मां की कहानीः लट्ठ खाने के बाद धूर्त सियार बोला- मैं जंग जीत गया, दुश्मन ने मेरे शरीर से धूल ही झाड़ी, ट्रंप भी यही बोल रहे
बचपन में रात को सोने से पहले मैं मां को कहानी सुनाने को कहता था। गर्मी के दिनों में तो घर के आंगन में ही बिस्तर लग जाता था और जब मां कहानी सुनाती थी तो आस पड़ोस से लेकर मोहल्ले के कई बच्चे हमारी चारपाई के चारों और बैठकर कहानी सुनने लगते थे। मां को कहानी सुनाने में महारथ हासिल थी। मेरा मां से कहानी सुनने का क्रम तब तक चला जब तक मैं युवावस्था में नहीं पहुंच गया। इसके बाद बहनों के बच्चे जब हमारे घर आते तो वे नानी से यानि कि मेरी मां से कहानी सुना करते थे। (कहानी जारी, अगले पैरे में देखिए)
मां की कहानी के चरित्र में कोई हीरो होता था तो कोई विलेन। सिर्फ सब कहानी में एक ही बात की समानता थी कि बुराई का अंत निश्चित है। साथ ही अंत में ये संदेश भी रहता था कि जीवन में अच्छा काम करोगे तो तुम सदैव खुश रहोगे। एक बार मां ने धूर्त सियार की कहानी सुनाई। ये कहानी उस समय ज्यादातर वे माताएं अपने बच्चों को सुनाती थीं, जो कहानी सुनाने में दिलचस्पी लेती थी। आज तो मुझे लगता है कि वह धूर्त सियार आज भी जिंदा है। वह पूरी दुनिया को परेशान कर रहा है। अब आते हैं कहानी पर। एक ऐसा समय था कि जल, जंगल और जमीन में चाहे जानवर हों, या फिर मनुश्य या भी जलीय प्राणी, सभी धूर्त सियार के आतंक से परेशान थे। (कहानी जारी, अगले पैरे में देखिए)
वह किसानों के खेत में पहुंचकर फसल को रौंद देता था। तो कभी दूसरे जानवरों को परेशान करता था। सभी उससे बदला लेने की कोशिश तो करते, लेकिन धूर्त सियार चालाकी से जीत जाता था। एक बार वह धूर्त सियार ऐसे जंगल में पहुंच गया, जहां दूर दूर तक पानी का नामोनिशान नहीं था। वह पानी की तलाश में इधर, उधर भटकता रहा। फिर उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। इसी दौरान उसे एक हाथी नजर आता है। वह हाथी के करीब जाता है और कहता है कि मेरे भाई मदद कर दो। मैं मरने वाला हूं। कहीं भी पानी नहीं है और मुझे मौत के इस जंगल से बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिल रहा है। (कहानी जारी, अगले पैरे में देखिए)
वो हाथी सीधा जानवर था। उसने सोचा कि सियार पानी वाले स्थान तक पहुंचने से पहले ही मर जाएगा। ऐसे में हाथी ने सियार से कहा कि मेरे पेट में बहुत पानी है। तू भीतर जाना और सिर्फ पानी पीकर वापस लौट आना। दाएं और बाएं मत देखना। सियार बोला-हां मुझे तो सिर्फ पानी पीना है। ऐसे में हाथी अपना मुंह खोलता है और सियार उसके मुंह से पेट तक प्रवेश कर जाता है। पानी पीकर सियार सोचता है कि कुछ देर आराम करके दोबारा पानी पी लेता हूं। कहीं ऐसा ना हो कि फिर से प्यास लग जाए। फिर उसका लालच बढ़ता है और वह हाथी के शरीर के भीतरी अंगों को खाने लगता है। (कहानी जारी, अगले पैरे में देखिए)
कुछ दिन तक वह हाथी के शरीर के अंगों को खाता रहता है। हाथी बेचारा मर जाता है। हड्डियों का जाल और उसके बाद मोटी खाल के कवच को सियार तोड़ नहीं पाता और हाथी के शरीर में ही फंसकर रह जाता है। वह बाहर निकलने के लिए उछलता है, कूदता है, लेकिन सारे प्रयास विफल हो जाते हैं। अब धूर्त सियार को उस जंगल में एक पुरुष और स्त्री की बात सुनाई देती है। वे शिव और पार्वती होते हैं। सियार हाथी के शरीर के भीतर से आवाज लगाता है कि कौन हो। (कहानी जारी, अगले पैरे में देखिए)
जवाब में पार्वती कहती हैं कि भगवान शिव और मैं पार्वती हूं। सियार करता है कि मेरा मूर्ख मत बनाओ। यदि सच में भगवान शिव तुम्हारे साथ हैं तो बारिश करते बताओ। भगवान शिव पार्वती से कहते हैं कि ये सियार बहुत धूर्त है, इसलिए इसे इसी के हाल में छोड़ना ही उचित है। नहीं तो वह लोगों को परेशान करेगा। पार्वती को उस पर दया आती है, वह कहती है कि किसी को हम यूं ही मरते नहीं देख सकते हैं। इसलिए प्रभु बारिश कर दो। (कहानी जारी, अगले पैरे में देखिए)
भगवान शिव बारिश करते हैं, इतनी ज्यादा बारिश होती है कि हाथी का शरीर फूलने लगता है। मुंह भी खुल जाता है। मौका देखकर सियार बाहर की ओर छलांग लगा देता है। फिर भगवान शिव और पार्वती से कहता है कि देखा मेरा चमत्कार। मैने बारिश कर दी। मैं ही असली भगवान हूं। अब भगवान शिव सियार को सबक सिखाने की योजना बनाते हैं। वह देखते हैं कि सियार एक खेत में रह दिन जाता है और फसल बर्बाद करता है। ऐसे में भगवान शिव एक जानवर का पुतला बनाकर खेत में रखते हैं। साथ ही उसमें ऐसा लेप लगाते हैं कि जो उसे छुए वहीं से पुतले में चिपक जाए। इस पुतले पर वह कई तरह के फल की माला लटका देते हैं। (कहानी जारी, अगले पैरे में देखिए)
सियार जब खेत में पहुंचता है तो वह पहले पुतले को देखकर कुछ दूर तक भागता है। फिर उसे अहसास होता है कि पुतला तो अपने स्थान से हिला तक नहीं। वह समझ जाता है कि ये नकली है। वह पुतले के पास आता है और उसके गले पर लटके फल को गिराने के लिए अपने एक हाथ का पंजा मारता है। उसका हाथ वहीं चिपक जाता है। वह कहता है कि मेरा हाथ छोड़ नहीं तो दूसरे हाथ से मारूंगा। प्रयास विफल और दूसरा पंजा भी वहीं चिपक जाता है। सियार धमकी देता है कि यहि मेरे हाथ नहीं छोड़े तो मैं लात मारूंगा। मेरी लात को बम से भी घातक है। उसके दोनों पैर भी पुतले में चिपक जाते हैं। फिर अंत में सिर से मारने की कोशिश में वह सिर भी चिपका बैठता है। (कहानी जारी, अगले पैरे में देखिए)
जब सियार बुरी तरह जाल में फंस चुका होता है तब किसान बड़े बड़े लट्ठ लेकर वहां पहुंचते हैं और सियार की जमकर धुनाई करते हैं। खूब पिटाई जब हो जाती है तब सियार को मुक्त किया जाता है। इसके बाद सियार कहता है कि इन लोगों से मैं जंग जीत गया हूं। इन सबने तो मेरे शरीर की धूल की झाड़ी। कहानी पढ़कर आप समझ गए होंगे कि सियार कौन है। अमेरिका ने कभी ईराक, कभी अफगानिस्तान, कभी वियतनाम पर हमले किए। हर युद्ध में भारी तादात में अमेरिकी सैनिक मारे गए। उस दौरान किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने ये नहीं कहा कि मैं जीत गया। (कहानी जारी, अगले पैरे में देखिए)
अब अमेरिकी राष्ट्रपति ने इजराइल के साथ मिलकर ईरान पर हमला बोल दिया। या कहें कि सियार ने एक नई परेशानी खड़ी कर दी। दुनिया भर के लोगों की रसोई के चूल्हे बुझने की कगार पर हैं। भारत में एक राज्य से दूसरे राज्य में मजदूरी के लिए रहने वाले लोग तो अब पलायन कर रहे हैं। दुनिया को मूर्ख और धूर्त सियार कई साल पीछे धकेल रहा है। स्कूलों में, अस्पतालों में, पानी के प्लांट पर हमले कर रहा है। ईरान भी पलटवार कर रहा है। सियार के सबसे बड़े पानी के जहाज के बेड़े को मिसाइल से कई बार पीछे धकेल दिया। अजेय एयरक्राफ्ट एफ 35 हों या एफ 16 या 15, मिसाइल के हमलों से सबको आग के हवाले कर दिया। इजराइल को खंडहर में बदल दिया। कई अमेरिकी बेस तबाह कर दिए। सियार का साथ देने वालों पर भी मिसाइल या ड्रोन से रूप में आसमान से आफत बरसाई। हालांकि, ईरान का खुद का भी बड़ा नुकसान हुआ। फिर भी ईरान मोटा वाले लट्ठ हाथ में लेकर सियार और उसका साथ देने वालों को बुरी तरह पेल रहा है। (कहानी जारी, अगले पैरे में देखिए)
धूर्त सियार प्रयास कर रहा है कि किसी तरह इस लड़ाई से वह अपना पीछा छुड़ा ले। कुछ समय पहले तक शांति का नोबल पुरस्कार की चाह रहने वाला धूर्त जगह जगह हम गिराने, निर्दोष नागरिकों को मारने के रिकॉर्ड बना रहा है। जो अभी तक कहता था कि आपरेशन सिंदूर में भारत और पाकिस्तान के इतने जहाज गिरे, अब वह अपने जहाजों की संख्या बताने से हिचक रहा है। जो 80 बार से ज्यादा भारत के पीएम मोदी का नाम लेकर बोला हो कि मैंने सीज फायर कराया, अब वह खुद सीजफायर के लिए कभी किसी देश तो कभी किसी देश से मध्यस्थता करने की गुहार लगा रहा है। वहीं, ईरान ने साफ किया, युद्ध सियार ने किया, लेकिन इसे समाप्त ईरान करेगा। अब झेंप मिटाने के लिए मूर्ख सियार बोल रहा है कि मैं युद्ध जीत गया। मैंने ईरानी की नेवी तबाह कर दी। मैने वहीं निजाम बदल दिया। मेरा मकसद पूरा हो गया। मेरी नेवी, सैनिक क्षमता दुनिया में सबसे पावरफुल है। वहीं, स्टेट आफ हार्मुज को जनाब खुलवा तक नहीं सके। यानि मां की कहानी के पात्र सियार की तरह बोल रहा है कि हमें नुकसान नहीं हुआ। ईरान ने तो हमारे शरीर से धूल ही झाड़ी।
भानु बंगवाल
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


