सीएम के लिए हरीश रावत की छटपटाहट जारी, अपने पक्ष में माहौल के प्रयास, आज देंगे नींबू माल्टे की पार्टी
यूं तो उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत विभिन्न उत्तराखंडी उत्पादों और फलों की पार्टी देते आए हैं, अब एक बार फिर वह इस पार्टी के बहाने अपने समर्थकों को जुटाने के प्रयास करते नजर आएंगे।
यूं तो उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत विभिन्न उत्तराखंडी उत्पादों और फलों की पार्टी देते आए हैं, अब एक बार फिर वह इस पार्टी के बहाने अपने समर्थकों को जुटाने के प्रयास करते नजर आएंगे। कारण ये है कि उत्तराखंड में विधानसभा चुनावों के लिए हुए मतदान के बाद से ही उन्हें एक एक दिन काटना मुश्किल प्रतीत हो रहा है। वह चुनाव नतीजों का बेसब्री के इंतजार कर रहे हैं। साथ ही वह चाह रहे हैं कि उन्हें सीएम पद का चेहरा घोषित कर दिया जाए। वहीं, कांग्रेस में सीएम के दावेदारों की अच्छी खासी संख्या है।अभी मतगणना होने में कुछ दिन बाकी है। 10 मार्च को सभी प्रत्याशियों की किस्मत का पिटारा खुलेगा। ये भी जरूरी नहीं कि कौन जीतेगा और कौन हार का स्वाद चखेगा, ये सबको पता हो। क्योंकि चुनावों में मतगणना से पहले किसी के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। इसके बावजूद कांग्रेस मान कर चल रही है कि इस बार के चुनाव में कांग्रेस की जीत पक्की है। कांग्रेस के साथ ही हरीश रावत की छटपटाहट भी बढ़ती जा रही है। पिछले छह माह पूर्व से जो सीएम के चेहरे का राग उन्होंने अलापा, वह फिर से शुरू कर दिया है।
इसके लिए वह कार्यकर्ताओं के बीच जा रहे हैं और खुद को सीएम बनाने की पैरवी कर रहे हैं। घोषणाएं कर रहे हैं। इसी कड़ी में आज उन्होंने कांग्रेस मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को नींबू, सन्नी पार्टी के लिए आमंत्रित किया है। नींबू माल्टे के स्वाद के साथ ही वह अपने पक्ष में माहौल बनाने के प्रयास में जुटे हैं। पंजाब में सिद्धू की तरह ही उत्तराखंड में हरीश रावत सीएम पद की दावेदारी को लेकर अक्सर चर्चाओं में रहते हैं। चुनाव से पूर्व भी पार्टी हाईकमान ने साफ कह दिया था कि मतदान के बाद कांग्रेस जीतती है, तब ही चेहरे को लेकर फैसला होगा।
उत्तराखंड में कांग्रेस के पास हरीश रावत के साथ ही प्रीतम सिंह, गोविंद सिंह कुंजवाल, पूर्व मंत्री नवप्रभात, हीरा सिंह बिष्ट और यशपाल आर्य जैसे कई प्रमुख नेता हैं, जो मुख्यमंत्री पद के लिए चेहरे हो सकते हैं। इसलिए कांग्रेस को नेतृत्व का कोई संकट नहीं है। फैसला हाईकमान को करना है। ऐसे में अपनी वकालत हाईकमान से करने की बजाय हरीश रावत मीडिया के जरिये वकालत करते नजर आते हैं। वह ये भी जानते हैं कि एक बार सोनिया गांधी ने कार्यसमिति की बैठक में स्पष्ट संदेश दिया था कि जो कुछ कहना है पार्टी फोरम में कहो। मुझसे बात करो। इसके बावजूद वह अपनी छटपटाहट नहीं रोक पा रहे हैं। उनसे मतगणना तक इंतजार भी मुश्लिक होता दिख रहा है।
पंजाब में तो जब सिद्धू बार बार पार्टी आला कमान के लिए सिरदर्द बने तो चन्नी को ही राहुल गांधी को सीएम के चेहरा घोषित करना पड़ा। वहीं, अब हरीश रावत भी गाहे बगाहे सीएम की रट लगाने लगते हैं। मीडिया में इन दिनों खबरें हैं कि हाल ही में खुद को सीएम का चेहरा बनाने का दबाव बना रहे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के तेवर नरम पड़े हैं। उन्होंने इसका फैसला हाईकमान पर छोड़ दिया है। उनकी ओर से फैसला छोड़ने या ना छोड़ने से क्या होता है। ये तो साफ है कि सिर्फ हाईकमान ही इस बारे में फैसला लेगा। फिर चाहे हरीश रावत फैसला हाईकमान पर छोड़ने की बात कहें या फिर कुछ दूसरी बात। हरीश रावत ने कहा कि हम सोनिया गांधी से सीएम का चेहरा घोषित करने की मांग करेंगे। हरीश रावत ने ये भी कहा कि उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार बननी जा रही है।
उत्तराखंड में चुनाव के बाद पूर्व सीएम हरीश रावत अपने विधानसभा में सर्वाधिक सक्रिय हैं। वह मतदान के बाद भी चुनावी वादे किए जा रहे हैं। सरकार बनी तो फलां योजना, पेंशन आदि लागू करने की बात कह रहे हैं। साथ ही ईवीएम में छेड़छाड़ आदि के बयानों से लगातार भाजपा पर हमलावर भी हैं। ऐसे लग रहा अभी वह चुनाव प्रचार की रंगत से बाहर नहीं आए हैं। वह सीएम बनूंगा या फिर घर बैठूंगा, का बयान भी दे चुके हैं।




