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April 6, 2025

सड़क पर भीख मांगकर बच्चों को पढ़ाने वाली महिला से मिली मंत्री, किया नौकरी का वादा

उत्तराखंड के हरिद्वार में राज्यमंत्री रेखा आर्य सड़क पर भीख मांगने वाली हंसी प्रहरी से मुलाकात के लिए हरिद्वार पहुंची। उन्होंने महिला का हालचाल जाना। बताया जा रहा है कि मंत्री रेखा आर्य हंसी प्रहरी के लिए हरिद्वार बाल विकास कार्यालय में नौकरी और स्थाई निवास का प्रस्ताव लेकर पहुंची।
हंसी वो महिला है, जो अपने छात्र जीवन में न केवल कुशल वक्ता रही, बल्कि छात्र राजनीति में सक्रिय रहते हुए कुमाऊं विश्वविद्यालय के अल्मोड़ा परिसर में छात्रसंघ उपाध्यक्ष भी चुनी गई। पर इसे नियति का खेल ही कहेंगे कि अंग्रेजी और राजनीति शास्त्र में एमए डिग्रीधारी ये महिला आज हरिद्वार की सड़कों पर भीख मांग अपना और बच्चे का गुजारा करने को मजबूर हैं। पर हौसले अब भी मजबूत हैं। वो अपने बच्चे को पढ़ा भी रही हैं और अफसर बनाने के सपने बुन रही हैं।
जानिए महिला के बारे में
अल्मोड़ा जिले के हवालबाग ब्लॉक स्थित ग्राम रणखिला गांव की रहने वाली इस महिला का नाम है हंसी प्रहरी। पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी हंसी की इंटर तक की शिक्षा गांव में ही हुई और फिर उसने कुमाऊं विश्वविद्यालय के अल्मोड़ा परिसर में प्रवेश ले लिया। पढ़ाई के साथ-साथ वह विवि की तमाम शैक्षणिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती थी। बकौल हंसी, ‘वर्ष 2000 में मैं छात्रसंघ में उपाध्यक्ष चुनी गई और फिर विवि की ही सेंट्रल लाइब्रेरी में चार साल तक नौकरी की।’


मीडिया की हंसी पर ऐसे पड़ी नजर
हरिद्वार में हंसी की ओर मीडिया का ध्यान रविवार को तब गया, जब वह सड़क किनारे अपने छह साल के बेटे को पढ़ा रही थी। उसकी फर्राटेदार अंग्रेजी हर राहगुजर को हतप्रभ कर देने वाली थी। हंसी बताती है कि ससुराल की कलह से परेशान होकर वर्ष 2008 में वह लखनऊ से हरिद्वार चली आई। यहां शारीरिक रूप से कमजोर होने के कारण वह नौकरी नहीं कर पाई और रेलवे स्टेशन, बस अड्डा आदि स्थानों पर भीख मांगने लगी। इस हाल में भी हंसी की हिम्मत डिगी नहीं है, वह बेटे को पढ़ा रही है और चाहती है कि वह प्रशासनिक अधिकारी बने।
सरकार से है बस ये मांग
यही नहीं, हंसी के पास उसके सभी शैक्षणिक प्रमाणपत्र भी सुरक्षित हैं। बताती है कि उसकी एक बेटी भी है, जो नानी के पास रहकर पढ़ाई कर रही है। पिछले साल वह हाईस्कूल में 97 फीसद अंकों के साथ उत्तीर्ण हुई है। उसकी चिंता सिर्फ इतनी है कि सिर छिपाने को सरकार उसे एक छत मुहैया करा दे, ताकि वह बेटे परीक्षित को पढ़ा सके। इसके लिए वह कई बार मुख्यमंत्री समेत तमाम जिम्मेदार अधिकारियों को पत्र भी लिख चुकी है। बताया कि परीक्षित सरस्वती शिशु मंदिर मायापुर में दूसरी कक्षा में पढ़ रहा है।
यहां क्लिक करेंः डबल एमए और यूनिवर्सिटी की पूर्व उपाध्यक्ष, अब मांग रही भीख, पढ़िए इस महिला की दर्द भरी कहानी

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

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