विधानसभा सत्रः गर्मियों में चारधाम यात्रा और सर्दियों में बर्फबारी बनी गैरसैंण में सत्र के लिए बाधा, दून में सत्र को भूमिका शुरू
उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में गर्मियों के दौरान विधानसभा का बजट सत्र नहीं हो पाया था। पहले सात जून 2022 से गैरसैंण में विधानसभा का सत्र होना था, लेकिन चारधाम यात्रा के बहाने इसकी तिथि बदली और इसे 14 जून से देहरादून में आयोजित किया गया। तब तर्क दिया गया कि चार धाम यात्रा, राज्यसभा चुनाव, मौसम जैसे कारणों के चलते बजट सत्र की तिथि आगे बढ़ाने या फिर इसे देहरादून में ही आयोजित करने की मांग विधायकों की ओर से उठाई जा रही थी। अब शीतकालीन सत्र को भी देहरादून में आयोजित करने की भूमिका बंधनी शुरू हो गई है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)विधानसभा के आगामी सत्र के लिए कसरत शुरू हो गई है। सत्र 16 दिसंबर से पहले होना है। इस कड़ी में विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने भी सर्वदलीय बैठक बुलाकर सत्र की तिथि और स्थान को लेकर विमर्श किया था। माना जा रहा है कि सत्र 15 नवंबर के बाद कभी भी हो सकता है। इसके स्थान को लेकर अब संकेत मिल रहे हैं कि सत्र देहरादून में होगा। क्योंकि इसके लिए भूमिका बनानी शुरू कर दी गई है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
दो विधायकों ने की दून में सत्र की पैरवी
सरकारी प्रेस नोट में कहा गया है कि दो विधायकों ने विधानसभा का शीतकालीन सत्र देहरादून में कराने की पैरवी की है। बताया गया है कि खानपुर विधायक उमेश कुमार तथा लक्सर विधायक शहजाद ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर विधानसभा का आगामी शीतकालीन सत्र देहरादून में आयोजित करवाने का अनुरोध किया है। खानपुर विधायक उमेश कुमार ने एक नवम्बर 2022 को प्रेषित अपने पत्र में मुख्यमंत्री धामी से अनुरोध किया है कि उत्तराखंड में आमजन की भावनाओं को दृष्टिगत रखते हुए ग्रीष्मकालीन विधानसभा सत्र को गैरसैण तथा शीतकालीन विधानसभा सत्र देहरादून में संपन्न कराया जाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इसी तरह लक्सर विधायक शहजाद ने भी एक नवम्बर 2022 को प्रेषित अपने पत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से गैरसैण में अत्यधिक ओलावृष्टि, वर्षा तथा निरन्तर हिमपात होने के कारण विधानसभा का शीतकालीन सत्र देहरादून में ही आयोजित करवाने का आग्रह किया है। हालांकि, शीतकाल में मौसम के हिसाब से दून में ही विधानसभा सत्र आयोजित करना ज्यादा बेहतर माना जा रहा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
वहीं, ग्रीष्मकाल में गैरसैंण में सत्र ना कराने के पीछे तब जो तर्क दिए गए थे, वो गले नहीं उतरते हैं। क्योंकि हर ग्रीष्मकाल में चारधाम यात्रा संचालित होती है। ऐसे में यात्रा के दौरान सत्र गैरसैंण की बजाय देहरादून में कराने का फैसला समझ से परे था। साथ ही एक सवाल ये भी है कि यदि गैरसैंण में विधानसभा सत्र नहीं कराया जाना है, तो वहां विधानसभा के नाम पर आधारभूत ढांचा खड़ा कर धन की बर्बादी क्यों की गई है। या फिर गैरसैंण में विधानसभा सत्र का आयोजन चुनावी साल के दौरान ही कराने में सरकार की दिलचस्पी रहती है।

Bhanu Prakash
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भानु बंगवाल
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


