सिलक्यारा मामले में न किसी की जवाबदेही और ना ही कार्रवाई, जांच रिपोर्ट के बगैर दोबारा काम सरकार की बदनीयतीः धस्माना
एआईसीसी सदस्य व उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि सिलक्यारा टनल हादसे को लेकर उठे तमाम सवालों को केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय व राज्य सरकार ने खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े हादसे में ना ही किसी की जवाबदेही तय की गई और ना ही किसी पर कोई कार्रवाई की गई। यही नहीं, जांच रिपोर्ट के बगैर ही सुरंग का निर्माण करने वाली कंपनी ने दोबारा काम शुरू कर दिया। इसे सरकार की बदनीयती ही कहा जा सकता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
धस्माना ने कहा कि सिलक्यारा निर्माणाधीन टनल में निर्माण एजेंसी ने 20 फरवरी 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट की बैठक के निर्णय को सिलक्यारा टलन निर्माण में पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया। बैठक में सिलक्यारा टनल को सशर्त एस्केप पैसेज के साथ निर्माण की अनुमति दी गई थी, किंतु निर्माण एजेंसी नवयुग कम्पनी ने बिना एस्केप पैसेज व बिना किसी आपातकालीन निकासी के निर्माण किये चार किलोमीटर टनल खोद दी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि जिस तरह से खुदाई की गई, उससे यह आशंका है कि टनल में ब्लास्ट किया गया। दिवाली के दिन टनल में भूस्खलन व मलवा गिरने का हादसा घटा, जिसमें 41 श्रमिक फंस गए थे। इनको लम्बी जद्दोजहद के बाद रैट होल माइनर्स ने निकाला। धस्माना ने कहा कि इस हादसे के लिए साफ साफ निर्माण एजेंसी जिम्मेदार है। आज तक कोई कार्रवाई उनके विरुद्ध नहीं गई। वहीं सरकार रैट होल माइनर्स की मेहनत पर मियां मिट्ठू बन कर अपनी ही पीठ थपथपाते नहीं थक रही है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि राज्य का आपदा प्रबंधन तंत्र पूरी तरह से नाकाम साबित हुआ है। अगर उत्तप्रदेश के रैट होल माइनर्स न आते तो अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त अर्नाल्ड डिक्स ने सार्वजनिक रूप से कह दिया था कि क्रिसमस के आसपास अभियान पूरा हो पायेगा। धस्माना ने कहा कि केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय व उत्तराखंड राज्य सरकार से कांग्रेस यह पूछना चाहती है कि सिलक्यारा हादसे का जिम्मेदार कौन हैं। उनके खिलाफ क्या कार्यवाही की गई है। उन्होंने कहा कि अगर सरकारें जवाब नहीं देती तो यह स्पष्ट रूप से एक बड़ा टनल घोटाला है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
ये है घटनाक्रम
गौरतलब है कि जनपद उत्तरकाशी के यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर धरासू एवं बड़कोट के मध्य सिल्क्यारा के समीप लगभग 4531 मीटर लम्बी सुरंग का निर्माण हो रहा है। इसमें सिल्क्यारा की तरफ से 2340 मीटर तथा बड़कोट की तरफ से 1600 मीटर निर्माण हो चुका है। इसमें 12 नवम्बर 2023 की सुबह सिल्क्यारा की तरफ से लगभग 270 मीटर अन्दर लगभग 30 मीटर क्षेत्र में ऊपर से मलबा सुरंग में गिर गया था। इसमें 41 व्यक्ति फँस गए। उसी दिन से श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान शुरु किया गया। टनल के अंदर फंसने वाले मजदूर बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के थे। चारधाम रोड प्रोजेक्ट के तहत ये टनल बनाई जा रही है। 24 नवंबर से मशीन से खुदाई ठप हो गई थी। इसके बाद हाथ से खुदाई की गई और मंगलवार 28 नवंबर की रात रेस्क्यू के 17वें दिन श्रमिकों को बाहर निकाल लिया गया। हाथ से खुदाई को ही रैट माइनिंग कहा जाता है।
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Bhanu Prakash
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भानु बंगवाल
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।



