शहादत दिवस पर विभिन्न संगठनों ने शहीदे आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को किया याद
शहादत दिवस पर उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में विभिन्न संगठनों ने शहीदे आजम भगत सिंह को याद किया। अखिल भारतीय लायर्स यूनियन, सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू), एसएफआई, डीवाईएफआई, बस्ती बचाओ आंदोलन ने की ओर से राजगुरु, सुखदेव और भगत सिंह के आजादी के आंदोलन में दिए गए योगदान को याद किया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
सहस्त्रधारा रोड स्थित राजीव नगर कंडोली स्थित बस्ती में विचार गोष्ठी में डीएवी महाविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष एवं सीटू के जिला महामंत्री लेखराज ने बतौर मुख्य वक्ता कहा कि भगत सिंह के विचार आज भी समाज में प्रासंगिक है। उनकी विचारधारा मजदूरों को उनके हक दिलाने के साथ -साथ शोषण विहीन समाज की स्थापना करने की रही है। वे रूसी क्रांति से प्रभावित थे। उनकी इस छोटी सी उम्र में कई आयाम थे। उन्होंने समाज के विभिन्न हिस्सों पर अपनी राय रखी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि भगत सिंह ने सेंटर असेंबली में बम धमाका करके यह प्रदर्शित किया कि वे गूंगी -बहरी सरकार को जगाना चाहते थे। वे तत्कालीन अंग्रेज सरकार द्वारा लाए जा रहे मजदूर विरोधी कानून का विरोध कर रहे थे। भगत सिंह चाहते थे कि मनुष्य द्वारा मनुष्य के शोषण पर रोक लगे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार द्वारा श्रम कानूनों को समाप्त कर श्रम संहिताएं बनाई गई हैं। जो कि मजदूरों को गुलामी की ओर धकेल देगी। इससे समाज में ना बराबरी बढ़ेगी और मजदूरों का शोषण ओर अधिक होगा। जिसका भगत सिंह विरोध करते थे, उसे देश का मजदूर वर्ग कभी स्वीकार नहीं करेगा। शहीदे आजम भगत सिंह के विचारों से लैस होकर संघर्ष करेंगे और सरकार को पीछे हटने पर मजबूरकर देंगे। उन्होंने कहा कि वे सामाजिक उत्पीड़न के भी खिलाफ थे वे धर्म अंधविश्वास में विश्वास नहीं करते थे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं समाजसेवी अजय शर्मा ने कहा कि भगत सिंह उस समय के चमकते सितारे थे। उन्होंने भौतिकवाद आत्मसात किया। उन्होंने जहां एक तरफ वर्ग संघर्ष को आगे बढ़ाने का काम किया, वहीं क्रांति के पहलुओं पर काम किया। उन्होंने अंग्रेजों से कभी भी समझौता नहीं किया और अपने संघर्षो को आगे बढ़ाने का काम किया। उन्होंने भारत नौजवान सभा संगठन का निर्माण किया। साथ ही एचआरए बना कर अपनी विचारधारा को धार देने का काम किया। उन्होंने भगत सिंह को निर्विवाद क्रांतिकारी माना। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस अवसर पर शंभू प्रसाद ममगई ने कार्यक्रम का संचालन किया गया। गोष्ठी में एसएफआई के प्रांतीय अध्यक्ष नितिन मलेठा, किरण यादव, सोनू कुमार, अभिषेक भंडारी, देहरादून बार एसोसिएशन की उपाध्यक्ष सीमा चड्ढा, उत्तराखंड बार कौंसिल के पूर्व उपाध्यक्ष रंजन सोलंकी, अनुराधा आदि ने विचार व्यक्त किए। प्रेमा गढ़िया ने सभी का धन्यवाद किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस अवसर पर बिरजू , एसएस नेगी, अनिल गोस्वामी, भगवंत पायल, रविन्द्र नौडियाल, गुरु प्रसाद पेटवाल, हरीश कुमार, सुनीता रावत, शैलेन्द्र परमार, कनिका, अतुल तिवारी, योगेश नेगी, प्रो प्रियंका, कोमल, नरेंद्र सिंह सहित बड़ी संख्या में बस्तीवासी उपस्थित थे।
नोटः सच का साथ देने में हमारा साथी बनिए। यदि आप लोकसाक्ष्य की खबरों को नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए आप्शन से हमारे फेसबुक पेज या व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ सकते हैं, बस आपको एक क्लिक करना है। यदि खबर अच्छी लगे तो आप फेसबुक या व्हाट्सएप में शेयर भी कर सकते हो।

Bhanu Bangwal
लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


