सावधानः चमकदार फल के फेर में होली में मत खा लेना जहर, खाद्य पदार्थों की शुद्धता की भी ऐसे करना पहचान- डॉ. बृजमोहन शर्मा
आज के आधुनिक युग में आम व्यक्ति खाद्य पदार्थ, सब्जियों और फल में क्या खा रहा है, इसके प्रति सचेत रहने की जरूरत है। कहीं ऐसा ना हो कि सेहत बनाने के चक्कर में आप जिन वस्तुओं का सेवन कर हैं, वह जहर हो। चाहे चमकदार फल हों, या फिर सब्जियां, या अन्य खाद्य पदार्थों की शुद्धता की गारंटी को लेकर भी समय समय पर सवाल उठते रहते हैं। फिलहाल होली पर्व हो या फिर अन्य त्योहारी सीजन, आज के आधुनिक युग में बाज़ार की चमक-दमक और आकर्षक पैकेजिंग ने हमारे भोजन के स्वरूप को बदल दिया है। जो फल और खाद्य पदार्थ दिखने में जितने सुंदर और चमकीले लगते हैं, वे हमेशा उतने ही शुद्ध और सुरक्षित हों, यह आवश्यक नहीं है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
अधिक उत्पादन, लंबी दूरी तक परिवहन और अधिक लाभ के कारण कई बार फलों को कृत्रिम रसायनों जैसे कैल्शियम कार्बाइड और एथिलीन से पकाया जाता है। साथ ही खाद्य पदार्थों में मिलावट की जाती है। यह मिलावट केवल स्वाद और गुणवत्ता को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि हमारे शरीर, मन और दीर्घकालिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव डालती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
प्राकृतिक और सात्विक भोजन में केवल पोषक तत्व ही नहीं होते, बल्कि उसमें प्राण शक्ति (Life Energy) भी होती है, जो शरीर और मन दोनों को संतुलित रखती है। इसके विपरीत, रसायनों से युक्त भोजन शरीर को केवल भरता है, पोषण नहीं देता। अतः यह अत्यंत आवश्यक है कि हम अपने दैनिक जीवन में फल और खाद्य पदार्थों की शुद्धता की पहचान करना सीखें। आज आपको शुद्धता की पहचान के ऐसे तरीके बताएंगे, जिसके लिए कोई तामझाम की जरूरत नहीं है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
रंग (Colour) से पहचान
फल की पहचान के लिए उसका रंग जरूर देखें। प्राकृतिक रूप से फल का रंग सामान्यतः थोड़ा uneven होता है। अर्थात कहीं हल्का और कहीं गहरा दिखाई देता है। यह बहुत अधिक चमकीला नहीं होता और उसमें प्राकृतिक softness होती है। इसके विपरीत, chemical से पकाए गए फल का रंग एक समान चमकीला पीला या लाल होता है, जो देखने में अत्यधिक आकर्षक और अस्वाभाविक लगता है। ऐसे फल बाहर से पके हुए दिखाई देते हैं, परंतु अंदर से कच्चे और सख्त हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, कार्बाइड से पकाया गया आम बाहर से सुंदर पीला दिखाई देगा, लेकिन जब उसे काटा जाएगा तो अंदर से वह सख्त और हल्का सफेद हो सकता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
पानी में डालकर जांच (Water Test)
यह एक सरल और प्रभावी घरेलू विधि है। एक बर्तन में पानी लें और उसमें फल डालें। प्राकृतिक फल सामान्यतः धीरे-धीरे नीचे बैठ जाता है, जबकि chemical coating या wax coating वाले फल पानी में तैर सकते हैं। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि chemical coating फल की सतह को बदल देती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
कपड़े या tissue से रगड़कर देखें
फल को सफेद कपड़े या tissue से हल्के से रगड़ें। यदि tissue पर रंग लग जाता है, तो यह संकेत है कि फल पर artificial dye या chemical coating का उपयोग किया गया है। यह परीक्षण विशेष रूप से सेब, आम और संतरे पर उपयोगी है।
गंध (Smell Test)
प्राकृतिक फल में हल्की, मीठी और प्राकृतिक खुशबू होती है, विशेषकर उसके डंठल (stem) के पास। इसके विपरीत, chemical से पकाए गए फल में या तो कोई गंध नहीं होती या कभी-कभी उसमें अजीब chemical जैसी गंध हो सकती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
छिलके को खुरचकर जांच (Scratch Test)
फल के छिलके को नाखून से हल्का खुरचें। यदि उस पर wax coating होगी, तो सफेद या पारदर्शी परत निकल सकती है। प्राकृतिक फल में ऐसी कोई coating नहीं होती।
स्वाद से पहचान
प्राकृतिक फल का स्वाद संतुलित और प्राकृतिक sweetness वाला होता है। इसके विपरीत, chemical से पकाए गए फल का स्वाद फीका या असंतुलित हो सकता है। कई बार ऐसे फल ऊपर से मीठे लेकिन अंदर से बेस्वाद होते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
पकने का प्राकृतिक संकेत
प्राकृतिक रूप से पके फल धीरे-धीरे नरम होते हैं और 2–3 दिनों में खराब होना शुरू हो सकते हैं। इसके विपरीत, chemical से पके फल लंबे समय तक खराब नहीं होते और बाहर से नरम लेकिन अंदर से सख्त रह सकते हैं।
सबसे सरल और सुरक्षित घरेलू उपाय
फल खाने से पहले उन्हें 10 मिनट नमक वाले पानी में रखें। या baking soda वाले पानी में रखें, या गुनगुने पानी से धोएं। इससे लगभग 70–90% तक surface chemicals हटाए जा सकते हैं।
विशेष ध्यान रखने योग्य फल
कुछ फलों में chemical उपयोग की संभावना अधिक होती है, जैसे:
आम, केला, सेब, अंगूर और पपीता। इन फलों को खरीदते और उपयोग करते समय विशेष सावधानी रखें। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
मावा (खोया) की शुद्धता जांच
मावा में अक्सर स्टार्च या synthetic पदार्थ मिलाए जाते हैं। आयोडीन टेस्ट एक सरल तरीका है। मावा पर आयोडीन की 1–2 बूंद डालें। यदि रंग नीला या काला हो जाए, तो यह मिलावट का संकेत है। गर्म करने पर शुद्ध मावा धीरे-धीरे पिघलेगा और उसमें प्राकृतिक खुशबू आएगी, जबकि मिलावटी मावा रबर जैसा हो सकता है और उसमें अजीब गंध आ सकती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
पनीर की शुद्धता जांच
शुद्ध पनीर नरम और elastic होता है तथा दबाने पर टूटता नहीं। मिलावटी पनीर सख्त या crumbly हो सकता है। आयोडीन टेस्ट से भी पनीर में स्टार्च की मिलावट का पता लगाया जा सकता है। गर्म पानी में डालने पर शुद्ध पनीर अपनी shape बनाए रखता है, जबकि मिलावटी पनीर टूट सकता है।
सरसों के तेल की शुद्धता जांच
सरसों के तेल में argemone oil की मिलावट स्वास्थ्य के लिए अत्यंत खतरनाक है। फ्रिज टेस्ट में शुद्ध तेल liquid ही रहता है, जबकि मिलावटी तेल का कुछ भाग जम सकता है। हथेली पर लेने पर शुद्ध सरसों तेल में तेज और प्राकृतिक गंध होती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
सार्वभौमिक सावधानियां
खरीदते समय अत्यधिक सस्ते या अत्यधिक चमकीले उत्पादों से बचें। बहुत सफेद और perfect दिखने वाले उत्पाद संदिग्ध हो सकते हैं। हमेशा local और trusted source से खरीदें तथा smell और texture पर ध्यान दें।
सात्विक और सुरक्षित विकल्प
सबसे अच्छा विकल्प है कि स्थानीय और मौसमी फल और खाद्य पदार्थों का उपयोग किया जाए। किसान से सीधे खरीदना सर्वोत्तम होता है। प्राकृतिक भोजन में केवल पोषण नहीं, बल्कि ऊर्जा और जीवन शक्ति होती है। सात्विक भोजन शरीर, मन और चेतना को संतुलित करता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
आज आवश्यकता है जागरूकता की। जब हम शुद्ध और प्राकृतिक भोजन का चयन करते हैं, तो हम केवल अपने स्वास्थ्य की रक्षा नहीं करते, बल्कि प्रकृति, समाज और आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य की भी रक्षा करते हैं। स्वस्थ जीवन का मूल मंत्र है — प्राकृतिक चुनें, शुद्ध चुनें, सात्विक चुनें।
लेखक का परिचय
डॉ. बृजमोहन शर्मा उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के निवासी हैं। वह वैज्ञानिकों की संस्था स्पैक्स (SPECS) के अध्यक्ष हैं। वह समय समय पर राज्य की के लोगों के साथ ही छात्र और शिक्षकों को पानी की गुणवत्ता, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता के लिए जागरूक करते रहते हैं। साथ ही मिलावटी सामान की जांच करने के लिए कार्यशालाओं का आयोजन भी करते हैं। ये काम वह पिछले कई दशकों से कर रहे हैं। इसके साथ ही वह होली के प्राकृतिक रंगों को तैयार करने, एलईडी बल्ब बनाने के साथ ही कई विषयों का छात्रों और महिलाओं को प्रशिक्षण भी देते रहते हैं। उनके ऐसे प्रयासों से कई लोग स्वरोजगार से जुड़े हुए हैं। समाज को ऐसा योगदान देने वालों को लोकसाक्ष्य की ओर से साधुवाद।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


