कर उसके सुझावों को सम्मलित करते हुए भारत सरकार को राज्य सरकार प्रेषित करें।
10- वर्कचार्ज कर्मियों को उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार अनुमन्य की गई पेंशन एवं ग्रेच्युटी के भुगतान को लेकर आ रही समस्या का शासन व सरकार के स्तर से कार्यवाही कर समस्या का समाधान किया जाए।
11- सेवानिवृत्त कार्मिकों को चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए बिल आहरण वितरण अधिकारी अथवा संबंधित कोषागार के माध्यम से प्रस्तुत करने की व्यवस्था चिकित्सा विभाग की ओर से जारी शासनादेश में की गई है। वित्त विभाग से शासनादेश जारी न होने के कारण कतिपय कोषागार इस संबंध में आनाकानी कर रहे हैं। अतः इसके लिए वित्त विभाग से भी शासनादेश निर्गत किया जाए।
12- समस्त वर्दीधारियों को पुलिस कर्मियो की भांति सुविधाए अनुमन्य करने की मांग पर शासन स्तर पर कार्यवाही लंबित है। ये मांग पूर्ण कराई जाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
13- दिनांक 30 जून एवं 31 दिसम्बर को सेवा निवृत्त होने वाले कार्मिकों को वेतनवृद्धि के लाभ के शासनादेश में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जारी शासनादेश के अनुसार संशोधन किया जाए।
14- हरियाणा, राजस्थान एवं पंजाब राज्यों की ओर से राशिकरण की कटौती के समय में की गई कमी के दृष्टिगत उत्तराखंड के सेवानिवृत्त एवं सेवारत कार्मिकों के राशिकरण की कटौती पर भी समय में कमी की जाए।
15- राज्य कर्मियों को भी केन्द्र की भांति मकान किराया भत्ता अनुमन्य किया जाए।
16- विभिन्न विभागों में पदोन्नति सेवानियमावली एवं पुर्नगठन के लिए मुख्य सचिव के स्तर पर बैठक आयोजित की जाए।
17- समस्त निगम, निकाय, विश्वविद्यालय, राजकीय विश्वविद्यालय, महाविद्यालय, अशासकीय विद्यालय सहित अन्य समान प्रकृति के कार्मिकों को राज्य कर्मियों की भांति समस्त सुविधाए अनुमन्य करने का निर्णय शासन स्तर पर किया जाए।
18- आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत कार्मिकों की सेवा बरकरार रखने के लिए संबंधित को निर्देशित किया जाए।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।



