शिक्षिका हेमलता बहुगुणा की गढ़वाली कविता-आंख्यूं कू राज

आंख्यूं कू राज
तेरी आंख्यूं कू ढ़ग बडू छ
ड़ुबकी आंख्यूं कू सज बड़ू छ
तेरू………………………
सुख म टबणादी खुशी दिखौदी
दुःख म जाणी कतरा धार बगौंदी
तेरू………………………
दिल का उदगार तू आंख्यूं न बतौंदी
त्यू आंख्यूं बिटिन तू दिल खोली देदी
तेरू……………………….
हिरणी सी आंख्यी तेरी मन मोह लेदी
मन कू मयालूपन आंख्यूंन खोली देदी
तेरू……………………………
डुबकी आंख्यूं देखिक मर मिटिगैं
घर बार छोड़िक मैं जोगी बणिगैं
तेरू…………………………..
कवयित्री का परिचय
नाम-हेमलता बहुगुणा
पूर्व प्रधानाध्यापिका राजकीय उच्चतर प्राथमिक विद्यालय सुरसिहधार टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड।



