बन रहा है 500 बेड का कोविड अस्पताल, नहीं मिल रहे चिकित्सक, आखिर किस काम का भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ
राजनीतिक दलों में एकमात्र भाजपा ही ऐसी पार्टी है, जिसके पास सबसे ज्यादा प्रकोष्ठ हैं। युवा, महिला, व्यापार, अल्पसंख्यक, बुद्धिजीवी, चिकित्सा सहित कई प्रकोष्ठ का गठन भाजपा ने किया है।
राजनीतिक दलों में एकमात्र भाजपा ही ऐसी पार्टी है, जिसके पास सबसे ज्यादा प्रकोष्ठ हैं। युवा, महिला, व्यापार, अल्पसंख्यक, बुद्धिजीवी, चिकित्सा सहित कई प्रकोष्ठ का गठन भाजपा ने किया है। इसके बाद कांग्रेस का नंबर आता है। अभी तक कांग्रेस में चिकित्सा प्रकोष्ठ का शायद ही गठन किया गया है। फिर बात होती है कोरोना के दौरान इन प्रकोष्ठ की। क्या ये प्रकोष्ठ हाथी के दिखाने वाले दांत हैं। या फिर जब मौका मिला तो प्रकोष्ठ से जुड़े चिकित्सकों की सेवाएं क्यों नहीं चिकित्सालयों में ली जा रही है। ताकी कोरोना के मरीजों को समुचित उपचार मिले और साथ ही प्रकोष्ठ से जुड़े लोगों को लोगों की सही मायने में सेवा करने का मौका मिल सके।यहां बात हो रही है हल्द्वानी में डीआरडीओ की मदद से बनाए जा रहे कोविड अस्पताल की। मेडिकल कॉलेज के मैदान में पांच सौ बेड का अस्पताल बनाया जा रहा है। इस कोविड अस्पताल के लिए चिकित्सकों की तलाश है। 10 दिन से चल रहे इंटरव्यू में अभी तक मात्र पांच डॉक्टर ही राजकीय मेडिकल कॉलेज को मिल पाए हैं। अस्पताल को चालू करने के लिए करीब 175 डॉक्टरों की जरूरत है। इसके अलावा 200 से ज्यादा पैरा मेडिकल स्टाफ की भी जरूरत होगी।
हल्द्वानी में बन रहा है कोविड अस्पताल
अप्रैल में डीआरडीओ और देहरादून से आई उच्च अधिकारियों की टीम ने राजकीय मेडिकल कॉलेज में फेब्रिकेटेड कोविड अस्पताल के निर्माण को लेकर दौरा किया था। अस्पताल में 100 ऑक्सीजन बेड, 125 आईसीयू बेड समेत 500 बेड के निर्माण की योजना है। इसके निर्माण का काम भी चल रहा है।
नहीं मिल रहे चिकित्सक
इस अस्पताल के लिए डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ की व्यवस्था की जिम्मेदारी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को दी गई। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने डॉक्टरों की भर्ती को लेकर विज्ञप्ति निकाली और 6 मई से इंटव्यू शुरू कर दिए। ये इंटरव्यू 31 मई तक चलेंगे। अभी तक मात्र 5 डॉक्टरों की भर्ती ही हो पायी है। इस अस्पताल को पूरी तरह से चालू करने के लिए करीब 175 डॉक्टर चाहिए। इसमें 7 प्रोफेसर, 13 एसोसिएट प्रोफेसर और 19 असिस्टेंट प्रोफेसर के अलावा जूनियर डॉक्टरों की जरूरत होगी। मगर यही स्थिति रही तो अस्पताल को शुरू करना मुश्किल हो जाएगा।
प्रकोष्ठ की ली जा सकती है मदद
अस्पताल को फिलहाल जब तक समुचित स्टाफ नहीं मिलता, तब तक चिकित्सा प्रकोष्ठ के अनुभवी चिकित्सकों की मदद ली जा सकती है। पर ऐसा नहीं हो रहा है। समाज सेवा के कार्य सिर्फ बयानबाजी तक सीमित हैं। ऐसे में अस्पताल कब शुरू होता है, ये कहा नहीं जा सकता है।





बीजेपी का दिखावा जादा काम कम