तीन वामपंथी पार्टियों की संयुक्त बैठकः वाहन चालकों की हड़ताल को समर्थन, उत्तराखंड में सख्त भू कानून की मांग
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में तीन वामपंथी पार्टियों भाकपा, माकपा, भाकपा (माले) की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। ये बैठक माकपा के राज्य कार्यालय में हुई। बैठक में ट्रल चालकों की हड़ताल का समर्थन किया गया। साथ ही उत्तराखंड में सख्त भू कानून की पैरवी की गई। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस मौके पर वामपंथी पार्टियों ने हिट एंड रन मामलों में हाल में संसद में पारित भारतीय न्याय संहिता में ड्राइवरों के विरुद्ध भारी जुर्माना और जेल के प्रावधान के विरुद्ध चल रही वाहन चालकों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का समर्थन किया। वाम नेताओं ने कहा कि अनिश्चित जीवनचर्या और बेहद मामूली वेतन पर काम करने वाले ड्राइवरों के विरुद्ध दस लाख का जुर्माना और सात साल की कैद का प्रावधान अन्यायपूर्ण है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
वामपंथी नेताओं ने कहा कि यदि उत्तराखंड सरकार भूमि के कानून पर कोई ठोस काम करना चाहती है तो सबसे पहले उसे भूमि के कानून में 2018 और 2022 में किए गए संशोधनों को रद्द करना चाहिए। 2018 में भाजपा की त्रिवेंद्र रावत की सरकार ने भूमि कानून में संशोधन करते हुए प्रावधान कर दिया कि औद्योगिक प्रयोजन की लिए कितनी भी जमीन खरीदी जा सकती है। बेहिसाब खरीदी गयी ऐसी जमीन का भू उपयोग भी बदलवाने की आवश्यकता नहीं होगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
वक्ताओं ने कहा कि 2018 में संशोधन के बावजूद यह प्रावधान था कि भूमि जिस प्रयोजन के लिए खरीदी जाएगी, उसी प्रयोजन के लिए उसका उपयोग करना होगा। 2022 में पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने विधानसभा में कानून में संशोधन करके प्रयोजन की बाध्यता समाप्त कर दी। इसलिए राज्य में ज़मीनों की रक्षा के लिए भूमि के कानून में 2018 और 2022 में किए गए संशोधनों को रद्द करना पहली शर्त है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
औद्योगिक प्रयोजन के अलावा बाकी मामलों में भूमि खरीद की सीमा शहरी निकायों के बाहर ही लागू होती है, इसे शहरी निकायों में भी लागू किया जाना चाहिए। 2018 के बाद औद्योगिक प्रयोजन के लिए बिकी भूमि और उन पर लगे उद्योगों के मामले में तस्वीर स्पष्ट करते हुए उत्तराखंड सरकार को श्वेत पत्र जारी करना चाहिए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
वामपंथी पार्टियों ने कहा कि मूल निवास और संसाधनों पर अधिकार का मसला अहम है। इसे किसी भी सूरत में उन्माद की शक्ल में नहीं बदलने दिया जाना चाहिए और ना ही इसे गरीबों पर हमले के औज़ार के रूप में प्रयोग करने की छूट दी जानी चाहिए। जल्द ही वामपंथी पार्टियां इस मामले पर विस्तृत दस्तावेज़ जारी करेंगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
बैठक में तय किया गया कि वामपंथी पार्टियां भू कानून के मसले पर सरकार द्वारा गठित कमेटी के सामने अपना दृष्टिकोण रखेंगी। बैठक में भाकपा की राष्ट्रीय परिषद के सदस्य समर भंडारी, माकपा के राज्य सचिव राजेंद्र सिंह नेगी, भाकपा (माले) के राज्य सचिव इन्द्रेश मैखुरी, माकपा के वरिष्ठ नेता सुरेन्द्र सिंह सजवाण, शिव प्रसाद देवली, इन्दु नौडियाल, लेखराज,अनंत आकाश, राजेंद्र पुरोहित आदि उपस्थित थे।
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Bhanu Prakash
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भानु बंगवाल
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


