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February 23, 2025

अग्निपथ के विरोध में पूर्व सीएम हरीश रावत के नेतृत्व में दून में निकली सर्वदलीय पदयात्रा, सैन्यधाम में दी गई श्रद्धांजलि

केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना के विरोध में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के नेतृत्व में दून में सर्वदलीय पदयात्रा निकाली गई। इस दौरान भूतपूर्व सैनिक अधिकारी, पूर्व आईएस, गैर राजनैतिक संगठनों ने भागीदारी की।

केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना के विरोध में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के नेतृत्व में दून में सर्वदलीय पदयात्रा निकाली गई। इस दौरान भूतपूर्व सैनिक अधिकारी, पूर्व आईएस, गैर राजनैतिक संगठनों ने भागीदारी की। इस मौके पर देहरादून सैन्यधाम में शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। साथ ही अग्निपथ के विरुद्ध संघर्ष की घोषणा की गई।
सैन्यधाम चीड़बाग में जाकर अग्निपथ के विरुद्ध वरिष्ठ नागरिक अभियान के तहत शहीदों को श्रद्धाजंलि अर्पित कर पदयात्रा आरम्भ की। पुलिय प्रशासन ने कुछ दूरी पर बैरियर लगाकर सभी को रोका दिया। जहां हरीश रावत के सलाहकार सुरेंद्र कुमार ने राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन पढ़कर सुनाया। इसके बाद पूर्व सैनिक एवं अर्द्धसैनिक संगठन के संरक्षक एवं पूर्व आइएएस एसएस पांगती ने सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा।
इस अवसर पर बोलते हुए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि केन्द्र सरकार ने अग्निपथ योजना लागू करके पूरे देश के नौजवानों के साथ धोखा किया है। हमारा प्रदेश देश को सबसे ज्यादा सेना में नौजवान देने वालों में से एक है। उन्होने कहा कि केन्द्र सरकार ने भारतीय सेना में नियुक्तियों के लिये अग्निपथ योजना का दुभार्ग्यपूर्ण निर्णय लिया है। इसके कालांतर में देश की सैन्य शक्ति, रक्षा सेवाओं और देश की आंतरिक व्यवस्था पर दुष्प्रभाव की आशंका गैर राजनैतिक दलों की ओर से भी व्यक्त की जा रही है। इसमें सेवानिवृत वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, अन्य वरिष्ठ प्रबुद्धजन व विशेषज्ञ भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि हमारा दुःख अपने उन समस्त युवाओं के साथ है जो पिछले कुछ वर्षो से सेना में भर्ती होने का सपना देख तैयारी कर रहे थे। ज्ञापन में कहा गया है कि भारतीय सेना में पिछले 2-3 वर्षों से नियुक्तियॉ नहीं हो पाई हैं। भारतीय सेना में लगभग 2 लाख पद रिक्त चले आ रहे हैं। बताया जाता है कि लगभग 40 हजार पदों को भारतीय सेना में समाप्त किया जा रहा है। अगिनपथ योजना के अर्न्तगत जब युवा सेवानिवृत होकर वापस लौटेगा तो उसके भविष्य के सामने बड़ा शून्य खड़ा होगा। क्योंकि पेशन, ग्रेच्यूएटी सहित अन्य सुविधाओं के लाभ से वह वंचित रहेगा।
इसमें कहा गया है कि शार्ट सर्विस कमीशन के माध्यम से सेना में नियुक्त हुये अधिकारी अपने 10-14 वर्ष की सेवा के उपरान्त भी वर्तमान में कई लाभों से आज भी वंचित हैं। अग्निपथ योजना की घोषणा के साथ कई देशों से तुलना भी की जा रही है, जबकि उन देशों की जनसंख्या व परकैपिटा इन्कम में हम बहुत पिछड़े हैं। ऐसे देशों से तुलना न्यायोचित नहीं कही जा सकती है। बेराजगारी की दर वैसे ही आश्चर्यजनक रुप से चिन्ताजनक स्थिति में है। हम बेरोजगारी में हरियाणा के समकक्ष पहुंच गये हैं। हरियाणा को खेती सहित राजधानी दिल्ली के निकट होना व उद्योगों का लाभ मिलता है। कोरोना व केन्द्र की आर्थिक नीतियों के कारण बेरोजगारी की दर लगातार भयावह रूप ले रही है। बताया जाता है कि 2020-2021 में स्थाई नियुक्तियों की संख्या लगभग 27 प्रतिशत के करीब घटी है। 2017 से 2021 के बीच में ठेके पर रखे जाने वाले युवाओं की संख्या दुगनी हो गई है। स्थाई नियुक्तियॉं लगभग आधे से भी कम हुई हैं। सरकार लगातार स्थाई नियुक्तियों को समाप्त कर ठेकेदारी व्यवस्था लागू कर रही है।
ज्ञापन में कहा गया है कि बताया जाता है कि केन्द्र सरकार के अकेले सार्वजनिक उपक्रमों में ही लगभग 5 लाख 21 हजार नियुक्तियॉ कम की गई हैं। जहॉ 2013 में सार्वजनिक उपक्रमों में स्थाई कर्मचारियों की सख्ंया लगभग 14 लाख 2 हजार थी, वहीं 2020 में स्थाई कर्मचारियों की संख्या घट कर 9 लाख 21 हजार रह गई है। यह आंकड़ा मात्र केन्द्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रमों का है। यहां तक रेलवे में भी लगभग सवा लाख पद रिक्त चल रहे हैं। वहीं कुछ विभागों में परीक्षाएं नहीं करवाई गई। परीक्षाओं की रिजल्ट घोषित नहीं किये गये। परीक्षाएं रद्द कर दी गई। नियुक्ति पत्र जारी नहीं हुये या नियुक्तियां ही रद्द कर दी गई हैं। अग्निपथ के नाम पर लगभग 144 सेना भर्ती रदद् की गई हैं व 51 सेना भर्ती रैली में भाग लेने वाले युवाओं का निर्णय आज तक भी घोषित नहीं किया गया है। पिछले 2 वर्ष में 50 हजार युवाओं ने परीक्षा, फिजीकल, मैडिकल, रिर्टन टेस्ट आदि पास कर लिये परन्तु उनका सेना में भर्ती होने का सपना अभी तक पूरा नहीं हो पाया है।
उन्होने राष्ट्रपति से आग्रह करते हुए कहा कि हम उत्तराखंड के लोग सैन्य परम्परा से भावनात्मक रुप से जुड़े हैं। सेना, अर्द्ध सैनिक बल व पुलिस में भर्ती होना हर युवा का एक सपना होता है। केन्द्र सरकार, पेशंन, ग्रेच्यूएटी व अन्य खर्चो में कटौती के उद्वेश्य से उपरोक्त नियुक्तियॉं रदद् कर अग्निपथ जैसी योजना लाई है। हम सब अग्निपथ के विरुद्ध वरिष्ठ नागरिक अभियान के तहत आपसे आग्रह करते हैं कि भारतीय सेना, देश की सुरक्षा व युवाओं के हित को देखते हुये अग्निपथ योजना को रदद् करने के लिये केन्द्र सरकार को निर्देशित करने की कृपा करें। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने मौके पर पहुँच कर आंदोलन को समर्थन और कहा कि अग्निपथ के विरुद्ध संघर्ष जारी रहेगा।
इस अवसर पर जनरल टीपीएस रावत, पूर्व आईएस एस एस पांगती, डॉ. एस एन सचान, समर भंडारी, सुरेन्द्र सजवाण, काशी सिंह ऐरी, एएस मिनाहस, मेजर हरी सिंह चौधरी, कर्नल ए एस शर्मा, कर्नल निशकान्त ध्यानी, कर्नल एस पी शर्मा, कर्नल मोहन सिंह रावत, पृथवीपाल चौहान, कैप्टन बलबीर रावत, पी सी थपलियाल, किशन मेहता, महेन्द्र नेगी गुरुजी, शीषपाल बिष्ट, मनोज थापा, चौधरी मदन पाल बड़ाना, हवलदार सूर्य प्रकाश, सुबेदार सी एम भटट्, एस एस नेगी, कुशल राम, सहदेव शर्मा, बलबीर सिंह, कमल क्षेत्री, एस एस रजवार, विजय पाल, राजेन्द्र धवन, सुरेन्द्र कुकरेती, सुनील जयसवाल, रामकुमार जयसवाल, गरिमा दसौनी, प्रदीप डोभाल, नरेन्द्र रावत, सजय मलल, शेरजंग थापा, मनीष नगापाल, मनीष कर्णवाल, महावीर सिंह रावत, पूरन सिंह रावत, राकेश गोड़, गोपाल नारसन, मोहन काला, ओम प्रकाश सती बब्बन, अभिषेक भंडारी, वासूदेव प्रधान, सुभाष थापा, डॉ. इकबाल सहित दर्जनों भूतपूर्व सैनिक अधिकारी व पूर्व सैनिक उपरोक्त पद यात्रा में शामिल हुए।
जारी रखा जाएगा संघर्ष
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बैरियर स्थल पर ही वहॉ पर उपस्थित सर्वदली संगठनों के नेताओं की सहमति से अग्निपथ के विरोध में लगामार संघर्ष करने की घोषणा की। इसके तहत राज्य के प्रधानों, पूर्व प्रधानों, पूर्व सैनिकों व मातृ शक्ति प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अग्निपथ और अग्निवीर योजना को रदद् करने का आग्रह करेंगे। उन्होने कहा कि अग्निपपथ के विरुद्ध निरंतर संघर्ष व सत्याग्रह जारी रहेगा। कार्यक्रम के समापन के बाद मौसे से पानी की खाली बोतलों को एकत्रित कराकर कूड़ाघर भिजवाया गया।

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

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