कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने बुलाई सर्वदलीय बैठक, सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ होगी सामूहिक लड़ाई, ये दल रहे मौजूद
उत्तराखंड कांग्रेस मुख्यालय देहरादून में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा के आह्वान पर एक सर्वदलीय बैठक का आयोजन किया गया। करण माहरा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में तय किया गया कि सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ सामूहिक लड़ाई लड़ी जाएगी।
उत्तराखंड कांग्रेस मुख्यालय देहरादून में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा के आह्वान पर एक सर्वदलीय बैठक का आयोजन किया गया। करण माहरा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में तय किया गया कि सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ सामूहिक लड़ाई लड़ी जाएगी। बैठक का संचालन सर्वदलीय समिति के समन्वयक सूर्यकांत धस्माना नें किया।बैठक के दौरान प्रदेश के महत्वपूर्ण एवं जनसरोकारों से जुड़े हुए मुद्दों पर गहन चिंतन मंथन हुआ। सभी ने प्रदेष के वर्तमान परिदृश्य पर चिंता जाहिर की। सभी उपस्थित लोगों का मत था की एक कॉमन मिनिमम प्रोग्राम को लेकर सभी दलों को अग्रसर होना होगा। प्रदेश के बिगड़ते हुऐ सौहार्द एवं कम्यूनल पोलोराईजेशन को लेकर भी चिंता व्यक्त की गयी।
बैठक में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए गये। इस दौरान सर्वदलीय समिति का गठन किया गया। इसका सर्वसम्मति से उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष करन माहरा को बतौर अध्यक्ष नियुक्त किया गया। निर्णय लिया गया कि हर माह सर्वदलीय समिति की बैठक की जायेगी। इसमें भविष्य के ऐजेंडे एवं रणनिति पर विचार विमर्श किया जाऐगा। आगामी बैठकों में हर दल से और अधिक लोगों को प्रतिनिधित्व देनें पर विचार हुआ।
साथ ही तय किया गया कि ऐसे दल जो की धर्म निरपेक्षता में विश्वास रखते हों और सत्तारूढ़ दल की जनविरोधी नितियों के खिलाफ संघर्ष में शामिल होना चाहते हैं, ऐसे दलों और व्यक्तियों को खुले दिल से सर्वदलीय समिति नें आमंत्रित किया जाएगा। समिति की ओर से फैसला लिया गया कि जल्द ही राज्यपाल से मुलाकात कर एक सर्वदलीय ज्ञापन सौंपा जाऐगा। इसमें प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों पर हस्तक्षेप करनें का निवेदन किया जाऐगा।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि सर छुपानें के लिये एक अदद छत, घर का अधिकार सभी का है। ऐसे में यदि सरकार गरीबों को आवास मुहैया नहीं करा पा रही है तो किसी का घर उजाड़ा भी ना जाए। इसके तहत सर्वदलीय समिति ने यह निर्णय लिया की मलिन बस्तियों के नियमितिकरण की लड़ाई सामूहिक रूप से लड़ी जायेगी। समिति की बैठक के दौरान इस बात पर भी चिंता व्यक्त की गयी कि सरकार की जनविरोधी नितियों के खिलाफ प्रदर्शन करने का अधिकार विपक्षी दलों को संविधान ने दिया है, लेकिन सरकार आज अपने खिलाफ मुखर हो रही हर आवाज का दमन कर देना चाहती है।
कहा गया कि राज्य सरकार ने विपक्षी दलों के प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगा दिया है। मुख्यमंत्री आवास हो या राजभवन। किसी भी विपक्षी दल को कूच या घेराव करने की अनुमति नहीं है। न्यू कैंट रोड़ में लगी धारा 144 का समिति नें पुरजोर विरोध करते हुए कहा की धारा 144 किसी भी क्षेत्र में स्थाई रूप से नहीं लगाई जा सकती। इस तरह का प्रतिबंध लोकतंत्र एवं अभिव्यक्ति की आजादी का खुला उलंघन है।
समिति नेंराज्य की आर्थिक स्थिति, सामाजिक तानें बानें और आंतरिक सुरक्षा पर भी चर्चा की। सभी ने एक स्वर में इस बात को माना की आज देश एवं प्रदेश में अघोषित इमरजेंसी लगी हुयी है। बुलडोजर का डर दिखाकर गरीब जनता को डराया व धमकाया जा रहा है। सभी दल के प्रमुखों नें अग्निपथ योजना को प्रदेश एवं देश के लिए विनाशकारी एवं आत्मघाती बताते हुए विरोध किया और कहा की यह योजना देश के करोड़ों युवाओं के सपनों को रौंदनें जैसी है।
समिति के अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि भारत की नींव धर्मनिरपेक्षता पर टिकी हुयी है। हमें कतई अपनीं इस विचारधारा से समझौता नहीं करना है। मंहगाई पर भी समिति नें चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आमजन का ऐजेंडा ही समिति का ऐजेंडा होगा। आज वक्त की मांग है कि सभी विपक्षी दल एकजुट होकर परेशान जनता की पीड़ा को साझा करते हुऐ सही समस्याओं को प्लेटफॉर्म पर उठायें।
बैठक के दौरान सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित हुआ कि धार्मिक सद्भाव के प्रति समिति दृढ़ संकल्पित रहेगी। सर्वदलीय समिति की बैठक में प्रमुख रूप से समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष एस सचान, सीपीआई से समर भंडारी, सीपीएम से राजेन्द्र सिंह नेगी, लेखराज, शंकर गोपाल, कांग्रेस की निवर्तमान गढ़वाल मंडल मीडिया प्रभारी गरिमा महरा दसौनी, निवर्तमान महामंत्री नवीन जोशी, मीडिया पैनलिस्ट अमरजीत सिंह, आदि मौजूद थे।



