Loksaakshya Social

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

January 9, 2026

युवा जलवायु वैज्ञानिकों को सशक्त बनाने की पहल, अध्ययन कार्यक्रम उत्तराखंड के 50 विद्यालयों से शुरू

स्कूल शिक्षा विभाग, उत्तराखंड एवं वैज्ञानिकों की संस्था (SPECS) के संयुक्त तत्वावधान में उत्तराखंड के तीन स्कूलों में युवा जलवायु वैज्ञानिकों को सशक्त बनाने की पहल आरंभ की गई। आईएसआरओ भूवन आधारित जलवायु अध्ययन कार्यक्रम में उत्तराखंड के 50 विद्यालयों को चयनित किया गया है। इन तीन दिवसीय कार्यशालाओं का विषय डिजिटल मौसम निगरानी यंत्र निर्माण एवं उसके अनुप्रयोग रहा। इन कार्यशालाओं के आयोजन में प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार एवं ISRO का तकनीकी सहयोग रहा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इन स्थानों पर संपन्न की गई कार्यशालाएं
1.दिल्ली पब्लिक स्कूल, रुद्रपुर, जिला उधमसिंह नगर।
2.राजकीय इंटर कॉलेज, खुमाड़ (सुल्त ब्लॉक), अल्मोड़ा।
3. राजकीय इंटर कॉलेज, धूमाकोट (नैनीडांडा ब्लॉक), पौड़ी गढ़वाल।
कार्यशालाओं के बारे में
यह कार्यक्रम उत्तराखंड के 50 चयनित विद्यालयों में जलवायु परिवर्तन के वैज्ञानिक अध्ययन को बढ़ावा देने तथा छात्रों को उपग्रह आधारित तकनीकों का प्रशिक्षण देने की राज्यव्यापी पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस पहल के अंतर्गत विद्यालयों की कक्षाओं को स्कूल क्लाइमेट रिसर्च लैब्स के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहाँ छात्र आईएसआरओ के भूवन पोर्टल की सहायता से पर्यावरणीय डाटा का विश्लेषण कर सकेंगे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

 

मौसम विज्ञान संबंधी जागरूकता पर जोर
छह दिसंबर को रुद्रपुर में कार्यशाला का उद्घाटन दिल्ली पब्लिक स्कूल, रुद्रपुर के प्रधानाचार्य चेतन चौहान ने, सल्ट ब्लॉक में राइंका खुमाड़ के प्रधानाचार्य हुकम सिंह ने तथा नैनीडांडा में राआइंका धूमाकोट के प्रधानाचार्य आनंद सिंह बिष्ट ने किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड भौगोलिक रूप से अत्यंत संवेदनशील राज्य है। इसलिए मौसम विज्ञान संबंधी जागरूकता जीवन एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है। कार्यशाला में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के विशेषज्ञ राघव शर्मा एवं सचिन शर्मा ने तीन दिनों तक शिक्षकों एवं छात्रों को प्रशिक्षण प्रदान किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

प्रशिक्षण के विषय
•डिजिटल मौसम निगरानी यंत्र का डिजाइन एवं असेंबली
•यंत्रों के फील्ड-आधारित अनुप्रयोग
•ISRO Bhuvan App की जलवायु एवं भू-डाटा विश्लेषण
कार्यशाला के उपरांत प्रत्येक विद्यालय को एक डिजिटल मौसम निगरानी यंत्र उपलब्ध कराया जाएगा, जिसके माध्यम से छात्र एक वर्ष तक स्थानीय पर्यावरणीय डाटा संकलित कर उसे ISRO के साथ साझा करेंगे। SPECS के प्रतिनिधि शंकर दत्त ने बताया कि रुद्रपुर की कार्यशाला में ब्लॉक से लगभग 20 विद्यालयों के विज्ञान शिक्षक एवं छात्र प्रतिभागी रहे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

छात्रों को सिखाया गया भूवन प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग
• भू-उपयोग एवं वनस्पति परिवर्तन की निगरानी
• जल संसाधनों का मानचित्रण
• जलवायु एवं भौगोलिक जोखिम विश्लेषण
• बुनियादी GIS अनुप्रयोग
• उपग्रह डाटा की तुलना स्थलीय मापों के साथ
पर्यावरण मॉनिटरिंग यंत्र (EMD) निर्माण प्रशिक्षण
STEM आधारित प्रायोगिक शिक्षा को सशक्त करने के उद्देश्य से छात्रों को स्कूल-स्तरीय Environmental Monitoring Device (EMD)—एक लघु मौसम स्टेशन—बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

ये यंत्र किए गए शामिल
• तापमान, आर्द्रता एवं वायुदाब सेंसर
• वर्षामापक
• गैस/एयर-क्वालिटी सेंसर
• ESP8266 माइक्रोकंट्रोलर
• 3D-प्रिंटेड सुरक्षात्मक बॉडी
• बैटरी/एडॉप्टर आधारित ऊर्जा आपूर्ति
-स्थापित होने के बाद यह यंत्र वास्तविक समय में पर्यावरणीय डेटा रिकॉर्ड करेगा, जिसे छात्र उपग्रह डाटा के साथ तुलना कर वैज्ञानिक अध्ययन करेंगे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

 

मुख्य शैक्षणिक लाभ
• STEM कौशल विकास: इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर एकीकरण, कोडिंग एवं डाटा विश्लेषण
• जलवायु जागरूकता: स्थानीय व वैश्विक पर्यावरणीय परिवर्तनों की समझ
• अनुसंधान प्रवृत्ति: अवलोकन, रिकॉर्डिंग एवं वैज्ञानिक विश्लेषण
• सामुदायिक उपयोगिता: किसान, स्थानीय प्रशासन और पर्यटन सेक्टर हेतु उपयोगी डाटा (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

राज्यव्यापी ‘यंग सिटिजन साइंटिस्ट’ नेटवर्क
राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त विज्ञान संप्रेषक एवं नवोन्मेषक के साथ ही स्पैक्स के अध्यक्ष डॉ. बृज मोहन शर्मा के मुताबिक, उत्तराखंड के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में स्थापित ये यंत्र एक सशक्त जलवायु डाटा नेटवर्क का निर्माण करेंगे। विद्यालय सक्रिय क्लाइमेट ऑब्जर्वेशन सेंटर के रूप में कार्य करेंगे, जिससे छात्र वास्तविक जलवायु संरक्षण अभियानों में सहभागी बनेंगे। यह कार्यक्रम उपग्रह तकनीक और छात्र-नेतृत्व वाली विज्ञान शिक्षा का प्रेरणादायी संगम है। डेटा आधारित जलवायु समझ विकसित कर हम भविष्य के इनोवेटर्स और पर्यावरण नेताओं को तैयार कर रहे हैं। कार्यशाला में शामिल 50 विद्यालयों में मौसम मापन यंत्र स्थापित कर दिए गए हैं, जिनसे विद्यार्थी एवं शिक्षक प्रतिदिन पर्यावरणीय डाटा एकत्र करेंगे।
नोटः सच का साथ देने में हमारा साथी बनिए। यदि आप लोकसाक्ष्य की खबरों को नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए आप्शन से हमारे फेसबुक पेज या व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ सकते हैं, बस आपको एक क्लिक करना है। यदि खबर अच्छी लगे तो आप फेसबुक या व्हाट्सएप में शेयर भी कर सकते हो। यदि आप अपनी पसंद की खबर शेयर करोगे तो ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी। बस इतना ख्याल रखिए।

Bhanu Bangwal

लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *