सरकार की नई शिक्षा नीति के चलते 70 फीसद छात्र सरकारी कॉलेजों में प्रवेश से वंचित, यूकेडी करेगी आंदोलन
उत्तराखंड क्रांति दल ने आरोप लगाया कि सरकार की नई शिक्षा नीति की खामियों के चलते उत्तराखंड में 70 फीसद गरीब छात्र सरकारी कॉलेजों में प्रवेश से वंचित हो रहे हैं। निजी कॉलेजों में एडमिशन लेकर भारी भरकम फीस देना ऐसे छात्रों के अभिभावकों की स्थिति नहीं है। यूकेडी ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द कोई समाधान नहीं निकाला तो छात्रों के भविष्य के सवाल पर यूकेडी आंदोलन के लिए बाध्य होगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
देहरादून स्थित उक्रांद के केंद्रीय कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में केंद्रीय उपाध्यक्ष बहादुर सिंह रावत ने कहा कि जहां एक और उत्तराखंड राज्य के प्राइवेट विश्वविद्यालयों में धड़ल्ले से दाखिले हो रहे हैं, वहीं गढ़वाल विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में छात्रों का अकाल पड़ा हुआ है। देहरादून में डीएवी, डीबीएस, एमपीजी मसूरी, एसजीआरआर, एमकेपी, राठ पौड़ी जैसे अनेकों महाविद्यालय हैं, जो सरकार की गलत नीतियों के कारण खाली पड़े हुए हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि इस बार एडमिशन के लिए सीयूईटी की बाध्यता कर दी गई। इन महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए यूजीसी की ओर से जो सीयूईटी की परीक्षा कराई गई। इसकी जानकारी अधिकांश छात्रों को थी ही नहीं। इस वजह से इन कॉलेजों में 25 फीसद भी एडमिशन नहीं हो पाए हैं। यह सभी महाविद्यालय उत्तराखंड के सबसे पुराने कॉलाजे हैं। यहां पर फीस भी प्राइवेट कॉलेजों के मुकाबले नगण्य है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि सरकार की इस गलत नीति की वजह से उत्तराखंड के छात्र-छात्राएं अपने को बहुत ही ठगा महसूस कर रहे हैं। जिनके पास तो पैसा है, वह तो प्राइवेट कॉलेजों में प्रवेश ले रहे हैं, किंतु गरीब दाखिले से वंचित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी नई नीति को लागू करने से पहले उसके विषय में सोच विचार किया जाना चाहिए थे। शिक्षा का अधिकार हमारा मौलिक अधिकार है। उससे छात्र-छात्राओं को वंचित नहीं किया जा सकता है। सरकार को तुरंत इस पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि जल्द सरकार ने इस संबंध में निर्णय नहीं किया और समाधान नहीं निकाला तो यूकेडी आंदोलन को बाध्य होगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
कार्यकारी जिला अध्यक्ष किरण रावत कश्यप ने कहा कि जहां एक और इस महीने में इन सभी महाविद्यालय में दाखिले के लिए भीड़भाड़ रौनक होती थी, वही इस नीति की वजह से सारे महाविद्यालय सुनसान पड़े हुए हैं। यह छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ सीधा-सीधा खिलवाड़ है। इस पर तत्काल पुनर्विचार किया जाना चाहिए। अन्यथा उत्तराखंड क्रांति दल उग्र आंदोलन करने को बाध्य होगा। प्रेस वार्ता में केंद्रीय महामंत्री विजय बौराई, महानगर अध्यक्ष विजेंद्र रावत, केंद्रीय प्रचार सचिव अशोक नेगी, धर्मेंद्र नेगी, राजेंद्र प्रधान आदि पदाधिकारी उपस्थित थे।
नोटः सच का साथ देने में हमारा साथी बनिए। यदि आप लोकसाक्ष्य की खबरों को नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए आप्शन से हमारे फेसबुक पेज या व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ सकते हैं, बस आपको एक क्लिक करना है। यदि खबर अच्छी लगे तो आप फेसबुक या व्हाट्सएप में शेयर भी कर सकते हो।

Bhanu Prakash
लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
भानु बंगवाल
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


