Loksaakshya Social

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

March 18, 2026

हर छह में से एक इंसान हर दिन झेल रहा गर्मी, क्लाइमेट चेंज अब रोज़मर्रा की हकीकत

दिसंबर से फरवरी का समय आमतौर पर दुनिया के कई हिस्सों में ठंड का होता है, लेकिन हाल के महीनों में यह पैटर्न बदलता दिखा है। एक नए वैश्विक विश्लेषण के अनुसार, इस अवधि में बड़ी आबादी ऐसे तापमान में रह रही थी, जिस पर जलवायु परिवर्तन का स्पष्ट प्रभाव था। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

अमेरिका स्थित शोध संस्था Climate Central की रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच दुनिया में हर 6 में से 1 व्यक्ति रोज़ ऐसे तापमान के संपर्क में था, जिस पर मानवजनित जलवायु परिवर्तन का मजबूत असर था। यह विश्लेषण Climate Central के क्लाइमेट शिफ्ट इंडेक्स के आधार पर किया गया है, जो यह मापता है कि किसी दिन का तापमान प्राकृतिक परिस्थितियों के मुकाबले जलवायु परिवर्तन से कितना प्रभावित हुआ है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

रिपोर्ट बताती है कि यह प्रभाव सिर्फ सीमित क्षेत्रों तक नहीं था, बल्कि व्यापक स्तर पर दर्ज किया गया। करीब 2.5 अरब लोग, 124 देशों में, कम से कम 30 दिन तक ऐसे तापमान में रहे, जो जलवायु परिवर्तन से स्पष्ट रूप से प्रभावित थे। इसी अवधि में, 47 देशों में जितने भी दिन मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक गर्मी के रहे, वे सभी पूरी तरह जलवायु परिवर्तन से जुड़े पाए गए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 22.5 करोड़ लोगों ने 30 दिन या उससे अधिक समय तक ऐसी गर्मी का सामना किया, जिसे “रिस्की हीट” की श्रेणी में रखा गया है। इनमें से 81 प्रतिशत लोग अफ्रीका में रहते हैं। विश्लेषण में यह भी सामने आया कि वैश्विक स्तर पर तापमान में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से मानव गतिविधियों से जुड़ी है, खासकर कोयला, तेल और गैस के उपयोग से होने वाले उत्सर्जन के कारण। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

Climate Central की विज्ञान उपाध्यक्ष क्रिस्टीना डाहल (Kristina Dahl) के अनुसार, यह निष्कर्ष दिखाता है कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य का जोखिम नहीं, बल्कि वर्तमान में चरम गर्मी का एक प्रमुख कारण बन चुका है। उनका कहना है कि कई क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन ने केवल तापमान को बढ़ाया ही नहीं, बल्कि खतरनाक गर्मी के दिनों के लिए पूरी तरह जिम्मेदार रहा। इसके साथ ही, हाल के महीनों में तेज़ तूफान, रिकॉर्ड वर्षा और सूखे जैसी चरम मौसमी घटनाओं में भी वृद्धि देखी गई है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

रिपोर्ट यह संकेत देती है कि जलवायु परिवर्तन का असर अब मौसमी बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रोज़ाना के मौसम के अनुभव को प्रभावित कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के आंकड़े यह समझने में मदद करते हैं कि वैश्विक तापमान वृद्धि का प्रभाव किस तरह सीधे मानव जीवन, स्वास्थ्य और आजीविका से जुड़ रहा है। दिसंबर से फरवरी के इस विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि जलवायु परिवर्तन अब एक दीर्घकालिक पर्यावरणीय मुद्दा भर नहीं है, बल्कि यह वर्तमान में दुनिया भर के करोड़ों लोगों के लिए रोज़मर्रा की वास्तविकता बन चुका है।
नोटः सच का साथ देने में हमारा साथी बनिए। यदि आप लोकसाक्ष्य की खबरों को नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए आप्शन से हमारे फेसबुक पेज या व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ सकते हैं, बस आपको एक क्लिक करना है। यदि खबर अच्छी लगे तो आप फेसबुक या व्हाट्सएप में शेयर भी कर सकते हो। यदि आप अपनी पसंद की खबर शेयर करोगे तो ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी। बस इतना ख्याल रखिए।

Bhanu Bangwal

लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *