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April 4, 2025

बर्फ में दबे 50 श्रमिकों का रेस्क्यू, चार ने दम तोड़ा, चार की खोज जारी, कांग्रेस नेता धस्माना ने कहा- लापरवाही के लिए तय हो जिम्मेदारी

उत्तराखंड के चमोली जिले में माणा में हिमस्खलन के दौरान बर्फ में दबे 55 श्रमिकों में से 50 का रेस्क्यू कर लिया गया। इनमें चार श्रमिकों की उपचार के दौरान मौत हो गई। वहां, पांच श्रमिकों में से एक सकुशल अपने घर पहुंच गया। बाकी चार की तलाश जारी है। सीमा सड़क संगठन शिविर के निर्माण मजदूर बदरीनाथ के माणा गांव के सीमावर्ती इलाके में काम कर रहे थे। शुक्रवार की तड़के भीषण हिमस्खलन के चलते मजदूर बर्फ में दब गए थे। बताया जा रहा है कि मजदूर वहां कंटेनर में सो रहे थे। इसी दौरान कंटेनर के ऊपर हिमस्खलन हो गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

सरकार की और से जानकारी दी गई कि माणा के पास हिमस्खलन की चपेट में आए 55 श्रमिकों में से 50 श्रमिकों का रेस्क्यू कर लिया गया है। अब तक लापता पांच श्रमिकों में से कांगड़ा हिमाचल प्रदेश निवासी एक श्रमिक सकुशल अपने घर पहुंच गया है। चार अन्य श्रमिकों की खोजबीन के लिए राहत और बचाव दलों द्वारा युद्धस्तर पर कार्य किया जा रहा है। सेना के स्निफर डाग्स की मदद ली जा रही है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार की देर शाम आपदा प्रबन्धन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन तथा चमोली के जिलाधिकारी संदीप तिवारी से राहत और बचाव कार्यों का अपडेट लिया। उन्होंने लापता श्रमिकों की तलाश के लिए व्यापक स्तर पर खोज एवं बचाव अभियान संचालित करने के निर्देश दिए हैं। वहीं हिमस्खलन की चपेट में आकर 04 श्रमिकों की दुखद मृत्यु की सूचना है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

बताया गया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर लापता चार श्रमिकों की खोजबीन के लिए शनिवार को देर शाम तक भी राहत और बचाव कार्य संचालित किए गए। भारतीय सेना, आईटीबीपी के साथ ही एनडीआरएफ, एसडीआरएफ द्वारा सघन रेकी की जा रही है। रविवार को जीपीआर की मदद से भी सर्च ऑपरेशन संचालित किया जाएगा। इसके अलावा थर्मल इमेजिंग कैमरा तथा विक्टिम लोकेशन कैमरा के जरिये भी रविवार सुबह से सर्च ऑपरेशन संचालित किया जाएगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

आपदा प्रबन्धन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि शनिवार को माणा स्थित सेना के हास्पिटल से 24 श्रमिकों को जोशीमठ लाया गया। यहां सेना के अस्पताल में इनका उपचार किया जा रहा है। इनमें से दो श्रमिकों की स्थिति थोड़ी गंभीर है, जिन्हें एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया है। इनमें से एक मरीज को एम्स में भर्ती करा दिया गया है, जबकि दूसरे मरीज को एम्स लाए जाने की कार्यवाही गतिमान है। एक श्रमिक की जोशीमठ में दुखद मृत्यु की सूचना प्राप्त हुई है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

वहीं दूसरी ओर बदरीनाथ, माणा में हिमस्खन में फंसे कुल 26 श्रमिक लाए गए थे। इनमें से 23 श्रमिक सुरक्षित हैं, जबकि 03 श्रमिकों की दुखद मृत्यु हुई है। वहीं चमोली के जिलाधिकारी ने बीआरओ के प्रतिनिधियों को निर्देशित किया गया कि जो श्रमिक लापता हैं, उनके घर पर फोन कर जानकारी प्राप्त की जाए। बीआरओ ने कांगड़ा हिमाचल प्रदेश निवासी सुनील कुमार के घर पर फोन किया तो पता चला कि वे घर पहुंच गए हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

वहीं शनिवार देर शाम तक राहत और बचाव दलों द्वारा सभी आठ कंटेनरों को खोज निकाला गया। कंटेनरों की तलाशी ली गई, जिनमें कोई भी श्रमिक नहीं मिला। सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआर और वायु सेना के बचाव दल पांच अन्य श्रमिकों की तलाश में युद्ध स्तर पर अभियान छेड़े हुए हैं। सेना के मुताबिक तीन कंटेनरों का पता नहीं चल रहा है, वे भारी बर्फ के नीचे दबे हैं। उनकी खोज के लिए दिल्ली से जीपीआर रडार मंगाया गया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

लापरवाही के लिए तय हो जिम्मेदारीः सूर्यकांत धस्माना
उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने चमोली जिले के बदरीनाथ धाम के पास माणा में आए हिमस्खलन में फंसे 55 श्रमिकों में से चार की मृत्यु के समाचार को दुख जताया। उन्होंने इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन में लगे सेना, एयरफोर्स व एनडीआरएफ के जवानों की प्रशंसा की। साथ ही उनका आभार व्यक्त किया है। वहीं इस पूरे प्रकरण में मौसम विभाग की पच्चीस फरवरी की चेतावनी को नजरअंदाज करने व प्रभावित क्षेत्र में से श्रमिकों को अन्यत्र सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित नहीं करने को बड़ी लापरवाही बताया। साथ ही उन्होंने इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग केंद्र व राज्य सरकार से की है। धस्माना ने कहा कि तीन दिन पूर्व पूरे सप्ताह के मौसम का पूर्वानुमान जब उपलब्ध था, तो ऐहतियाती कदम क्यों नहीं उठाएं गए। यह बड़ा सवाल है, जिसके लिए निश्चित रूप से जवाबदेही तय होनी चाहिए।
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

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