राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने सदन में रानीपोखरी ऋषिकेश सड़क चौड़ीकरण की मांगी जानकारी

राज्यसभा सांसद एवं उत्तराखंड बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने रानीपोखरी ऋषिकेश सड़क चौड़ीकरण के मुद्दे को उच्च सदन में उठाया। साथ ही उन्होंने स्वामित्व अधिकार योजना की प्रगति पर भी मांगी जानकारी जानकारी मांगी। राज्यसभा में महेंद्र भट्ट ने आतारंकित प्रश्न संख्या 2141 के तहत सड़क परिवहन एवं राजमार्ग से संबंधित जानकारी मांगी। इसमें पूछा गया कि देहरादून जिले में यातायात सुधार की दृष्टि से रानीपोखरी से ऋषिकेश मार्ग के चौड़ीकरण को लेकर क्या योजना है? (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इसके जवाब में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन जयराम गडकरी की तरफ से जानकारी दी गई कि कांवड़ यात्रा, चारधाम यात्रा आदि के दौरान भानियावाला रानीपोखरी ऋषिकेश मार्ग एनएच-7 पर यातायात बढ़ जाता है। इस खंड की कुल लंबाई 19.78 किलोमीटर में से 11.89 किलोमीटर लंबाई बिना पेव्ड शोल्डर के 4-लेन वाली है। 7.89 किलोमीटर 2-लेन की है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने बताया कि यातायात को सुगम बनाने के लिए, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने राज्य में एनएच-7 के भानियावाला-जौलीग्रांट ऋषिकेश स्पर खंड को किमी 0 से किमी 19.780 तक चार से छह लेन बनाने की परियोजना को सौंप दिया है। इस परियोजना में 3.85 किलोमीटर की लंबाई (चैनेज 0 से चैनेज 3.850) में मौजूदा सड़क को 6-लेन तक चौड़ीकरण करना। शेष 15.93 किलोमीटर लंबाई में पेव्ड शोल्डर सहित 4 लेन बनाना शामिल है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इसके अतिरिक्त उन्होंने पंचायती राज्य मंत्रालय से गांवों का सर्वेक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक प्रौद्योगिकी के साथ मानचित्रण (स्वामित्व) योजना के संबंध में महेंद्र भट्ट ने जानकारी मांगी। इसके ज़बाब में पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने बताया कि स्वामित्व योजना के तहत 13 मार्च, 2025 तक, 1.61 लाख गांवों में 2.42 करोड़ संपत्ति कार्ड तैयार किए गए है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
वहीं कुछ राज्यों में अब तक उक्त योजना के कार्यान्वयन नहीं हो पाया है जिसमें पश्चिमी बंगाल, बिहार, नागालैंड, मेघालय में पूर्व समानांतर प्रक्रिया और चंडीगढ़ में शून्य ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण अभी निर्णय लंबित है। इसके अतिरिक्त सीमित पायलट कार्यान्वयन वाले राज्यों में तमिलनाडु, तेलंगाना, सिक्किम और कार्यान्वयन निलंबन वाले राज्यों में झारखंड, मणिपुर एवं सीमित कवरेज वाले राज्यों में ओडिशा, असम शामिल हैं।
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।