संवैधानिक संकट का राग अलाप रही है डरी हुई कांग्रेसः कौशिक
उत्तराखंड में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने कहा कि कांग्रेस सल्ट उपचुनाव के बाद डरी हुई है। अब फिजूल बयानबाजी कर रही है।
उत्तराखंड में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने कहा कि कांग्रेस सल्ट उपचुनाव के बाद डरी हुई है। अब फिजूल बयानबाजी कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा की ओर से अभी यह तय नहीं किया गया है कि मुख्यमंत्री कहाँ से चुनाव लड़ेंगे, लेकिन पार्टी में एक दर्जन से अधिक विधायको की और से सीट को लेकर प्रस्ताव हैं। वहीं जिन सीटों को लेकर कांग्रेसी बयानबाजी कर रहे हैं, उन सीटों पर भी कोई संकट नहीं है। यह सब चुनाव आयोग को तय करना है कि कब चुनाव होगा और भाजपा तो हर वक्त तैयार रहती है, क्योंकि उसके पास जनता का समर्थन है।उन्होंने कहा कि पहले सल्ट को 2022 का सेमीफाइनल बताने वाली कांग्रेस चित्त हो चुकी है। अब वह दिन में भी सपने देख रही है। भाजपा संगठन और सरकार फिलहाल कोरोना काल में महज जरुरतमन्दो की सेवा कार्यो में जुटे हैं। क्योंकि सल्ट उप चुनाव ने साफ कर दिया है कि जनता भाजपा के विकास के एजेंडे से खुश है। निश्चित रूप से 2022 में भाजपा पुनः प्रचंड बहुमत के साथ वापसी कर रही है।
गौरतलब है कि कांग्रेस नेता एवं पूर्व मंत्री नवप्रभात ने कहा था कि उत्तराखंड में संवैधानिक संकट पैदा हो गया है। इस पर या तो दोबारा नेतृत्व परिवर्तन होगा, या फिर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य में संवैधानिक संकट पैदा हो रहा है और राज्य में सरकार के नेतृत्व में एक बार फिर बदलाव होगा।
उत्तराखंड में वर्तमान में मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत विधायक नहीं हैं। अपने पद पर बने रहने के लिए, उन्हें 9 सितंबर को छह महीने पूरे होने से पहले विधानसभा का निर्वाचित सदस्य बनना होगा। अब, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 151 ए के तहत, उस स्थिति में उप-चुनाव नहीं हो सकता, जहां आम चुनाव के लिए केवल एक साल बाकी है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि गंगोत्री और हल्दवानी विधानसभा सीटें मौजूदा विधायकों की मौत की वजह से खाली हैं। उन्होंने कहा, ‘उत्तराखंड में दो विधानसभा सीटें खाली हैं। मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल मार्च 2022 में खत्म होगा। इसका मतलब है कि इस विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने में 9 महीने ही बचे हैं। अगर ऐसे देखा जाए तो 9 सितंबर के बाद मुख्यमंत्री पद पर तीरथ सिंह रावत के बने रहने संभव नहीं है। ऐसे मामले में उत्तराखंड में एक बार फिर नेतृत्व में बदलाव किया जाएगा।




