उत्तराखंड के माणा में हिमस्खलन में दबे मजदूर, 32 को बचाया, 25 की खोज जारी, कांग्रेस नेता धस्माना ने उठाए सवाल

उत्तराखंड के चमोली जिले के माणा गांव में शुक्रवार भीषण हिमस्खलन की खबर सामने आ रही है। इसमें 57 श्रमिकों में से 32 लोगों को बचाया गया है। बताया जा रहा है कि मजदूर वहां कंटेनर में सो रहे थे। इसी दौरान कंटेनर के ऊपर हिमस्खलन हो गया। वहीं, सड़क निर्माण में लगे 25 मजदूर बर्फ के बड़े-बड़े टुकड़ों के नीचे फंस गए। या लापता हैं। उनकी तलाश जारी है। इस मामले को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने भी सवाल उठाए हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि सीमा सड़क संगठन शिविर के निर्माण मजदूर बदरीनाथ के माणा गांव के सीमावर्ती इलाके में काम कर रहे थे। इस दौरान यह हादसा हुआ। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि बचाव अभियान में आईटीबीपी और सेना के जवान लगे हुए हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
सड़क निर्माण का काम बीआरओ की ओर से किया जा रहा था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आईजी ने बताया कि सीमा क्षेत्र माणा में सीमा सड़क संगठन के कैंप के पास भारी हिमस्खलन हुआ है। इसमें सड़क निर्माण में लगे 57 मजदूर फंस गए हैं। इनमें से 32 मजदूरों को बचा लिया गया है और गंभीर हालत में माणा के पास सेना के शिविर में भेज दिया गया है। 25 लोग लापता हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और बीआरओ के जरिये राहत और बचाव अभियान जारी है। सीएम धामी ने एक्स पर पोस्ट किया कि चमोली जिले के माणा गांव के पास बीआरओ की तरफ से किए जा रहे निर्माण कार्य के दौरान कई मजदूरों के हिमस्खलन में फंसने का दुखद समाचार मिला। आईटीबीपी, बीआरओ और अन्य बचाव दल की तरफ से राहत और बचाव काम किया जा रहा है। मैं सभी मजदूर भाइयों की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करता हूं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
माणा की घटना के लिए कौन जिम्मेदारः धस्माना
चमोली जनपद में श्री बद्रीनाथ के पास भारत के प्रथम गांव माणा में आज प्रातः आए बर्फीले तूफान एवलांच में चपेट में आने से बर्फ में दबे श्रमिकों की कुशलता की प्रार्थना के साथ ही उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने सिस्टम पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जब शासन प्रशाशन और सड़क निर्माण का कार्य कर रही बीआरओ के पास खराब मौसम व भारी बर्फबारी की पूर्वानुमान सूचना थी, तो कार्य में लगे श्रमिकों को सुरक्षित स्थान पर क्यों नहीं पहुंचाया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
कांग्रेस नेता धस्माना ने कहा कि हालांकि अभी हम सब इस घटना की चपेट में आए श्रमिकों की कुशलता की प्रार्थना कर रहे हैं, किन्तु यह गंभीर चूक मामला भी है। इससे इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जान आफत में आई है और इसकी जिम्मेदारी अवश्य तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हम अक्सर ऐसी घटनाओं में लापरवाही और चूक के लिए दोषी लोगों को चिह्नित नहीं करते और अगली दुर्घटना के समय यह बात याद आती है। उन्होंने कहा कि सिलक्यारा टनल के मामले में आज भी स्केप चैनल ना बनाए जाने के मुद्दे पर ना तो किसी की जवाबदेही तय की गई ना ही किसी को इसके लिए दंडित किया गया।
नोटः सच का साथ देने में हमारा साथी बनिए। यदि आप लोकसाक्ष्य की खबरों को नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए आप्शन से हमारे फेसबुक पेज या व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ सकते हैं, बस आपको एक क्लिक करना है। यदि खबर अच्छी लगे तो आप फेसबुक या व्हाट्सएप में शेयर भी कर सकते हो।

लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
वाट्सएप नंबर-9412055165
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।