राजधानी देहरादून में बिखौती मेले में 500 से अधिक महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में करेंगी थड़िया चौफला नृत्य
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में 12 अप्रैल को उत्तराखंड की लोक संस्कृति के प्रतीक बिखौती मेले का आयोजन किया जा रहा है। पूजा विहार में प्रस्तावित इस मेले में 500 से अधिक महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में थड़िया-चौफला नृत्य करेंगी। साथ ही 20 लोक गायक-गायिकाएं और दो दर्जन लोक वादक अपनी प्रस्तुति देंगे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
बिखौती मेले की आयोजक नन्दा सुनन्दा कीर्तन मण्डली एवं स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष पूनम ममगाईं ने आज देहरादून स्थित उत्तरांचल प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि बिखौती मेला उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। अपनी मूल सांस्कृतिक विरासत को बचाए रखने और इसे भावी पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से नन्दा सुनन्दा कीर्तन मण्डली एवं स्वयं सहायता समूह 12 अप्रैल को दोपहर दो बजे से पूजा विहार, सेवलाकलां में एक वृहद बिखौती मेले का आयोजन किया जा रहा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने बतया कि मेले का शुभारम्भ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं क्षेत्रीय विधायक विनोद चमोली करेंगे। मेले में देहरादून के विभिन्न क्षेत्रों से 50 से भी अधिक कीर्तन मण्डलियों की 500 से अधिक महिलाएं एक जैसी अपने पारम्परिक वेशभूषा में थड़िया-चौफला नृत्य करेंगी। साथ ही 20 लोक गायक एवं गायिकाओं के अलावा 20 से अधिक लोक वादक भी अपनी प्रस्तुति देंगे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
पूनम ममगाईं ने बताया कि महानगरों में निवासरत महिलाओं का अपनी लोक संस्कृति के प्रति गहरा जुड़ाव है तथा वह अपनी मूल विरासत के लिए सजग भी हैं। इसी को देखते हुए नन्दा सुनन्दा कीर्तन मण्डली एवं स्वयं सहायता समूह द्वारा यह प्रयास जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज वह समय आ चुका है जब हमें अपनी पारम्परिक एवं पौराणिक लोक सांस्कृतिक विरासत को बचाये रखने के लिए सामूहिक प्रयास करना होगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि यह हमारे जड़े हैं और यही हमारा मूल आधार एवं पहचान है। जिस प्रकार बिना रीड़ की हड्डी के शरीर को कोई अस्तित्व नहीं होता है उसी प्रकार हमारी लोक संस्कृति के बिना हमारा अस्तित्व नहीं है। पत्रकार वार्ता में गीता ध्यानी, विमला अधिकारी और अनुज वालिया मौजूद थे।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


