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February 5, 2026

स्मार्ट सिटी तो नहीं बन पाया दून, लेकिन कचरे के ढेर जरूर लग गए

कहीं सड़क ऊर्जा निगम ने खोद डाली और मरम्मत नहीं हुई। कहीं सीवर लाइन बिछाने के लिए तो कभी पेयजल लाइन बिछाने के लिए स्मार्ट सिटी की सड़कें खुदी पड़ी हैं। पिछले कई साल से इसी तरह की समस्या है। कई महत्वपूर्व स्थानों पर सड़क किनारे फुटपाथ तक नहीं हैं। रही सफाई व्यवस्था, इसमें भी उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्मार्ट नहीं बन पाई है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

स्मार्ट सिटी के नाम पर जितना हल्ला और प्रचार किया गया, उस हिसाब से इसका आधा काम भी देहरादून में नहीं हो पाया है। विभिन्न स्थानों पर कचरे के ढेर लोगों को परेशान कर रहे हैं। शहर को स्मार्ट बनाने के लिए गली, मोहल्लों और मुख्य सड़कों के किनारे से कूड़ाघर या कूड़ादान हटा दिए गए। तर्क ये दिया गया कि घर घर कचरा उठाने की गाड़ी जाएगी और लोग उसी में कचरा डालेंगे। ऐसे में सड़कों के किनारे कचरे के ढेर नहीं लग पाएंगे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

घर घर कचरा उठान की व्यवस्था इसलिए ढर्रे पर नहीं आ पाई है, क्योंकि वाहन का मोहल्लों में पहुंचने का समय तय नहीं है। यदि किसी परिवार में बड़े नौकरी पेशा वाले हों और बच्चे स्कूल जाते हैं, तो ऐसे लोगों के साथ दिक्कत ये है कि वे कचरे के वाहन में कब और कैसे कूड़ा डालेंगे। क्योंकि कभी कचरा वाहन सुबह नौ बजे तो कभी पूर्वाह्न 11 बजे या फिर दोपहर बाद ही मोहल्लों में नजर आता है। ऐसे में लोग उन स्थानों पर चुपचाप कूड़ा फेंक देते हैं, जहां पहले कूड़ादान थे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इसी बात से परेशान होकर देहरादन में ओंकार रोड निवासी एवं समाजसेवी जगमोहन मेंदीरत्ता ने अब इस मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से गुहार लगाई। उन्होंने कहा कि देहरादून को कूड़ा मुक्त करने के अभियान के तहत शहर के कई कूड़ा घरो को बंद कर दिया गया था। नेशविल्ला रोड पर भी 60 वर्ष से सड़क पर कूड़ा घर बना हुआ था। उसे भी बंद कर घर घर से कूड़ा उठाने का कार्य किया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था पर क्षेत्र के लोगों ने सरकार का धन्यवाद भी किया। अब स्थिति ये है कि जहां कूड़ादान था, उस स्थान पर लोगों के साथ ही नगर निगम के सफाई कर्मचारी भी कचरा डाल रहे हैं। ऐसे में उक्त स्थान से गुजरने वाला नाला भी चोक होना शूरू हो गया है। साथ ही क्षेत्र में स्कूल भी है और इसका बुरा प्रभाव बच्चों के स्वास्थ्य पर भी पड़ेगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

जगमोहन मेंदीरत्ता ने सीएम धामी को अवगत कराया कि 21 जनवरी को दून सिटिज़न फोरम कि बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों से संवाद किया गया था। उस दौरान भी कचरे की समस्या उठाई गई थी। तब नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर अविनाश खन्ना ने कूड़ा डालने वालो पर आर्थिक दंड लगाने की बात कही थी। साथ ही सीसी टीवी से निगरानी कि बात कहने के बावजूद आज तक इसकी व्यवस्था नहीं की गई। उन्होंने सीएम से मांग की है कि शहर को सुंदर और स्वच्छ बनाने के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए जाएं।
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Bhanu Bangwal

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

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