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March 2, 2026

स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय संगोष्ठी, योग के चिकित्सीय और दार्शनिक आयामों पर मंथन

देहरादून के डोईवाला क्षेत्र में स्थित स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू) जौलीग्रांट के स्कूल ऑफ योगा साइंसेज में भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद के तत्वावधान में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में देशभर से आए प्रख्यात विद्वानों और शोधकर्ताओं ने योग के चिकित्सीय (थेराप्यूटिक) और दार्शनिक पहलुओं पर गहन चर्चा की। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

कार्यक्रम का आयोजन स्कूल ऑफ योगा साइंसेज के नागार्जुन सभागार में हुआ। उद्घाटन सत्र में स्कूल के प्राचार्य डॉ. रुद्र भंडारी ने आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं में योग की निवारक और उपचारात्मक भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान जीवनशैली से उत्पन्न बीमारियों के समाधान में योग अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो सकता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

मुख्य वक्ता श्री श्री विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. बी.आर. शर्मा ने हठयोग के गूढ़ आयामों, विशेषकर ‘नादनुसंधान’ विषय पर विस्तार से व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि नादनुसंधान साधक को अपनी आंतरिक चेतना से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। आयुष मंत्रालय के अनुसंधान अधिकारी डॉ. राम नारायण मिश्रा ने पतंजलि योगसूत्र की शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए प्राणायाम, धारणा और ध्यान की आत्म-विकास में महत्वपूर्ण भूमिका को स्पष्ट किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

 

उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि व्यक्तित्व के समग्र विकास की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। भारत हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड (बीएचईएल) के पूर्व कार्यकारी निदेशक डॉ. बलवीर तलवार ने अपने व्यावसायिक जीवन में योगिक जागरूकता को अपनाने के अनुभव साझा किए। वहीं उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के डॉ. कामाख्या कुमार ने शास्त्रीय ग्रंथों के संदर्भ में योग चिकित्सा तथा प्राण और मन के पारस्परिक संबंध पर विस्तृत चर्चा की। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

संगोष्ठी की संयोजक डॉ. सोमलता झा ने सभी विशिष्ट वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। समापन सत्र में संवादात्मक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. गरिमा जायसवाल ने किया।
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Bhanu Bangwal

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

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