प्राकृतिक रंगों से मनाएं सुरक्षित होली का उल्लास, घर में कर लो तैयार, यहां बता रहे हैं ऐसे रंग बनाने की विधिः डॉ. बृजमोहन शर्मा
होली में बाजार में केमिकलयुक्त रगों की भरमार होती है। प्राकृतिक रंगों के नाम पर भी उसनें खुश्बू के रूप में भी केमिकल्स का इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे रगों से चेहरा कई दिन तक खराब रहता है। साथ ही कई नई बीमारियों को भी न्योता मिल जाता है। त्वचा संबंधी रोगों से बचने के लिए समझदारी ये है कि हम खुद ही क्यों ना प्राकृतिक रंग तैयार कर लें। साथ ही ऐसे उपाय भी कर लें, जिससे अहम खुद के शरीर को सुरक्षित रख सकें। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
आसान और सस्ता तरीका
घर पर प्राकृतिक रंग बनाना आसान, सस्ता और सुरक्षित है। यह न केवल हमारी त्वचा की रक्षा करता है, बल्कि पर्यावरण को भी बचाता है। इस होली रासायनिक रंगों को छोड़कर फूलों और सब्जियों से बने प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें। ऐसे में हमारा संदेश है कि प्राकृतिक रंग अपनाएं – स्वस्थ रहें, पर्यावरण बचाएं। फूलों और सब्जियों से बने रंग होली को बनाएं सुरक्षित और पवित्र है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
पर्यावरण अनुकूल रंगों से होली मनाना समझदारी
सुरक्षित, सस्ते और पर्यावरण अनुकूल रंगों के साथ खुशियों के त्योगार होली को मनाना समझदारी है। होली रंगों का त्योहार है, लेकिन बाज़ार में मिलने वाले रासायनिक रंग कई बार त्वचा, आंखों और बालों के लिए हानिकारक साबित होते हैं। इनसे एलर्जी, खुजली और जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में घर पर बनाए गए प्राकृतिक रंग एक सुरक्षित और बेहतर विकल्प हैं। ये रंग न केवल त्वचा के लिए लाभकारी होते हैं, बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचाते। आइए जानें कि घर पर सूखे और गीले प्राकृतिक रंग कैसे तैयार किए जा सकते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
सूखा रंग बनाने को चुनें सुरक्षित आधार
प्राकृतिक गुलाल बनाने के लिए पहले एक सुरक्षित आधार चुनें। इसके आप कॉर्न फ्लोर, बेसन, अरारोट या मैदा में से एक का चुनाव कर सकते हैं। ये सभी त्वचा के लिए मुलायम और सुरक्षित होते हैं।
हल्दी से पीला रंग
हल्दी में प्राकृतिक एंटीसेप्टिक गुण होते हैं। एक कप कॉर्न फ्लोर या बेसन में एक चम्मच हल्दी मिलाकर अच्छी तरह छान लें। मुलायम और सुगंधित पीला गुलाल तैयार है।
चुकंदर से लाल या गुलाबी रंग
चुकंदर को पतले टुकड़ों में काटकर धूप में अच्छी तरह सुखा लें। सूखने के बाद इसे पीस लें और कॉर्न फ्लोर में मिलाएं। इससे सुंदर गुलाबी या लाल रंग तैयार हो जाता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
हरा रंग
हरा रंग बनाने के लिए पालक, मेहंदी, नीम, धनिया या पुदीना का इस्तेमाल कर सकते हैं। इनकी पत्तियों को छाया में सुखाकर बारीक पीस लें। इसे बेस पाउडर में मिलाकर हरा गुलाल तैयार करें। पुदीना ठंडक और सुगंध देता है, जबकि नीम त्वचा के लिए लाभकारी होता है।
बैंगनी रंग
जामुन के सूखे छिलकों या चुकंदर और नीले फूलों के मिश्रण को सुखाकर पीस लें। इसे बेस पाउडर में मिलाएं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
गेंदा से पीला या नारंगी रंग
गेंदा के फूलों को सुखाकर पीस लें और बेस पाउडर में मिलाएं। आपका पीला या नारंगी रंग तैयार हो जाएगा।
गुलाब से गुलाबी रंग
गुलाब की पंखुड़ियों को सुखाकर पीस लें और कॉर्न फ्लोर में मिलाएं। गुलाब की खुश्बू के साथ इस रंग से होली खेलने का आनंद उठाएं।
गुड़हल से लाल रंग
गुड़हल के फूलों को सुखाकर पीस लें और बेस में मिलाएं।
लाल अंगूर से हल्का बैंगनी रंग
अंगूर के छिलकों को सुखाकर पीस लें और कॉर्न फ्लोर में मिलाएं।
चंदन से हल्का सुगंधित रंग
चंदन पाउडर को बेस पाउडर में मिलाएं। यह त्वचा के लिए अत्यंत लाभकारी और सुगंधित होता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
गीला रंग या रंगीन पानी बनाने की विधि
लाल रंग (चुकंदर)
एक चुकंदर को काटकर एक लीटर पानी में उबालें। ठंडा होने पर छान लें। सुंदर लाल रंग तैयार है।
पीला रंग (हल्दी)
एक चम्मच हल्दी को एक लीटर पानी में अच्छी तरह घोलें।
हरा रंग (पालक, धनिया, पुदीना)
पत्तियों को पीसकर पानी में मिलाएं और छान लें। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
नारंगी रंग
नारंगी रंग बनाने के लिए कई प्राकृतिक विकल्प हैं। गाजर को पानी में उबालें। या फिर संतरे के छिलकों को उबालें या भिगो दें। टेसू (पलाश) के फूल रातभर पानी में भिगो दें। गेंदा के फूल उबालें या भिगो दें।
गुलाबी रंग (गुलाब)
गुलाब की पंखुड़ियों को पानी में भिगो दें।
लाल रंग (गुड़हल)
गुड़हल के फूलों को पानी में उबालें या भिगो दें।
बैंगनी रंग (लाल अंगूर)
अंगूर को पानी में उबालें या पीसकर पानी में मिलाएं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
सावधानियां
•सभी सामग्री पूरी तरह सूखी होनी चाहिए।
•आंखों में रंग जाने से बचाएं।
•बहुत गाढ़ा रंग न बनाएं।
•छोटे बच्चों के लिए हल्के रंगों का प्रयोग करें। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
होली खेलने के दौरान रखें ये ध्यान
1. होली की सुबह शरीर पर नारियल तेल या क्रीम लगाएँ। इससे रंगों में मौजूद हानिकारक रसायन त्वचा में प्रवेश नहीं कर पाएंगे और बाद में रंग आसानी से साफ हो जाएंगे।
2. बालों में अच्छी तरह तेल लगाएँ तथा होंठों पर वैसलीन लगाएँ। इससे रंग बालों और होंठों पर चिपकेंगे नहीं।
3. नाखूनों पर नेल पॉलिश की मोटी परत लगाएँ। इससे नाखून रंगों से सुरक्षित रहेंगे।
4. ऐसे कपड़े पहनें जो शरीर को अधिकतम ढकें। जैसे फुल स्लीव शर्ट या टी-शर्ट, मोजे और पूरे पैर ढकने वाले कपड़े।
5. टोपी या कैप पहनें। इससे बाल सुरक्षित रहेंगे।
6. सनस्क्रीन का प्रयोग करें। धूप और रंग मिलकर “फोटो-टॉक्सिक” प्रतिक्रिया कर सकते हैं।
7. आँखों की विशेष सुरक्षा करें। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
यदि आँख में रंग चला जाए तो तुरंत साफ पानी से धोएँ और जलन बनी रहे तो डॉक्टर से संपर्क करें। धूप के चश्मे का उपयोग करें।
8. कॉन्टैक्ट लेंस का उपयोग न करें। रंगों में मौजूद रसायन लेंस को नुकसान पहुँचा सकते हैं।
9. चेहरे पर रंग पड़ने पर आँखें और होंठ बंद रखें।
10. केवल हर्बल या ऑर्गेनिक रंगों का उपयोग करें। जैसे मेहंदी, हल्दी, चंदन आदि।
11. होली समाप्त होने के बाद ही स्नान करें। बार-बार चेहरा धोने से त्वचा सूखी हो जाती है।
12. गुलाल पहले सूखे हाथ से झाड़ें, फिर पानी से धोएँ।
13. गुनगुने पानी और हल्के साबुन का उपयोग करें। बाद में मॉइस्चराइज़र लगाएँ।
14. यात्रा से बचें। यदि यात्रा करें तो वाहन की खिड़कियाँ बंद रखें। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
भूलकर भी ना करें ऐसा
1. बच्चों और शिशुओं को रासायनिक रंगों से दूर रखें।
2. होली से पहले फेसियल, वैक्सिंग या थ्रेडिंग न करवाएँ।
3. आँख, नाक, कान या घाव पर रंग न लगाएँ।
4. अंडे, मिट्टी या गंदगी का प्रयोग न करें।
5. गीले फर्श पर दौड़ें नहीं, फिसल सकते हैं।
6. सिंथेटिक और खुले रंग न खरीदें।
7. अत्यधिक तले भोजन और मिठाइयाँ न खाएँ।
8. गुलाल को साँस के साथ अंदर न लें।
9. शराब या भांग के नशे में वाहन न चलाएँ।
10. गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएँ भांग से दूर रहें।
लेखक का परिचय
डॉ. बृजमोहन शर्मा उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के निवासी हैं। वह वैज्ञानिकों की संस्था स्पैक्स (SPECS) के अध्यक्ष हैं। वह समय समय पर राज्य की के लोगों के साथ ही छात्र और शिक्षकों को पानी की गुणवत्ता, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता के लिए जागरूक करते रहते हैं। साथ ही मिलावटी सामान की जांच करने के लिए कार्यशालाओं का आयोजन भी करते हैं। ये काम वह पिछले कई दशकों से कर रहे हैं। इसके साथ ही वह होली के प्राकृतिक रंगों को तैयार करने, एलईडी बल्ब बनाने के साथ ही कई विषयों का छात्रों और महिलाओं को प्रशिक्षण भी देते रहते हैं। उनके ऐसे प्रयासों से कई लोग स्वरोजगार से जुड़े हुए हैं। समाज को ऐसा योगदान देने वालों को लोकसाक्ष्य की ओर से साधुवाद।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


