Loksaakshya Social

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

February 1, 2026

धामी सरकार के धर्मांतरण कानून में नहीं कोई दम, सिर्फ सांप्रदायिक शोर: गरिमा मेहरा दसौनी

उत्तराखंड की धामी सरकार द्वारा बड़े शोर-शराबे के साथ लाए गए धर्मांतरण विरोधी कानून की सच्चाई अब अदालतों के फैसलों के बाद पूरी तरह उजागर हो चुकी है। सरकार ने जिस कानून को “सख्त” और “ऐतिहासिक” बताकर जनता के बीच डर और भ्रम का माहौल बनाया, वह पूरी तरह खोखला साबित हुआ है। यह कहना है उत्तराखंड कांग्रेस की नेत्री एवं प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी का। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इस मामले में धामी सरकार को घेरते हुए उत्तराखंड कांग्रेस की नेत्री गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा कि सरकारी आंकड़े ही इस बात की गवाही दे रहे हैं कि धर्मांतरण के अब तक दर्ज 62 मामलों में से मात्र पांच मामले ही पूर्ण सुनवाई तक पहुंचे। इन सभी पांच मामलों में आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया। यह तथ्य धामी सरकार के ढुलमुल रवैये, कमजोर जांच और गैर-जिम्मेदाराना कानून व्यवस्था को स्पष्ट रूप से उजागर करता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने कहा कि अगर वाकई उत्तराखंड में जबरन या संगठित धर्मांतरण जैसी कोई गंभीर समस्या थी, तो फिर एक भी मामला साबित क्यों नहीं हो पाया? क्या पुलिस और अभियोजन को जानबूझकर कमजोर रखा गया, या फिर यह पूरा कानून केवल सांप्रदायिक तुष्टिकरण और राजनीतिक ध्रुवीकरण का औजार था? (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

कांग्रेस नेत्री दसौनी ने आरोप लगाते हुए कहा कि धामी सरकार ने इस कानून का इस्तेमाल न्याय सुनिश्चित करने के लिए नहीं, बल्कि समाज को बांटने, एक वर्ग विशेष को डराने और चुनावी लाभ लेने के लिए किया। नतीजा यह हुआ कि कानून का सम्मान भी नहीं बचा और न्याय व्यवस्था पर भी अनावश्यक दबाव डाला गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने कहा कि धामी सरकार जनता को बताए कि जब एक भी दोष सिद्ध नहीं हुआ, तो इस कानून का औचित्य क्या था? कमजोर मामलों और फर्जी प्रचार के लिए जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या उत्तराखंड को प्रयोगशाला बनाकर सांप्रदायिक राजनीति की जा रही है? गरिमा ने कहा कि उत्तराखंड की जनता अब सच समझ चुकी है। धामी सरकार का धर्मांतरण कानून कानून कम, राजनीतिक तमाशा ज़्यादा साबित हुआ है।
नोटः सच का साथ देने में हमारा साथी बनिए। यदि आप लोकसाक्ष्य की खबरों को नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए आप्शन से हमारे फेसबुक पेज या व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ सकते हैं, बस आपको एक क्लिक करना है। यदि खबर अच्छी लगे तो आप फेसबुक या व्हाट्सएप में शेयर भी कर सकते हो। यदि आप अपनी पसंद की खबर शेयर करोगे तो ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी। बस इतना ख्याल रखिए।

Bhanu Bangwal

लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *