गर्मी में बढ़ी ऊर्जा की खपत, बिजली संकट से जूझ रहा देश, उत्तराखंड में किए जा रहे ये उपाय, जनता से की गई अपील
देश भर में कोयला संकट पैदा होने से बिजली के प्लांट सुचारु रूप से नहीं चल पा रहे हैं। वहीं, गर्मियों में बिजली की मांग बढ़ने के साथ ही ऊर्जा का संकट पैदा हो गया है।
देश भर में कोयला संकट पैदा होने से बिजली के प्लांट सुचारु रूप से नहीं चल पा रहे हैं। वहीं, गर्मियों में बिजली की मांग बढ़ने के साथ ही ऊर्जा का संकट पैदा हो गया है। उत्तराखंड में इस संकट से निपटने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही ऊर्जा निगम ने प्रदेश की जनता से भी अपील की है कि बिजली का दुरुपयोग न करें। फिजूलखर्ची से बचकर ही प्रदेश को ऊर्जा संकट से बचाया जा सकता है।उत्तराखंड उत्तराखण्ड पावर कारपोरेशन लि. के प्रबंध निदेशक अनिल कुमार के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय संकट के कारण गैस एवं कोयले के दामों में अप्रत्याशित वृद्धि एवं अत्यधिक तापमान के कारणों से विद्युत की मांग एवं उपलब्धता में भारी अंतर आ रहा है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में आज एक मई को विद्युत की कुल अनुमानित मांग 45.47 मिलीयन यूनिट के विरूद्ध अधिकतर समय में पूर्ण उपलब्ता पूर्ण रही है। इसके दृष्टिगत आज शाम छह बजे तक प्रदेश में कोई रोस्टरिंग नहीं की गई है।
उन्होंने कहा कि मौसम में कुछ परिवर्तन का रुख दिख रहा है। इससे मांग में मामूली कमी दर्ज किये
जाने की उम्मीद है। इसके दृष्टिगत कल दो मई को विद्युत की कुल अनुमानित मांग 46.24 मिलीयन यूनिट के विरूद्ध राज्य एवं केन्द्रीय पूल से कुल विद्युत की उपलब्धता लगभग 33 मि.यू. है। इस प्रकार विद्युत की उपलब्धता में कुल कमी 12.78 मि.यू. है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को सुचारु विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराये जाने के उद्देश्य से एनर्जी एक्सचेंज के माध्यम से 12.07 मि.यू. विद्युत क्रय कर प्राविधानित की गयी है।
इसके पश्चात मांग तथा उपलब्धता में 1.12 मि.यू. का अन्तर शेष है। प्रबन्ध निदेशक अनिल कुमार ने प्रदेश की जनता के साथ-साथ सभी सरकारी एवं गैर सरकारी कार्यालयों के विभागाध्यक्षों से घरों एवं कार्यालयों में यथासम्भव विद्युत का बचत के साथ प्रयोग करते हुए राष्ट्रहित एवं प्रदेश हित में अपना सहयोग प्रदान करने अपील की है। अनिल कुमार ने यह भी बताया कि अन्य राज्यों की तुलना में उत्तराखंड राज्य में रोस्टरिंग अत्यन्त कम की जा रही है, किन्तु एनर्जी एक्सचेंज विद्युत की अधिक दरों एवं पर्याप्त उपलब्धता न होने के दृष्टिगत विद्युत का बचत का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।




