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January 11, 2026

पालतू बिल्ली की तलाश में लगे करीब चार माह, खर्च किए पौने दो लाख, जानिए बेंगलुरू से नैनीताल तक की रोचक कहानी

बिल्ली की तलाश करने वाले बेगलुरू निवासी के पौने दो लाख से अधिक रुपये खर्च भी हो गए। उन्हें खर्च की चिंता नहीं, बल्कि बिल्ली के मिलने का संतोष है।

पशु प्रेमियों को प्रेरित करने वाली इस कहानी का स्थान नैनीताल जिले से लेकर बेंगलुरू तक है। एक पशु प्रेमी की बिल्ली खोई तो उन्होंने उसकी तलाश में रात दिन एक कर दिए। धीरे-धीरे समय बीता, लेकिन बिल्ली नहीं मिली। फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। आखिरकार चार माह से पहले ही बिल्ली को खोज निकाला। इस बिल्ली की तलाश करने वाले बेगलुरू निवासी के पौने दो लाख से अधिक रुपये खर्च भी हो गए। उन्हें खर्च की चिंता नहीं, बल्कि बिल्ली के मिलने का संतोष है।
बेंगलुरू के एसआरएच लेआउट निवासी हर्ष कपूर पत्नी भव्या के साथ एक अक्टूबर 2020 को उत्तराखंड के नैनीताल में भ्रमण पर आए थे। अपने साथ वे दो पालतू बिल्लियों को भी लाए थे। इन बिल्लियों का नाम लियो और कोको है। उन्हें बिल्लियों से इतना प्यार है कि जब भी वे कहीं जाते हैं, तो उन्हें साथ लेकर चलते हैं। नैनीताल में वे हल्द्वानी रोड सूर्यजाला स्थित बलौट रिजॉर्ट में ठहरे हुए थे। तीन अक्टूबर को चेक आउट करने से ठीक पहले उनकी एक पालतू बिल्ली कोको अचानक गायब हो गई।
जब बिल्ली काफी तलाशने के बाद भी नहीं मिली तो उन्होंने चार दिन और नैनीताल में रुकने का मन बनाया। इस दौरान गांव और समीपवर्ती जंगल में बिल्ली को तलाशने में ग्रामीणों की भी मदद ली गई। काफी तलाशने के बाद भी जब बिल्ली नहीं मिली तो वह निराश वापस लौट गए।


वापस लौटने के बाद भी वे ग्रामीणों के संपर्क में रहे। कुछ दिन पहले एक युवक गोविंद कुमार को गांव के समीप बिल्ली दिखी तो उसने रिजॉर्ट स्वामी विकास किरौला को इसकी सूचना दी। इस पर उन्होंने हर्ष कपूर को फोन किया। सूचना पाते ही वह बीते 24 जनवरी को फ्लाइट पकड़कर सीधा उनके रिजॉर्ट आ पहुँचे।
इसके बाद भी बिल्ली थी कि किसी को तलाशने पर भी नजर नहीं आ रही थी। बुधवार की सुबह उन्हें सफलता मिली और एक ग्रामीण ने गांव के निकट पुराने भवन में बिल्ली को देखा। इसे पकड़ने में उन्हें सफलता मिल गई।
बिल्ली स्वामी हर्ष के मुताबिक चार वर्ष पूर्व दोनों ही बिल्लियों ने उनके घर पर ही जन्म लिया था। जिस कारण उनसे पारिवारिक सदस्य की तरह लगाव हो गया था। बिल्ली की तलाश में फ्लाइट, टैक्सी, होटल और खाने में करीब पौने दो लाख रुपये अधिक खर्च हो गया। कोको को पाकर हर्ष और उनकी पत्नी बंगलुरू को रवाना हो गए। उन्होंने ग्रामीणों के साथ ही रिजॉर्ट स्वामी और कर्मचारियों का आभार जताया है।

पढ़ें: बेजुबान को भी था मातृभूमि से प्यार, बचपन याद आते ही भाग खड़ा होता घर से (जारी से आगे)

Bhanu Bangwal

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

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