एक साल से खराब है राजधानी के सबसे बड़े अस्पताल की एमआरआइ मशीन, फिर कहो-सब बढ़िया

क्या है सरकार का काम। घोषणाएं और फोटो खिंचवाने तक सीमित है रह गया है। हर दिन नई घोषणाएं तो हो रही हैं। नए नए कार्यों की स्वीकृति दी जा रही है। धनराशि स्वीकृत हो रही है। वहीं, सबसे बड़ी आवश्यकता की बात करें तो अस्पतालों की हालत अभी तक नहीं सुधार पाए हैं। पिछले एक साल से ज्यादा वक्त हो गया और उत्तराखंड की राजधानी के सबसे बड़े अस्पताल की एमआरआइ मशीन खराब पड़ी है।
ऐसा हम नहीं कह रहे हैं, ये राज्य आंदोलनकारी मोहन खत्री का कहना है। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में कोविड-19 महामारी से लगभग लगभग पूरा प्रदेश प्रभावित है, जिसमें की प्रदेश के अनेकों व्यक्तियों ने अपनी जान तक गंवा दी। ऐसे में अस्पतालों की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की जरूरत है।
उन्होंने पत्र में लिखा कि गढ़वाल मंडल के एकमात्र एमआरआइ सुविधा से युक्त देहरादून जिले के दून मेडिकल कॉलेज के दून हॉस्पिटल की एमआरआइ मशीन कोविड-19 के प्रथम दौर पहले से खराब चल रही है। इसे भी विडंबना कहेंगे कि पूर्व मुख्यमंत्री के पास ही स्वास्थ्य विभाग था। अब सीएम बदलने के बाद भी चिकित्सा सेवा में कोई सुधार नहीं कर पाए। गढ़वाल मंडल के अधिकतर लोग इसी चिकित्सालय में इलाज के लिए निर्भर है।
मोहन खत्री के मुताबिक इसी चिकित्सालय में दिव्यांग बुजुर्गों के लिए लिफ्ट की सुविधा दी गई थी, वो भी काफी समय से खराब चल रही है। इसके साथ ही दून हॉस्पिटल में आईसीयू बेड की भारी कमी पड़ रही है। बेड बढ़ाने की जरूरत है। दून हॉस्पिटल की नई बिल्डिंग का कार्य भी निर्धारित समय में पूरा नहीं हो पाया। इस कारण ओपीडी भी सुचारु ढंग से संचालित नहीं हो पा रही है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है किइस नव निर्माण कार्य के लिए एक एक जांच कमेटी बनाई जाए। साथ ही निर्धारित समय पर कार्य न होने, जो लोग दोषी पाए जाएं उनके विरोध उचित कार्रवाई करने की मांग की गई।
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।